नई दिल्ली,4 अक्टूबर (युआईटीवी)- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पाँच भाषाओं- मराठी,पाली,प्राकृत,असमिया व बंगाली भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। बीते दिन एक मीडिया ब्रीफिंग में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा की। आपको बता दें कि,यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए इसकी शुभकामनाएँ दी। इन पाँच भाषाओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।
कैबिनेट ब्रीफिंग में इसकी जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार का एक ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि हमारी विरासत पर गर्व करने,हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाने,सभी भारतीय भाषाओं व हमारी समृद्ध विरासत पर गर्व करने के दर्शन के साथ पूरी तरह से मेल खाता है।
बता दें कि भारत की गहन और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की संरक्षण का काम शास्त्रीय भाषाओं के माध्यम से किया जाता है। प्रत्येक समुदाय के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के लिए ये भाषाएँ मील के पत्थर का सार है।
Marathi is India’s pride.
Congratulations on this phenomenal language being accorded the status of a Classical Language. This honour acknowledges the rich cultural contribution of Marathi in our nation’s history. Marathi has always been a cornerstone of Indian heritage.
I am…
— Narendra Modi (@narendramodi) October 3, 2024
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा,हमारी सरकार भारत के समृद्ध इतिहास एवं संस्कृति को संजोती है और उसका जश्न मनाती है। हम क्षेत्रीय भाषाओं को लोकप्रिय बनाने की अपनी प्रतिबद्धता में भी अडिग रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि कैबिनेट के असमिया,बंगाली,मराठी,पाली और प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के निर्णय से मैं बहुत खुश हूँ। ये सभी भाषाएँ हमारी जीवंत विविधता को उजागर करने वाली खूबसूरत भाषाएँ हैं। सभी को बधाई।
इस संबंध में सबसे पहले 12 अक्टूबर, 2004 में भारत सरकार ने फैसला लिया था और भाषाओं की एक नई श्रेणी शास्त्रीय भाषाओं के रूप में बनाई गई। तमिल भाषा को इसके तहत शास्त्रीय भाषा के दर्जा देने की घोषणा की गई। उसके बाद शास्त्रीय भाषा का दर्जा संस्कृत,कन्नड़,मलयालम,तेलुगु और ओडिया भाषाओं को दिया गया,जिससे देश में 6 शास्त्रीय भाषाएँ हो गए। अब जब मराठी, बंगाली,पाली, प्राकृत व असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की घोषणा की गई,तो इनकी संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
सरकारी बयान के अनुसार,मंत्रालय को महाराष्ट्र सरकार ने 2013 में मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का एक अनुरोध प्रस्ताव भेजा था। उस प्रस्ताव को भाषाविज्ञान विशेषज्ञ समिति (एलईसी) को भेजा गया। भाषाविज्ञान विशेषज्ञ समिति ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की सिफारिश की। महाराष्ट्र में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और राज्य के लिए मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा की मान्यता देना एक बड़ा चुनावी मुद्दा था।
इसी प्रकार से प्राकृत,असमिया,पाली व बंगाली को भी शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के भी प्रस्ताव प्राप्त हुए। 25 जुलाई, 2024 को इस संबंध में भाषा विज्ञान विशेषज्ञ समिति (साहित्य अकादमी के अधीन) की एक बैठक हुई,जहाँ सर्वसम्मति से फैसला लिया गया। भाषा विज्ञान विशेषज्ञ समिति के लिए साहित्य अकादमी को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है।
Most happy to share that Bengali/ Bangla has been finally accorded the status of a classical language by Government of India.
We had been trying to snatch this recognition from Ministry of Culture, GOI and we had submitted three volumes of research findings in favour of our…
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) October 3, 2024
केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा बंगाली/बांग्ला को शास्त्रीय भाषा (क्लासिकल लैंग्वेज) का दर्जा दिए जाने पर मुझे बहुत खुशी हो रही है। आगे उन्होंने कहा कि बंगाली भाषा को शास्त्रीय भाषा का मान्यता देने के लिए हम संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार से लगातार बात कर रहे थे और हमने शोध निष्कर्षों के तीन खंड को अपने दावे के पक्ष में प्रस्तुत किए थे। हमारे शोधपूर्ण दावे को आज शाम को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है और आखिरकार हम भारत में भाषाओं के समूह में सांस्कृतिक शिखर पर पहुँच गए हैं।
केंद्र के इस निर्णय का मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी स्वागत किया है और सभी मराठी वासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिल गया है। हमारी एक लड़ाई सफल रही। महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए लगातार केंद्र का सहयोग किया था। हम प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी,साथ ही केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत को अपनी प्रिय भाषा को उचित सम्मान देने के लिए धन्यवाद देते हैं।
