ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@SavalRohit)

संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क पहुँचे अराघची,पेजेश्कियन की टीम को अमेरिका ने नहीं दिया वीजा

तेहरान,22 सितंबर (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची सोमवार दोपहर एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के साथ न्यूयॉर्क पहुँच गए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अराघची के न्यूयॉर्क पहुँचने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ईरानी विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र की बैठकों और विभिन्न चर्चाओं में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का पक्ष भी रखेंगे।

बाघेई के अनुसार,अराघची महासभा के विभिन्न एजेंडे से संबंधित बैठकों में शामिल होने के अलावा कई देशों के अधिकारियों और विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे। इन बैठकों के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र महासभा का उच्च स्तरीय सत्र दुनिया के अलग-अलग देशों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों को वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने तथा कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। ईरान भी इस मंच के माध्यम से अपनी विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपना रुख दुनिया के सामने रखेगा।

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां वार्षिक सत्र मंगलवार से राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के प्रमुखों के संबोधन के साथ शुरू होगा। इस वर्ष महासभा की व्यापक थीम ‘भरोसा फिर से कायम करना’ रखी गई है। इसके तहत बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने, देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर विश्वास बहाल करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। विभिन्न देशों के प्रतिनिधि इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय संकटों सहित कई विषयों पर अपनी बात रखेंगे।

ईरान के लिए इस बार का महासभा सत्र कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्री अराघची के अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन भी न्यूयॉर्क पहुँचने वाले हैं। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक पेजेश्कियन मंगलवार को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगे और बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। उनके संबोधन में ईरान की विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर देश का रुख सामने आने की संभावना है।

हालाँकि,पेजेश्कियन की यात्रा से पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक नया राजनयिक विवाद सामने आया है। ईरानी पक्ष के अनुसार,अमेरिका ने ईरानी राष्ट्रपति की संचार टीम के सदस्यों को वीजा देने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान उनकी गतिविधियों और कार्यक्रमों को कवर करने वाली संचार टीम को वीजा नहीं मिलने से ईरानी पक्ष में नाराजगी देखी जा रही है।

अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने की अनुमति दी है,लेकिन प्रतिनिधिमंडल की गतिविधियों पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। अमेरिकी पक्ष की ओर से ईरानी प्रतिनिधिमंडल के लिए आवाजाही और कुछ वस्तुओं की खरीद से संबंधित सीमाएँ निर्धारित की गई हैं। इनमें लग्जरी सामान और कुछ अन्य वस्तुओं की खरीद पर रोक भी शामिल है। इस तरह ईरानी प्रतिनिधिमंडल की संयुक्त राष्ट्र यात्रा को अनुमति मिलने के बावजूद उसके सदस्यों पर कुछ विशेष नियम लागू रहेंगे।

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से कई मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे विषय दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र महासभा ईरान को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखने का एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराती है। अराघची की विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों के साथ होने वाली बैठकें भी इस दृष्टि से अहम होंगी।

अराघची की कूटनीतिक बैठकों में ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बड़ी संख्या में देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी न्यूयॉर्क में मौजूद रहते हैं। ऐसे में ईरानी विदेश मंत्री के पास कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर होगा। इससे ईरान अपनी प्राथमिकताओं और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

पेजेश्कियन का महासभा में संबोधन भी ईरान के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। राष्ट्रपति के भाषण में वैश्विक राजनीति, क्षेत्रीय परिस्थितियों और ईरान की विदेश नीति से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए जा सकते हैं। वहीं,उनकी यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं के साथ संभावित मुलाकातें द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

इस बीच अमेरिकी वीजा प्रतिबंधों का मुद्दा ईरानी प्रतिनिधिमंडल की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान चर्चा में बना हुआ है। एक तरफ ईरान का शीर्ष नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अपनी बात रखने की तैयारी कर रहा है,वहीं दूसरी ओर प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों को वीजा नहीं मिलने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का एक और पहलू सामने आया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ईरान की भागीदारी ऐसे समय हो रही है,जब दुनिया के कई हिस्सों में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अराघची और पेजेश्कियन की मौजूदगी के जरिए ईरान इन अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों पर अपना रुख रखने के साथ-साथ विभिन्न देशों के साथ कूटनीतिक संवाद आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। महासभा के दौरान होने वाली बैठकों और चर्चाओं से यह भी स्पष्ट होगा कि ईरान आने वाले समय में अपने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और बहुपक्षीय सहयोग को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है।