प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@OpIndia_in)

ट्रंप पीएम मोदी को अपना दोस्त मानते हैं,भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊँचाई देने के लिए प्रतिबद्ध: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

वाशिंगटन,30 जून (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र मानते हैं और भारत के साथ संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों नेताओं के बीच वर्षों से बना व्यक्तिगत विश्वास और मजबूत तालमेल केवल निजी रिश्तों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी,व्यापार,रक्षा,तकनीक और वैश्विक सहयोग पर भी पड़ रहा है। सर्जियो गोर ने कहा कि आने वाले दो वर्ष भारत और अमेरिका के संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे और इसी दौरान लिए गए फैसले आने वाले कई दशकों तक दोनों देशों की साझेदारी की दिशा तय करेंगे।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप अक्सर भारत की अपनी यात्रा और यहाँ के लोगों के बारे में सकारात्मक बातें करते हैं। गोर के अनुसार,राष्ट्रपति ट्रंप भारत को केवल एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में नहीं देखते,बल्कि ऐसे मित्र राष्ट्र के रूप में देखते हैं,जिसके साथ अमेरिका भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकता है।

राजदूत ने कहा कि उन्हें हाल ही में वाशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ लगभग दो घंटे बिताने का अवसर मिला। इस दौरान भारत में अपने अनुभवों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत में हुई प्रगति और दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते सहयोग से बेहद संतुष्ट नजर आए। गोर ने कहा कि ट्रंप के मन में भारत की कई सुखद यादें हैं और वह अक्सर अपने भारत दौरे को अपने सार्वजनिक जीवन के सबसे यादगार विदेशी दौरों में से एक बताते हैं।

सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छा है कि अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान वह एक बार फिर भारत की यात्रा करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच आमने-सामने की मुलाकात होगी,जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि उच्चस्तरीय यात्राएँ केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होतीं,बल्कि वे दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को नई गति देने का माध्यम भी बनती हैं।

राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों का एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले वह मियामी में आयोजित अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप के एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने अचानक उनसे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन लगाया जाए। गोर ने राष्ट्रपति को याद दिलाया कि उस समय भारत में सुबह के छह बजे थे। इस पर ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जाग जाएँगे क्योंकि वह भी उनकी तरह जल्दी उठने वाले व्यक्ति हैं।

हालाँकि,बाद में यह बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई,लेकिन गोर ने कहा कि यह घटना दोनों नेताओं के बीच मौजूद सहजता और विश्वास को दर्शाती है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच वर्षों से विकसित हुआ यह व्यक्तिगत संबंध भारत-अमेरिका साझेदारी की एक महत्वपूर्ण ताकत बन चुका है।

उन्होंने कहा कि ट्रंप और मोदी के बीच यह विश्वास ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही विकसित होना शुरू हो गया था। उसी दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण अवसरों पर एक-दूसरे के साथ सार्वजनिक मंच साझा किया और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी। गोर के अनुसार,शीर्ष नेतृत्व के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध अक्सर जटिल अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी तेजी से सहमति बनाने में मदद करते हैं।

सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका की सरकारें केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं,बल्कि दोनों देशों का पूरा ध्यान ठोस परिणाम देने पर है। उन्होंने कहा कि व्यापार,निवेश,रक्षा,उन्नत प्रौद्योगिकी,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,नवाचार,ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ाया जा रहा है। दोनों देशों की प्राथमिकता ऐसे दीर्घकालिक ढांचे तैयार करना है,जिससे भविष्य में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत हो सके।

उन्होंने कहा कि अगले दो वर्ष इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इस दौरान जो नीतिगत फैसले लिए जाएँगे,वे आने वाले कई दशकों तक दोनों देशों के संबंधों की दिशा निर्धारित करेंगे। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद उद्योग जगत,निवेशकों और नीति निर्माताओं से कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों को केवल अल्पकालिक अवसर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक दीर्घकालिक साझेदारी है,जिसमें आज किए गए निवेश और सहयोग का लाभ आने वाली पीढ़ियों तक मिलेगा।

गोर ने कहा कि आज जो बीज बोए जा रहे हैं,वे भविष्य में दोनों देशों के बीच आर्थिक समृद्धि,तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक स्थिरता की मजबूत नींव बनेंगे। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल दो सरकारों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें उद्योग,शिक्षा,अनुसंधान संस्थानों और दोनों देशों के नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

अमेरिकी राजदूत ने उन अटकलों को भी खारिज किया,जिनमें समय-समय पर भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव या दूरी की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कई तरह की टिप्पणियाँ और विश्लेषण सामने आते रहते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि यदि व्यापार,रक्षा सहयोग,निवेश,लोगों के बीच संपर्क और तकनीकी साझेदारी जैसे क्षेत्रों को देखा जाए,तो यह संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई देता है।

गोर ने कहा कि पिछले छह महीनों के दौरान भारत में रहते हुए उन्होंने विकास की अपार संभावनाएँ देखी हैं। उनके अनुसार,ऐसा शायद ही कोई दिन गुजरता हो जब दोनों देशों के बीच किसी नए क्षेत्र में सहयोग की संभावना सामने न आती हो। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और अमेरिका इस परिवर्तन का साझेदार बनना चाहता है।

उन्होंने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल तकनीक,रक्षा उत्पादन,साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान,उन्नत विनिर्माण और नवाचार जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में भारत और अमेरिका मिलकर वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास प्रतिभा,संसाधन और तकनीकी क्षमता का ऐसा संयोजन है,जो आने वाले वर्षों में दुनिया के लिए नए मानक स्थापित कर सकता है।

राजदूत ने रक्षा सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देश संयुक्त अभ्यास,रक्षा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इसी प्रकार व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है और अनेक अमेरिकी कंपनियाँ भारत में निवेश के नए अवसर तलाश रही हैं।

भारत और अमेरिका के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को भी उन्होंने इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि लाखों भारतीय मूल के लोग अमेरिका में शिक्षा, विज्ञान,चिकित्सा,उद्योग और तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में अमेरिकी कंपनियाँ भारत में रोजगार और निवेश के अवसर पैदा कर रही हैं। इस मानवीय जुड़ाव ने दोनों देशों के संबंधों को केवल रणनीतिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी मजबूत बनाया है।

ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बने मजबूत संबंधों का उल्लेख करते हुए गोर ने वर्ष 2019 में ह्यूस्टन में आयोजित “हाउडी मोदी” कार्यक्रम और वर्ष 2020 में अहमदाबाद में आयोजित “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम को भी याद किया। इन दोनों आयोजनों ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था और इन्हें भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा का प्रतीक माना गया था। इन आयोजनों के माध्यम से दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रदर्शन किया था,जिसका प्रभाव बाद के वर्षों में भी द्विपक्षीय सहयोग पर दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और अमेरिका की साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा,वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला,नई तकनीकों का विकास,स्वच्छ ऊर्जा,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक सहयोग जैसे विषय दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल हैं। ऐसे समय में शीर्ष नेतृत्व के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध नीति निर्माण और रणनीतिक निर्णयों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सर्जियो गोर के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देख रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य आने वाले कई दशकों तक स्थायी और मजबूत संबंध स्थापित करना है। व्यापार,रक्षा,निवेश,तकनीक,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,शिक्षा और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क को देखते हुए दोनों देशों के संबंध लगातार नए आयाम हासिल कर रहे हैं।

अमेरिकी राजदूत के अनुसार,भारत और अमेरिका के बीच मौजूद विश्वास,साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की साझा रणनीतिक सोच के आधार पर यह साझेदारी आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि दोनों देश इसी गति से सहयोग बढ़ाते रहे तो आने वाले वर्षों में यह संबंध वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में सबसे प्रभावशाली द्विपक्षीय साझेदारियों में से एक बन सकता है।