मॉस्को,13 मई (युआईटीवी)- रूस ने अपनी अत्याधुनिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ‘सरमत’ के सफल परीक्षण का दावा करते हुए इसे देश की रणनीतिक सैन्य शक्ति के लिए बड़ा कदम बताया है। रूस के स्ट्रेटेजिक मिसाइल फोर्सेज के कमांडर सर्गेई कराकायेव ने कहा कि ‘सरमत’ मिसाइल सिस्टम का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और इसके सभी तकनीकी मानक तय लक्ष्यों के अनुरूप पाए गए। इस परीक्षण के बाद रूस ने साफ संकेत दिया है कि वह अपनी परमाणु क्षमता और रणनीतिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी टास के अनुसार,कराकायेव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दी गई अपनी रिपोर्ट में बताया कि ‘सरमत’ मिसाइल सिस्टम के परीक्षण परिणाम बेहद संतोषजनक रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के विकास के दौरान जो तकनीकी और रणनीतिक फैसले लिए गए थे,वे पूरी तरह सही साबित हुए हैं। उनके मुताबिक यह प्रणाली रूस की ग्राउंड-बेस्ड स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर फोर्सेज की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी और किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस सफल परीक्षण पर रूसी सेना और वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने ‘सरमत’ को दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार सिस्टम बताते हुए कहा कि यह सोवियत दौर की प्रसिद्ध ‘वोएवोडा’ मिसाइल प्रणाली के समान ताकत रखती है। पुतिन ने दावा किया कि यह मिसाइल किसी भी मौजूदा पश्चिमी हथियार प्रणाली से चार गुना अधिक शक्तिशाली है। उन्होंने कहा कि ‘सरमत’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी,अत्यधिक सटीकता और आधुनिक एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता है।
पुतिन ने बताया कि यह मिसाइल पारंपरिक बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के अलावा सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर भी उड़ान भर सकती है। इसका मतलब यह है कि मिसाइल अलग-अलग मार्गों से लक्ष्य तक पहुँच सकती है,जिससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। रूस के मुताबिक इस मिसाइल की रेंज 35 हजार किलोमीटर से अधिक है,जो इसे दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों में शामिल करती है।
रूसी अधिकारियों का कहना है कि ‘सरमत’ न केवल भारी परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम है,बल्कि इसमें कई स्वतंत्र रूप से लक्ष्य भेदने वाले वॉरहेड भी लगाए जा सकते हैं। इससे एक ही मिसाइल अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक रूस की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाएगी।
कमांडर सर्गेई कराकायेव ने बताया कि परीक्षण के दौरान मिसाइल की उड़ान क्षमता,मारक शक्ति,लॉन्चिंग तैयारी और सुरक्षा मानकों की भी सफलतापूर्वक जाँच की गई। उन्होंने कहा कि मिसाइल ने परीक्षण के दौरान सभी अपेक्षित मानकों को पूरा किया और इससे यह साबित हो गया कि यह प्रणाली वास्तविक परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है।
‘सरमत’ मिसाइल सिस्टम की पहली सफल लॉन्चिंग 20 अप्रैल 2022 को रूस के आर्कान्जेस्क क्षेत्र में स्थित प्लेसेट्सक कॉस्मोड्रोम से की गई थी। उस समय भी रूस ने इसे अपनी सैन्य शक्ति में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया था। अब ताजा परीक्षण के बाद पुतिन ने संकेत दिया है कि इस साल के अंत तक इस मिसाइल प्रणाली को पूरी तरह तैनात कर दिया जाएगा।
आरएस-28 ‘सरमत’ एक उन्नत ग्राउंड-बेस्ड साइलो-बेस्ड इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है। यह भारी लिक्विड-प्रोपेलेंट इंजन से संचालित होती है और लंबी दूरी तक परमाणु हथियार पहुँचाने में सक्षम है। रूस ने इसे विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए विकसित किया है,जहाँ दुश्मन के आधुनिक मिसाइल रक्षा सिस्टम को पार करना जरूरी हो।
रिपोर्टों के अनुसार,इस परियोजना पर 2000 के दशक की शुरुआत से काम चल रहा था। रूस ने इसे अपने पुराने सोवियत युग के मिसाइल सिस्टम की जगह लेने के लिए विकसित किया। पुतिन ने कहा कि 2002 में जब अमेरिका ने एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि से बाहर निकलने का फैसला किया,तब रूस को अपनी रणनीतिक सुरक्षा और शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए नए हथियार सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता महसूस हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सरमत’ मिसाइल का सफल परीक्षण ऐसे समय में हुआ है,जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। यूक्रेन युद्ध,नाटो के विस्तार और यूरोप में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण वैश्विक सुरक्षा माहौल पहले से अधिक संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में रूस अपने रणनीतिक हथियार कार्यक्रम को तेज कर रहा है,ताकि वह दुनिया को अपनी सैन्य क्षमता का संदेश दे सके।
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ‘सरमत’ जैसे हथियारों की तैनाती वैश्विक हथियारों की होड़ को और तेज कर सकती है। अमेरिका और रूस पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों में शामिल हैं और दोनों देशों के बीच लंबे समय से सामरिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश होती रही है। हालाँकि,पिछले कुछ वर्षों में हथियार नियंत्रण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण संधियां कमजोर पड़ी हैं,जिससे वैश्विक चिंता बढ़ी है।
रूस का दावा है कि ‘सरमत’ मिसाइल किसी भी मौजूदा और भविष्य की एंटी-मिसाइल डिफेंस प्रणाली को भेदने में सक्षम है। यदि यह दावा पूरी तरह सही साबित होता है,तो यह वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर बड़ा असर डाल सकता है। यही कारण है कि इस परीक्षण पर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और पश्चिमी देशों की करीबी नजर बनी हुई है।
रूस लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसकी सैन्य शक्ति अब भी दुनिया की सबसे मजबूत ताकतों में शामिल है। पुतिन सरकार के लिए ‘सरमत’ मिसाइल सिर्फ एक हथियार प्रणाली नहीं,बल्कि रणनीतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का प्रतीक भी बन चुकी है। आने वाले समय में इसकी तैनाती और इससे जुड़ी नई घोषणाएँ अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।
