वॉशिंगटन,7 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को समझौते के लिए अंतिम समयसीमा देते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि बातचीत विफल होती है,तो अमेरिका व्यापक सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप के इस बयान ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि इसका सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास समझौते के लिए “कल तक का समय” है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कूटनीतिक रास्ता तेजी से बंद हो रहा है और अब निर्णय का समय आ गया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बातचीत अभी जारी है और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ट्रंप ने कहा, “हमें लगता है कि वे ईमानदारी से बातचीत कर रहे हैं… हमें जल्द ही पता चल जाएगा।” इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अभी भी अंतिम क्षण तक कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनाए हुए है,लेकिन साथ ही सैन्य विकल्पों को भी पूरी तरह खुला रखे हुए है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि ईरान ने अमेरिकी शर्तों का पालन नहीं किया,तो संभावित सैन्य कार्रवाई का दायरा काफी व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें बुरी तरह हिला सकते हैं,” जो इस बात का संकेत है कि अमेरिका किसी सीमित कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संभावित लक्ष्यों के मामले में “बहुत कम चीजें सीमा से बाहर हैं,” जिससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा हुआ है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका की प्रमुख माँगों में से एक यह है कि तेल और अन्य आवश्यक संसाधनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा, “उस समझौते का एक हिस्सा यह होगा कि हम तेल और अन्य चीजों की मुक्त आवाजाही चाहते हैं।” इस संदर्भ में होर्मुज़ जलडमरूमध्य का विशेष महत्व है,जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। यहाँ से गुजरने वाले जहाजों में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक तेल बाजार को हिला सकती है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि हालिया अमेरिकी अभियानों के बाद ईरान की सैन्य क्षमताएँ काफी कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, “उनके पास नौसेना नहीं है… उनके पास वायु सेना नहीं है… उनके पास वायु रक्षा प्रणाली नहीं है।” हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान अब भी असममित युद्ध रणनीतियों के जरिए खतरा पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पारंपरिक युद्ध के बजाय छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी हमलों के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर सकता है,जैसे कि समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल या प्रॉक्सी समूहों के जरिए हमले।
इस संकट के संभावित परिणामों को लेकर खुद ट्रंप ने भी अनिश्चितता जताई। उन्होंने कहा, “मैं आपको नहीं बता सकता… यह इस पर निर्भर करता है कि वे क्या करते हैं।” यह बयान दर्शाता है कि स्थिति बेहद नाजुक और अप्रत्याशित बनी हुई है,जहाँ किसी भी समय घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है।
अमेरिका की यह रणनीति दबाव और कूटनीति के मिश्रण पर आधारित नजर आती है। एक तरफ वह ईरान पर कड़े आर्थिक और सैन्य दबाव बना रहा है,वहीं दूसरी ओर बातचीत के दरवाजे भी खुले रखे हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि कई देश इस संकट के समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा, “इस युद्ध से बहुत से लोग प्रभावित हो रहे हैं,” जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल दो देशों के बीच का मुद्दा नहीं रह गया है,बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है,तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति होती है और यहाँ किसी भी प्रकार की रुकावट तेल की कीमतों में भारी उछाल ला सकती है। ट्रंप ने भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने समुद्री मार्गों में बाधा डालने के लिए छोटे कदम भी उठाए,जैसे कि समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाना,तो इससे जहाजों की आवाजाही रुक सकती है और इसका व्यापक आर्थिक असर हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी सतर्क कर दिया है। यूरोपीय देशों से लेकर एशियाई देशों तक,सभी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है,तो इसका असर वैश्विक व्यापार,ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर पड़ेगा। भारत जैसे देश,जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं,इस स्थिति पर खास नजर बनाए हुए हैं।
ट्रंप की चेतावनी ने पश्चिम एशिया में तनाव को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है। अब सबकी निगाहें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि वह बातचीत के जरिए समाधान निकालता है,तो स्थिति सामान्य हो सकती है,लेकिन अगर ऐसा नहीं होता,तो क्षेत्र में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
