पेरिस,1 जून (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच जल्द-से-जल्द समझौता किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में सबसे बड़ी प्राथमिकता युद्धविराम सुनिश्चित करना और बिना किसी शर्त के होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होना चाहिए। मैक्रों का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए संवाद और कूटनीतिक समाधान ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि उन्होंने हाल के दिनों में मध्य पूर्व के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत की है। इनमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान,ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक,संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी शामिल हैं। इन सभी नेताओं के साथ हुई चर्चाओं में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति,बढ़ते सैन्य तनाव और संभावित कूटनीतिक समाधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
मैक्रों ने बताया कि उन्होंने सभी नेताओं को एक समान संदेश दिया है। उनके अनुसार,अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को जल्द समाप्त करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश जल्द किसी सहमति तक पहुँचते हैं,तो न केवल क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत होगी,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को भी कम किया जा सकेगा। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी समझौते का आधार अंतर्राष्ट्रीय कानून होना चाहिए और सभी पक्षों को उसी के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना वर्तमान संकट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यह जलमार्ग विश्व व्यापार और विशेष रूप से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से तक पहुँचने वाले तेल और गैस का एक बड़ा भाग इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहाँ किसी भी प्रकार की बाधा का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ता है। मैक्रों का मानना है कि इस जलमार्ग को बिना किसी शर्त के और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप खोलना क्षेत्र में विश्वास बहाली की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम के बाद व्यापक बातचीत का रास्ता खुलना चाहिए। इस प्रक्रिया में ईरान के परमाणु कार्यक्रम,बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा आवश्यक होगी। मैक्रों के अनुसार,केवल अस्थायी समाधान पर्याप्त नहीं होंगे। क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक और मजबूत समझौते की आवश्यकता है,जिसमें सभी प्रमुख सुरक्षा चिंताओं का समाधान शामिल हो।
फ्रांस ने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की भी इच्छा जताई है। मैक्रों ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने संकेत दिया कि फ्रांस ब्रिटेन के साथ मिलकर एक बहुराष्ट्रीय पहल का हिस्सा बन सकता है,जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा। यह पहल अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और समुद्री मार्गों को खुला बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मैक्रों ने क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में लेबनान का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति की शुरुआत लेबनान से होनी चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से हिंसा समाप्त करने और तनाव कम करने की अपील की। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने दोहराया कि उनका देश लेबनान की सरकार को उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करने के प्रयासों में निरंतर समर्थन देता रहेगा।
इस बीच लेबनान में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार,रविवार को दक्षिणी शहर टायर में स्थित हिराम अस्पताल के निकट एक क्षेत्र पर इजरायली हवाई हमला किया गया। इस हमले में अस्पताल के 13 कर्मचारी घायल हो गए और अस्पताल की इमारत को भी काफी नुकसान पहुँचा। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार,हमले के कारण अस्पताल के संचालन पर असर पड़ा है और चिकित्सा सेवाओं को अस्थायी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर भी नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान के साथ होने वाली संभावित वार्ताओं की शर्तों में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वाशिंगटन प्रशासन नए प्रस्तावों और लचीले विकल्पों पर काम कर रहा है,ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके और किसी सहमति तक पहुँचने की संभावना मजबूत हो।
उधर ईरान भी अपनी ओर से नए प्रस्ताव तैयार करने में जुटा हुआ है। हालाँकि,दोनों पक्षों के बीच वार्ता की प्रक्रिया आसान नहीं रही है। विभिन्न मुद्दों पर मतभेद और राजनीतिक जटिलताएँ बातचीत को बार-बार प्रभावित कर रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,वार्ता लगातार आगे-पीछे की स्थिति में बनी हुई है और कई बार ऐसा लगता है कि प्रक्रिया फिर शुरुआती चरण में लौट सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में कूटनीति ही सबसे प्रभावी विकल्प है। यदि अमेरिका और ईरान किसी समझौते तक पहुँचने में सफल होते हैं,तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आएगी और क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति संभव होगी। ऐसे में फ्रांस की पहल और इमैनुएल मैक्रों की सक्रिय कूटनीतिक कोशिशों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है,जिसका उद्देश्य संघर्ष की जगह संवाद को बढ़ावा देना और क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करना है।
