वॉशिंगटन,6 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है,जहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान को लेकर देश के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें तेज हो गई हैं। ईस्टर के मौके पर ईरान को लेकर किए गए उनके विवादित और आक्रामक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद कई अमेरिकी सांसदों और राजनीतिक हस्तियों ने उनके खिलाफ अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन को लागू करने की माँग शुरू कर दी है। यह मुद्दा अब केवल राजनीतिक मतभेदों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
दरअसल,ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ईरान को चेतावनी देते हुए बेहद कड़े और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए कहा और चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो मंगलवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “ईरान में मंगलवार का दिन ‘पावर प्लांट’ और ‘ब्रिज डे’ के रूप में जाना जाएगा,” जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना हो सकती है। इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक करार दिया है। कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि वह ट्रंप की कैबिनेट का हिस्सा होते,तो ईस्टर के दिन ही संवैधानिक वकीलों से 25वें संशोधन को लागू करने पर चर्चा करते। उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि विपक्षी दल ट्रंप के इस रवैये को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।
इसी क्रम में डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव यासमीन अंसारी ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “25वां संशोधन किसी वजह से मौजूद है,” जिससे उन्होंने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि राष्ट्रपति के व्यवहार पर संवैधानिक कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है। उनके इस बयान को ओवरसाइट डेम्स जैसे संगठनों ने भी समर्थन दिया,जिससे यह मुद्दा और अधिक व्यापक हो गया।
मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस विवाद में अपनी राय रखी है। मशहूर पत्रकार और पूर्व एमएसएनबीसी होस्ट मेहदी हसन ने कहा कि ट्रंप का ईस्टर संदेश ऐसा है,जिस पर उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को गंभीरता से विचार करते हुए 25वें संशोधन को लागू करना चाहिए। इसी तरह व्हाइट हाउस के रिपोर्टर एसवी डेट ने भी कहा कि राष्ट्रपति के इस व्यवहार को देखते हुए यह मामला 25वें संशोधन के दायरे में आता है।
डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव मेलानी स्टैंसबरी ने तो और भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस और कैबिनेट कार्रवाई करें। उन्होंने अपने बयान में कहा कि “सम्राट के पास कपड़े नहीं हैं,” जो एक प्रतीकात्मक टिप्पणी है कि सत्ता में बैठे व्यक्ति की कमजोरियाँ अब साफ दिखने लगी हैं।
इस पूरे विवाद में दिलचस्प मोड़ तब आया,जब ट्रंप की पूर्व समर्थक और रिपब्लिकन नेता मार्जोरी टेलर ग्रीन ने भी एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए सरकार से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि ट्रंप का व्यवहार असामान्य होता जा रहा है और इस स्थिति में उचित कदम उठाए जाने चाहिए। हालाँकि,उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
ट्रंप के आलोचकों में शामिल पूर्व कांग्रेसी जो वॉल्श ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप का यह रवैया देश और दुनिया के लिए एक दाग के समान है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि 25वें संशोधन का उपयोग किया जाए। इसी तरह ट्रंप के पहले कार्यकाल में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर रह चुके एंथनी स्कारामुची ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि अमेरिका के संस्थापकों ने ऐसी ही स्थिति के लिए प्रावधान बनाए थे,ताकि यदि कोई नेता अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभाने में सक्षम न हो,तो उसे पद से हटाया जा सके।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर 25वां संशोधन क्या है और यह कैसे लागू होता है। अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन राष्ट्रपति की कार्यक्षमता से जुड़ा हुआ है। इसके तहत यदि उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के अधिकांश सदस्य यह मान लें कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम नहीं हैं,तो वे मिलकर उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाते हैं।
हालाँकि,इस प्रक्रिया को लागू करना आसान नहीं होता,क्योंकि इसके लिए कैबिनेट के बहुमत का समर्थन आवश्यक होता है। इसके अलावा,यदि राष्ट्रपति इस फैसले को चुनौती देते हैं,तो अंतिम निर्णय कांग्रेस के हाथ में जाता है,जहाँ दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इसलिए यह एक जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया है,जिसे केवल अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में ही अपनाया जाता है।
ट्रंप के इस विवादित बयान ने न केवल अमेरिका की घरेलू राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। ईरान के साथ पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस तरह की बयानबाजी से स्थिति और बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
ट्रंप के हालिया बयान और उसके बाद उठी 25वें संशोधन की माँग ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा आगे किस दिशा में जाता है और क्या वास्तव में इस संवैधानिक प्रावधान को लागू करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है या यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।
