अमेरिका, भारत

फेंटेनाइल तस्करी पर अमेरिका का बड़ा एक्शन,भारतीय कारोबारी नेटवर्क से जुड़े 13 लोगों पर वीजा प्रतिबंध

न्यूयॉर्क,13 मई (युआईटीवी)- अमेरिका ने अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए एक भारतीय कारोबारी नेटवर्क से जुड़े 13 लोगों पर वीजा प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि यह कदम फेंटेनाइल जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है। अमेरिका ने इस कार्रवाई को भारत और अमेरिका के बीच नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने मंगलवार को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाया गया है, वे “केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स” और उसके मालिक के करीबी कारोबारी सहयोगी हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह कंपनी अवैध फेंटेनाइल तस्करी से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थी और इसी वजह से पहले भी उस पर कार्रवाई की जा चुकी है।

टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि ऐसे अवैध ड्रग नेटवर्क को खत्म किया जाए,जो समाज और लोगों की जिंदगी को नुकसान पहुँचाते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई दोनों देशों की उस साझा और स्थायी रणनीति को दर्शाती है,जिसके तहत ड्रग तस्करी और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर सख्त प्रहार किया जा रहा है।

हालाँकि,अमेरिकी विदेश विभाग ने उन 13 लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं,लेकिन यह साफ किया गया है कि वे सभी उस कारोबारी नेटवर्क से जुड़े थे जिस पर पहले भी अमेरिकी एजेंसियों ने प्रतिबंध लगाए थे। पिगॉट ने बताया कि यह प्रतिबंध अमेरिकी इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के तहत लगाया गया है। इस कानून के तहत ऐसे लोगों को अमेरिका में प्रवेश से रोका जा सकता है,जो अवैध ड्रग तस्करी या उससे जुड़े अपराधों में शामिल पाए जाते हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक फेंटेनाइल इस समय अमेरिका के लिए सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है। यह एक अत्यधिक शक्तिशाली सिंथेटिक ओपिओइड ड्रग है,जिसकी थोड़ी मात्रा भी जानलेवा साबित हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में फेंटेनाइल ओवरडोज से होने वाली मौतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेंटेनाइल को “जनसंहारक हथियार” तक करार दिया था।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सितंबर महीने में “केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स”, उसके मालिक खिजर मोहम्मद इकबाल शेख और सादिक अब्बास हबीब सैयद पर प्रतिबंध लगाए थे। दोनों भारतीय नागरिक बताए गए थे। इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिका में मौजूद उनकी सभी संपत्तियाँ फ्रीज कर दी गई थीं और अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के साथ किसी भी प्रकार के लेन-देन पर रोक लगा दी गई थी।

ट्रेजरी विभाग का आरोप था कि यह नेटवर्क सैकड़ों हजारों नकली प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों की तस्करी में शामिल था। इन दवाइयों में फेंटेनाइल और अन्य खतरनाक नशीले पदार्थ शामिल थे। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार इन दवाइयों को अमेरिका में अवैध रूप से बेचा जा रहा था,जिससे लोगों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि फेंटेनाइल संकट ने अमेरिका में स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यह ड्रग सामान्य दर्द निवारक दवाओं की तुलना में कई गुना अधिक शक्तिशाली मानी जाती है। कई बार इसे नकली दवाइयों में मिलाकर बेचा जाता है,जिससे उपयोगकर्ताओं को इसकी वास्तविक मात्रा का पता नहीं चलता और ओवरडोज का खतरा बढ़ जाता है।

अमेरिकी प्रशासन पिछले कुछ वर्षों से फेंटेनाइल तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सख्त अभियान चला रहा है। अमेरिका का आरोप रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क विभिन्न देशों के जरिए इस ड्रग की सप्लाई करते हैं और ऑनलाइन माध्यमों का भी इस्तेमाल करते हैं। इसी वजह से अमेरिका लगातार सहयोगी देशों के साथ मिलकर ऐसे नेटवर्क की पहचान और उन पर कार्रवाई कर रहा है।

भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा तथा कानून प्रवर्तन से जुड़े सहयोग में भी हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है। दोनों देश साइबर अपराध,आतंकवाद,वित्तीय अपराध और ड्रग तस्करी जैसे मुद्दों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह ताजा कार्रवाई उसी सहयोग का हिस्सा है।

राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब ड्रग तस्करी के खिलाफ सिर्फ घरेलू स्तर पर नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी आक्रामक रणनीति अपना रहा है। अमेरिका यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि फेंटेनाइल और अन्य खतरनाक ड्रग्स की सप्लाई चेन में शामिल किसी भी व्यक्ति या नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा।

इस पूरे मामले ने भारत में भी ध्यान आकर्षित किया है,क्योंकि जिन लोगों और कंपनी पर कार्रवाई हुई है उनका संबंध भारतीय कारोबारी नेटवर्क से बताया गया है। हालाँकि,भारतीय एजेंसियों की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है,लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी एजेंसियों के आरोपों में पर्याप्त सबूत पाए जाते हैं,तो भारत में भी जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हो सकती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी अब सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है,बल्कि इसे वैश्विक स्वास्थ्य और सुरक्षा संकट के रूप में देखा जा रहा है। फेंटेनाइल जैसी सिंथेटिक ड्रग्स ने कई देशों में गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा की हैं। ऐसे में अमेरिका सहित कई देश इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि आगे भी ऐसे लोगों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी,जो अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल पाए जाएँगे। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से अंतर्राष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर दबाव जरूर बढ़ेगा,लेकिन इसे पूरी तरह रोकने के लिए देशों के बीच और अधिक सहयोग तथा सख्त निगरानी की जरूरत होगी।