नई दिल्ली,7 जुलाई (युआईटीवी)- फुटबॉल जगत के महान खिलाड़ियों में शामिल क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अपने विश्व कप सफर का अंत होने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 16 में स्पेन के हाथों पुर्तगाल की 1-0 से हार के बाद रोनाल्डो ने साफ शब्दों में कहा कि यह उनके करियर का आखिरी विश्व कप था और अब वह सातवें विश्व कप में हिस्सा नहीं लेंगे। इस घोषणा के साथ विश्व फुटबॉल के एक यादगार अध्याय का समापन हो गया। दो दशकों से अधिक समय तक अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में अपनी छाप छोड़ने वाले रोनाल्डो ने विश्व कप में कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं,लेकिन विश्व विजेता बनने का उनका सबसे बड़ा सपना आखिर तक अधूरा ही रह गया।
स्पेन के खिलाफ हार के बाद रोनाल्डो भावुक जरूर नजर आए,लेकिन उन्होंने अपने करियर को लेकर किसी तरह का अफसोस नहीं जताया। मैच के बाद स्पोर्ट टीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें केवल इस बात का दुख है कि पुर्तगाल का अभियान इस तरह समाप्त हुआ। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया और अब पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें किसी बात का पछतावा नहीं है। उनके अनुसार,एक फुटबॉलर के जीवन में जीत और हार दोनों का सामना करना पड़ता है और हर खिलाड़ी को समय के साथ आगे बढ़ना होता है।
41 वर्षीय रोनाल्डो ने कहा कि यह उनका अंतिम विश्व कप था और अब वह अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह भविष्य को लेकर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेंगे। उनके इस बयान ने उन अटकलों पर भी विराम लगा दिया,जिनमें कहा जा रहा था कि वह फिटनेस के दम पर एक और विश्व कप खेलने का प्रयास कर सकते हैं। रोनाल्डो ने स्पष्ट कर दिया कि विश्व कप का उनका अध्याय अब समाप्त हो चुका है।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप करियर उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने कुल छह विश्व कप खेले और 27 मुकाबलों में पुर्तगाल का प्रतिनिधित्व किया। इस मामले में उनसे आगे केवल अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हैं,जिन्होंने विश्व कप में 30 मुकाबले खेले हैं। रोनाल्डो ने अपने विश्व कप करियर में 11 गोल किए और कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए,जिन्हें लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक यह रही कि वह विश्व कप के छह अलग-अलग संस्करणों में गोल करने वाले दुनिया के पहले पुरुष खिलाड़ी बने। यह रिकॉर्ड उनके लंबे करियर,फिटनेस और लगातार शानदार प्रदर्शन का प्रमाण माना जाता है। उन्होंने हर विश्व कप में अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया और लगातार यह साबित किया कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में क्यों गिने जाते हैं।
इस विश्व कप में भी रोनाल्डो ने तीन गोल किए। इनमें उज्बेकिस्तान के खिलाफ पुर्तगाल की 5-0 की शानदार जीत में उनके दो गोल शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने विश्व कप के नॉकआउट चरण में भी पहली बार गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। क्रोएशिया के खिलाफ पेनल्टी पर किया गया उनका गोल पुर्तगाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, जिसने टीम को अंतिम-16 तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। हालाँकि,नॉकआउट चरण में स्पेन के खिलाफ टीम आगे नहीं बढ़ सकी और यहीं उनके विश्व कप सफर का अंत हो गया।
रोनाल्डो का विश्व कप करियर वर्ष 2006 में जर्मनी में आयोजित टूर्नामेंट से शुरू हुआ था। उस समय वह युवा खिलाड़ी के रूप में पुर्तगाल की उम्मीदों का केंद्र थे। उन्होंने ईरान के खिलाफ अपना पहला विश्व कप गोल किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए पुर्तगाल को 40 वर्षों बाद सेमीफाइनल तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आज भी उनके विश्व कप करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है।
इसके बाद उन्होंने 2010 में दक्षिण अफ्रीका,2014 में ब्राजील, 2018 में रूस, 2022 में कतर और मौजूदा विश्व कप में भी हिस्सा लिया। हर टूर्नामेंट में उन्होंने कम से कम एक गोल करके अपनी निरंतरता का परिचय दिया। बदलती पीढ़ियों और नए खिलाड़ियों के आने के बावजूद रोनाल्डो लगातार पुर्तगाल की टीम के प्रमुख खिलाड़ी बने रहे। उनकी फिटनेस,अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें दो दशकों तक शीर्ष स्तर पर बनाए रखा।
हालाँकि,विश्व कप ट्रॉफी उनके हाथ कभी नहीं लग सकी। कई बार पुर्तगाल को मजबूत टीम माना गया,लेकिन हर बार किसी न किसी चरण में टीम का सफर समाप्त हो गया। इसके बावजूद रोनाल्डो ने अपने देश के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं, जिन पर उन्हें गर्व है।
उन्होंने मैच के बाद कहा कि वह अगले दिन सुबह बिना किसी पछतावे के उठेंगे,क्योंकि उन्होंने हमेशा अपने देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनके आने से पहले पुर्तगाल ने कभी कोई बड़ा अंतर्राष्ट्रीय खिताब नहीं जीता था,जबकि उनके नेतृत्व में टीम ने तीन महत्वपूर्ण ट्रॉफियाँ अपने नाम कीं। इनमें 2016 की यूरोपीय चैम्पियनशिप और दो यूईएफए नेशंस लीग खिताब शामिल हैं। रोनाल्डो का मानना है कि यही उपलब्धियाँ उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान रहेंगी।
2016 की यूरोपीय चैम्पियनशिप पुर्तगाल के फुटबॉल इतिहास का सबसे यादगार पल मानी जाती है। उस टूर्नामेंट में रोनाल्डो ने अपनी टीम को प्रेरित करते हुए खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद पुर्तगाल ने दो बार यूईएफए नेशंस लीग जीतकर भी यूरोपीय फुटबॉल में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इन सफलताओं में रोनाल्डो का योगदान निर्णायक रहा।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व कप ट्रॉफी भले ही रोनाल्डो के करियर में शामिल नहीं हो सकी,लेकिन इससे उनकी महानता कम नहीं होती। उन्होंने क्लब और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनगिनत रिकॉर्ड बनाए,कई बड़े खिताब जीते और दुनिया भर के करोड़ों प्रशंसकों को अपने खेल से प्रेरित किया। उनका नाम हमेशा उन खिलाड़ियों में लिया जाएगा,जिन्होंने अपने प्रदर्शन,मेहनत और अनुशासन से फुटबॉल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
स्पेन के खिलाफ हार के साथ विश्व कप का उनका सफर भले समाप्त हो गया हो,लेकिन क्रिस्टियानो रोनाल्डो की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। छह विश्व कप में गोल करने का उनका रिकॉर्ड,लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहने की क्षमता और पुर्तगाल को पहली बार बड़े अंतर्राष्ट्रीय खिताब दिलाने का योगदान उन्हें फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में हमेशा शामिल रखेगा। विश्व कप ट्रॉफी जीतने का सपना अधूरा जरूर रह गया,लेकिन उनके शानदार करियर की चमक इस एक कमी से कभी फीकी नहीं पड़ेगी।
