प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@DrJitendraSingh)

सांगली के मंदिर में दर्दनाक हादसा,तेज आंधी-बारिश में दीवार और टिन शेड गिरने से छह श्रद्धालुओं की मौत

नई दिल्ली,13 मई (युआईटीवी)- महाराष्ट्र के सांगली जिले में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज हवाओं और भारी बारिश के बीच प्रसिद्ध मार्गूदेवी मंदिर परिसर में अचानक दीवार और टिन की छतें गिर गईं,जिससे वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई,जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद मंदिर परिसर में चीख-पुकार और भगदड़ का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों,पुलिस और प्रशासन की टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला।

यह हादसा सांगली जिले की जत तहसील के मोथेवाड़ी गाँव में स्थित प्रसिद्ध मार्गूदेवी मंदिर में हुआ। मंगलवार होने की वजह से मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। दूर-दूर से लोग देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुँचे थे। शाम के समय अचानक मौसम ने करवट ली और इलाके में तेज तूफान के साथ भारी बारिश शुरू हो गई। मौसम बिगड़ते ही श्रद्धालुओं ने खुद को बारिश और आंधी से बचाने के लिए मंदिर परिसर की दीवारों और टिन शेड के नीचे शरण ले ली।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेज हवाओं का दबाव इतना अधिक था कि मंदिर परिसर की कमजोर दीवार और टिन की छत अचानक भरभराकर गिर गई। किसी को सँभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते कई श्रद्धालु मलबे और लोहे की टिन चादरों के नीचे दब गए। हादसे के तुरंत बाद मंदिर परिसर में चीख-पुकार मच गई और लोग अपनों को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी ने बताया कि हादसे के समय मंदिर परिसर में लगभग 350 श्रद्धालु मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मंगलवार को देवी मंदिर में विशेष पूजा के कारण सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ थी। अचानक आए तूफान और भारी बारिश की वजह से श्रद्धालु सुरक्षित जगह की तलाश में मंदिर परिसर की दीवार और टिन शेड के पास जमा हो गए थे। इसी दौरान संरचना कमजोर पड़ गई और हादसा हो गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मलबे और टिन की चादरों के नीचे दबने से छह श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं,जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है और कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन,पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर पहुँच गए। स्थानीय ग्रामीणों ने भी राहत कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोगों ने अपने हाथों से मलबा हटाकर कई श्रद्धालुओं को बाहर निकाला। बाद में जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से राहत अभियान को तेज किया गया। पुलिस और प्रशासन ने मंदिर परिसर को घेर लिया और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की।

इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के सांगली में दीवार गिरने से हुई जनहानि की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री के इस संदेश के बाद कई अन्य राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी हादसे पर दुख जताया।

महाराष्ट्र सरकार ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। अधिकारियों को यह जाँच करने के निर्देश दिए गए हैं कि मंदिर परिसर की दीवार और टिन शेड की स्थिति पहले से कितनी कमजोर थी और क्या समय रहते इसकी मरम्मत या सुरक्षा उपाय किए गए थे। प्रशासन यह भी जाँच कर रहा है कि हादसे के पीछे केवल खराब मौसम जिम्मेदार था या निर्माण संबंधी लापरवाही भी इसमें शामिल है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में लगी कुछ संरचनाएँ काफी पुरानी थीं और लंबे समय से उनकी मरम्मत नहीं हुई थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बावजूद सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे। उनका कहना है कि यदि समय रहते संरचनाओं की मजबूती की जाँच कराई जाती,तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।

मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार शाम सांगली और आसपास के इलाकों में अचानक तेज हवाओं के साथ भारी बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर पेड़ उखड़ने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की भी खबरें सामने आईं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अचानक आने वाले तूफानों के दौरान कमजोर संरचनाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।

हादसे के बाद पूरे मोथेवाड़ी गाँव में शोक का माहौल है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है,उनका रो-रोकर बुरा हाल है। मंदिर परिसर में हर तरफ मलबा और टूटे हुए टिन के टुकड़े बिखरे दिखाई दिए। श्रद्धालुओं के चप्पल-जूते और पूजा सामग्री भी घटनास्थल पर बिखरी पड़ी रही,जो इस दर्दनाक हादसे की भयावहता को बयान कर रही थी।

सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और घायलों के बेहतर इलाज की माँग की है। साथ ही धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की भी माँग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी भीड़ को देखते हुए मजबूत ढाँचे और आपातकालीन सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य किए जाने चाहिए।

यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि खराब मौसम और कमजोर संरचनाओं का मेल कितना खतरनाक साबित हो सकता है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती न सिर्फ घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करना है,बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना भी है।