अमेरिका-ईरान समझौते से तेल बाजार को राहत, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमेरिका-ईरान समझौते से तेल बाजार को राहत,कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट; शेयर बाजारों में लौटी रौनक

नई दिल्ली,15 जून (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव में कमी आने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल देखने को मिला है। सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब पाँच प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई,जबकि दुनिया भर के शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। इस घटनाक्रम को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है,क्योंकि पिछले कई महीनों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को लेकर गंभीर चिंताएँ बनी हुई थीं।

वैश्विक तेल बाजार में सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत शुरुआती कारोबार में लगभग 4.90 प्रतिशत गिरकर 83.05 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड में भी तेज गिरावट दर्ज की गई और इसकी कीमत करीब 5.74 प्रतिशत टूटकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशकों और कारोबारियों को अब ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा पहले की तुलना में काफी कम नजर आ रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में हुई प्रगति ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। पिछले कुछ महीनों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता ने तेल बाजार को लगातार प्रभावित किया था। कई निवेशकों को आशंका थी कि यदि तनाव और बढ़ता है तो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। अब जब दोनों देशों के बीच समझौते का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है, तो बाजारों ने इसे सकारात्मक रूप से लिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार,ब्रेंट क्रूड की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने महँगाई को लेकर बनी चिंताओं को भी काफी हद तक कम कर दिया है। ऊर्जा लागत में कमी का सीधा असर परिवहन,उत्पादन और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में तेल कीमतों में आई यह नरमी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि यह रुझान जारी रहता है,तो आने वाले समय में कई देशों में मुद्रास्फीति पर दबाव कम हो सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब अंतिम रूप ले चुका है। इस घोषणा ने तुरंत वैश्विक बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया,क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए थे।

इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की भी घोषणा की। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल इसी समुद्री मार्ग के जरिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचता है।

ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाने की अनुमति दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब दुनिया भर के जहाज फिर से सामान्य रूप से इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगे और तेल आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहेगी। इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भरोसा पैदा किया और तेल कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिली।

रिपोर्टों के अनुसार,अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए स्विट्जरलैंड में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। हालाँकि,समझौते की सभी शर्तों का अभी सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है,लेकिन बाजारों ने इस पहल को दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा है।

इस सकारात्मक माहौल का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। जापान का निक्केई सूचकांक, हांगकांग का हैंग सेंग,दक्षिण कोरिया का कोस्पी और इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट सूचकांक मजबूती के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। कुछ बाजारों में तो पाँच प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई,जो निवेशकों के बढ़े हुए विश्वास को दर्शाती है।

विश्लेषकों का कहना है कि जब भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता घटती है,तो निवेशक जोखिम लेने के लिए अधिक तैयार होते हैं। यही कारण है कि वैश्विक शेयर बाजारों में खरीदारी बढ़ी और प्रमुख सूचकांक मजबूत हुए। इसके अलावा तेल कीमतों में गिरावट से कई उद्योगों की लागत कम होने की संभावना भी निवेशकों के उत्साह का एक प्रमुख कारण रही।

भारत में भी इस वैश्विक राहत का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। घरेलू शेयर बाजारों ने सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ खुले। निवेशकों ने ऊर्जा कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों में सुधार को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट विशेष रूप से लाभकारी होती है। इससे आयात बिल कम हो सकता है,चालू खाते के घाटे पर दबाव घट सकता है और महँगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि भारतीय बाजारों ने इस खबर का स्वागत किया और निवेशकों के बीच उत्साह देखने को मिला।

फिलहाल वैश्विक बाजारों की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले अगले कदमों पर टिकी हुई हैं। यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात पूरी तरह सामान्य हो जाता है,तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था,ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अभी के लिए तेल कीमतों में आई गिरावट और शेयर बाजारों में लौटी तेजी दुनिया भर के निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर बनकर सामने आई है।