विदेश मंत्री एस. जयशंकर (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता तेज,फ्रांस और इक्वाडोर के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

संयुक्त राष्ट्र,22 सितंबर (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अपनी कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज कर दीं। उन्होंने फ्रांस और इक्वाडोर के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कौशल विकास और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों बैठकों को संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र से पहले भारत की सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी के तौर पर देखा जा रहा है।

जयशंकर ने सबसे पहले फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस के बीच नियमित बैठकें तथा टेलीकॉन्फ्रेंस दोनों देशों की विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की गति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों नेताओं ने मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर व्यापक चर्चा की।

बैठक में यूक्रेन संकट और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव प्रमुख विषयों में शामिल रहे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा भी बातचीत के एजेंडे में रहा। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और उसमें विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। ऐसे में महासभा के उच्च स्तरीय सत्र से ठीक पहले इस मुद्दे पर फ्रांस के साथ चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और फ्रांस के संबंधों ने हाल के वर्षों में रणनीतिक स्तर पर लगातार विस्तार किया है। फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के संयुक्त बयान में इस बात पर जोर दिया गया था कि यह साझेदारी आने वाले दशकों में दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत-फ्रांस सहयोग में रक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके साथ ही ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों देश सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त विकास को दोनों देशों की साझेदारी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला को लेकर चुनौतियाँ बनी हुई हैं,भारत और फ्रांस के बीच इस क्षेत्र में सहयोग का महत्व और बढ़ गया है।

फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने इक्वाडोर के विदेश मंत्री रोबर्टो क्यूरी से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत और इक्वाडोर के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, लोगों की आवाजाही, कौशल प्रशिक्षण और विकास साझेदारी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा रहा।

इक्वाडोर के साथ भारत के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई नए आयाम जुड़े हैं। दक्षिण अमेरिका के प्रशांत तट पर स्थित इक्वाडोर प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण देश है। भारत अपनी वैश्विक दक्षिण नीति के तहत लैटिन अमेरिकी और अन्य विकासशील देशों के साथ संबंधों को व्यापक बनाने पर जोर देता रहा है। इक्वाडोर के साथ सहयोग इसी व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है।

प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बनकर उभरे हैं। भारत ने इक्वाडोर के मानव संसाधन और कौशल विकास में भी योगदान दिया है। पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत की ओर से 223 इक्वाडोरियन पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा इक्वाडोर के एक विश्वविद्यालय में भारत की सहायता से सूचना प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है। इस केंद्र के माध्यम से अब तक 813 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण हैं। भारत से इक्वाडोर को दवाओं और अन्य औषधीय उत्पादों का निर्यात होता है। भारतीय फार्मास्यूटिकल्स की प्रतिस्पर्धी कीमत और व्यापक उत्पादन क्षमता को देखते हुए इस क्षेत्र में आगे भी सहयोग की संभावनाएँ बनी हुई हैं। इसके साथ ही कौशल विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों के संबंधों को और व्यापक आधार दे सकती है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा का उच्च स्तरीय सत्र दुनिया के प्रमुख देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों को वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करता है। ऐसे में महासभा के औपचारिक सत्र शुरू होने से पहले जयशंकर की फ्रांस और इक्वाडोर के विदेश मंत्रियों के साथ हुई बैठकें भारत की बहुपक्षीय और द्विपक्षीय कूटनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी हैं। इन बैठकों के जरिए भारत ने एक ओर प्रमुख यूरोपीय साझेदार फ्रांस के साथ रणनीतिक समन्वय को आगे बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर वैश्विक दक्षिण के महत्वपूर्ण साझेदार इक्वाडोर के साथ सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा की।