न्यूयॉर्क,4 अगस्त (युआईटीवी)- दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक और सामरिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह ओमान के साथ मिलकर इस रणनीतिक जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही के लिए एक नई व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रहा है। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत वर्तमान में इस्तेमाल हो रही अलग-अलग समुद्री लेनों की जगह एक साझा दो-तरफा मार्ग बनाया जाएगा,जिससे जहाज सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से इस जलडमरूमध्य से गुजर सकेंगे। यदि दोनों देशों के बीच इस योजना पर सहमति बन जाती है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने तेहरान में आयोजित एक समाचार ब्रीफिंग के दौरान इस प्रस्तावित योजना की जानकारी दी। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने बताया कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक साझा दो-तरफा समुद्री मार्ग विकसित करने को लेकर बातचीत चल रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मौजूदा उत्तरी और दक्षिणी समुद्री मार्गों की जगह एक अंतरिम साझा कॉरिडोर तैयार करना है,जिसे दोनों तटीय देशों के हितों और सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा।
बाघेई ने कहा कि इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित और सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत पूरी तरह ईरान और ओमान के बीच हो रही है तथा इसमें किसी तीसरे देश की भागीदारी नहीं है। उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से यह दावा किया गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलने के संबंध में ईरान के साथ बातचीत चल रही है। हालाँकि,ईरानी प्रवक्ता ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
दूसरी ओर,ओमान ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने न तो बातचीत की पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है। उसकी चुप्पी ने इस प्रस्ताव को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्सुकता और अटकलों को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो यह खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में गिना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के बड़े तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादक देशों से होने वाले निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव,अवरोध या सुरक्षा संकट पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों और तेल की कीमतों को प्रभावित करता है।
पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई थीं। ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने और वहां से गुजरने वाले कुछ जहाजों पर हमलों के आरोप लगाए गए थे। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर कड़े प्रतिबंध लगाए और समुद्री गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार,अमेरिका ने उन जहाजों के खिलाफ भी कार्रवाई की जो इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी बंदरगाहों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे थे। इन घटनाओं ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया तथा कई देशों ने इस क्षेत्र में जहाज भेजने को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी शुरू कर दी।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार,प्रस्तावित अंतरिम समुद्री कॉरिडोर तब तक लागू रहेगा जब तक ईरान और ओमान मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम के स्थायी विकल्प पर सहमत नहीं हो जाते। यह अंतरिम व्यवस्था समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाए रखने और जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने वर्ष 1968 में ईरान और ओमान की ओर से प्रस्तुत ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम को स्वीकार किया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री यातायात को व्यवस्थित करना,जहाजों के बीच टकराव की आशंका को कम करना और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाना था। इस प्रणाली के तहत दोनों दिशाओं में दो-दो मील चौड़ी अलग-अलग समुद्री लेन निर्धारित की गई थीं तथा उनके बीच दो मील चौड़ा पृथक्करण क्षेत्र बनाया गया था ताकि विपरीत दिशाओं में चलने वाले जहाज सुरक्षित दूरी बनाए रख सकें।
हालाँकि,हालिया तनाव और समुद्री बारूदी सुरंगों की मौजूदगी की खबरों के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने जहाजों को मौजूदा ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम वाले मार्ग से बचने की सलाह दी है। इससे कई जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में वृद्धि हुई। यही कारण है कि नई समुद्री व्यवस्था को वैश्विक व्यापार जगत के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और ओमान जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं, उसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को एक राजमार्ग की तरह संचालित करने की योजना है। इस व्यवस्था के तहत जहाज दाहिनी ओर की लेन का उपयोग करेंगे,जिससे दोनों दिशाओं में यातायात अधिक व्यवस्थित रहेगा। प्रस्ताव के अनुसार,फारस की खाड़ी की ओर जाने वाले जहाज ईरान के समुद्री क्षेत्र से सटे मार्ग का उपयोग करेंगे,जबकि खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाज ओमान की ओर स्थित समुद्री मार्ग से गुजरेंगे। इस मॉडल का उद्देश्य जहाजों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित और नियंत्रित बनाना है।
बाघेई ने यह भी कहा कि अमेरिका जिस दक्षिणी समुद्री मार्ग को ओमान के जलक्षेत्र के माध्यम से संचालित करना चाहता था,वह जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सहमति-पत्र की भावना के अनुरूप नहीं था। उनके अनुसार,उस प्रस्ताव से पर्यावरणीय जोखिम बढ़ सकते थे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई प्रश्न भी उत्पन्न होते थे। इसलिए ईरान ने उस व्यवस्था का समर्थन नहीं किया।
रिपोर्टों के अनुसार,कुछ समय के लिए अमेरिकी नौसेना ने ओमान की ओर से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने की कोशिश की थी। हालाँकि,सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कुछ जहाजों पर हमले हुए,जिसके बाद इस एस्कॉर्ट व्यवस्था को प्रभावी रूप से जारी नहीं रखा जा सका। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल सैन्य सुरक्षा के भरोसे इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखना आसान नहीं है और इसके लिए क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी सहयोग आवश्यक है।
नई व्यवस्था को लेकर एक और महत्वपूर्ण चर्चा संभावित सेवा शुल्क को लेकर भी सामने आई है। कुछ अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यदि यह योजना लागू होती है,तो ईरान अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क ले सकता है। हालाँकि,इसे औपचारिक रूप से टोल टैक्स नहीं कहा जाएगा,ताकि यह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन न माना जाए। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ऐसे किसी भी शुल्क का विरोध कर चुके हैं।
जब समाचार ब्रीफिंग के दौरान इस संभावित सेवा शुल्क के बारे में सवाल पूछा गया तो इस्माइल बाघेई ने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से परहेज किया और केवल इतना कहा कि बातचीत अभी जारी है तथा कई मुद्दों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच अभी कई तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श चल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और ओमान के बीच यह समझौता सफल होता है,तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। इससे एशिया,यूरोप और अन्य क्षेत्रों में ऊर्जा आयात करने वाले देशों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। तेल और गैस की वैश्विक कीमतों में भी स्थिरता आ सकती है,क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
इसके साथ ही यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत माना जा रहा है। यदि ईरान और ओमान बिना किसी बाहरी शक्ति की प्रत्यक्ष भागीदारी के इस संवेदनशील समुद्री मार्ग के संचालन के लिए नई व्यवस्था स्थापित करने में सफल रहते हैं,तो यह क्षेत्रीय सहयोग का एक नया उदाहरण बन सकता है। वहीं, यदि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की असहमति या सुरक्षा चुनौती सामने आती है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार,ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान और ओमान के बीच चल रही इन वार्ताओं पर टिकी हुई है। ओमान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच संभावित समझौते के स्वरूप से आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के लिए प्रस्तावित नई व्यवस्था वास्तव में लागू हो पाती है या नहीं। यदि यह योजना सफल होती है तो यह दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक पर स्थिरता और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
