नई दिल्ली,16 अप्रैल (युआईटीवी)- छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार दोपहर हुए बॉयलर ब्लास्ट के बाद अब इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। हादसे के तुरंत बाद जहाँ चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी,वहीं बाद में घायल हुए कई मजदूरों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह घटना औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के अनुसार, इस हादसे में घायल मजदूरों को तुरंत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। रायगढ़ के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान 14 लोगों की मौत हो गई,जबकि रायपुर के कालड़ा अस्पताल में भर्ती दो और घायलों ने दम तोड़ दिया। फिलहाल 16 लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है,जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,प्लांट में अचानक जोरदार धमाका हुआ,जिसके बाद वहाँ अफरा-तफरी मच गई। बॉयलर फटने के कारण आग और धुएँ का गुबार उठने लगा और आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। धमाका इतना तेज था कि कई लोग दूर तक जा गिरे और कई गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के तुरंत बाद प्लांट में काम कर रहे अन्य कर्मचारियों ने बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन,पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुँच गए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भेजा गया और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। प्रशासन ने प्लांट के संचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस गंभीर घटना को देखते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तत्काल जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख जताया है और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये तथा घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से राहत और सहायता के प्रयास लगातार जारी हैं।
वहीं,वेदांता कंपनी प्रबंधन ने भी इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कंपनी ने कहा है कि वह प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी। कंपनी की ओर से मृत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और रोजगार सहयोग देने की घोषणा की गई है,जबकि घायलों को 15 लाख रुपये की मदद दी जाएगी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने दंडाधिकारी जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 196 के तहत यह जाँच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस जाँच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दुर्घटना कब,कैसे और किन परिस्थितियों में हुई।
जाँच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि हादसे के समय प्लांट में कितने मजदूर कार्यरत थे और सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक किया जा रहा था। इसके अलावा, मृतकों और घायलों की पहचान का सत्यापन भी किया जाएगा और हादसे के पीछे के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जाँच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और कड़े सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया,तो इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
सक्ती जिले में हुआ यह हादसा बेहद दुखद और चिंताजनक है। जहाँ एक ओर कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है,वहीं दूसरी ओर कई घायल अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। प्रशासन और सरकार की ओर से राहत कार्य जारी हैं,लेकिन यह घटना औद्योगिक सुरक्षा के प्रति एक गंभीर चेतावनी भी है,जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
