यशवंतराव चव्हाण की विरासत की नई वाहक बनीं सुनेत्रा पवार (तस्वीर क्रेडिट@MahaDGIPR)

यशवंतराव चव्हाण की विरासत की नई वाहक बनीं सुनेत्रा पवार,सतारा-फलटन दौरे से दिया राजनीतिक और भावनात्मक संदेश

मुंबई,2 फरवरी (युआईटीवी)- महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत उस वक्त देखने को मिली,जब दिवंगत यशवंतराव चव्हाण की राजनीतिक और वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उपमुख्यमंत्री बनीं सुनेत्रा पवार ने सँभाल ली। यह विरासत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के राजनीतिक जीवन का भी अहम हिस्सा रही है। सोमवार को सुनेत्रा पवार ने सतारा और फलटन का दौरा कर न सिर्फ इस परंपरा को आगे बढ़ाया,बल्कि यह भी संकेत दिया कि वह अजीत पवार की वैचारिक राह और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को पूरी गंभीरता के साथ आगे ले जाने के लिए तैयार हैं।

अपने दौरे की शुरुआत सुनेत्रा पवार ने कराड स्थित प्रीतिसंगम से की,जहाँ उन्होंने महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह वही स्थल है,जिसका अजीत पवार के राजनीतिक जीवन में विशेष महत्व रहा है। अपने पूरे करियर के दौरान अजीत पवार अक्सर यहाँ आते रहे और सार्वजनिक मंचों से यह कहते रहे कि उनकी राजनीति और सामाजिक सोच यशवंतराव चव्हाण के सिद्धांतों से प्रेरित है। सत्ता में हों या विपक्ष में,जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ों पर वह इस स्मारक पर पहुँचकर आत्ममंथन करते थे। उनके निधन के बाद अब सुनेत्रा पवार ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस विरासत को नया स्वरूप दिया है।

सुनेत्रा पवार का यह दौरा केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसमें गहरे राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी निहित थे। प्रीतिसंगम में पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद वह फलटन तहसील के लोनांद पहुँचीं,जहाँ उन्होंने दिवंगत विदिप जाधव के परिवार से मुलाकात की। विदिप जाधव एक सुरक्षा गार्ड थे,जो बारामती में हुए घातक विमान हादसे के दौरान अजीत पवार के साथ उसी विमान में सवार थे। इस दुर्घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया था।

सुनेत्रा पवार ने जाधव परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और उनके दुख में सहभागी बनीं। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है,जब शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार पहले ही लोनांद जाकर यह घोषणा कर चुके हैं कि वह विदिप जाधव के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेंगे। ऐसे में सुनेत्रा पवार की यह पहल सिर्फ एक मानवीय कदम नहीं,बल्कि यह भी दिखाती है कि पवार परिवार इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के साथ खड़ा है,चाहे राजनीतिक खेमे अलग क्यों न हों।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक,उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार का यशवंतराव चव्हाण के स्मारक का दौरा केवल भावनात्मक श्रद्धांजलि नहीं था। यह एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी था कि भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में सत्ताधारी भागीदार होने के बावजूद उनकी पार्टी की वैचारिक जड़ें अब भी छत्रपति शिवाजी महाराज,छत्रपति शाहू महाराज,महात्मा फुले और डॉ. बीआर आंबेडकर की धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय की विचारधारा से जुड़ी हुई हैं। यह दौरा उन अटकलों के बीच हुआ है,जिनमें कहा जा रहा था कि सत्ता समीकरणों के कारण पार्टी की वैचारिक दिशा में बदलाव आ सकता है।

शनिवार को शपथ ग्रहण के बाद दिए गए अपने पहले भावुक बयान में सुनेत्रा पवार ने अजीत पवार के विचारों और जीवन मूल्यों को खुलकर सामने रखा। उन्होंने कहा कि आदरणीय अजीतदादा ने किसानों,मजदूरों,महिलाओं,युवाओं और वंचित वर्गों के लिए पूरी जिंदगी जीने का मंत्र दिया। उनके अनुसार, ‘शिव-शाहू-फुले-अंबेडकर’ के सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा के साथ उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी स्वीकार करना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ भावनात्मक क्षण भी है।

अपने बयान में सुनेत्रा पवार ने अजीत पवार के असमय निधन के दर्द को भी खुलकर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दादा के जाने से उनके दिल पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है,लेकिन कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता,संघर्ष करने की ताकत और आम लोगों के साथ उनका गहरा रिश्ता ही आज उनका सबसे बड़ा सहारा है। उन्होंने यह भी कहा कि अजीत पवार ने उन्हें सिखाया कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं,बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास पहुँचाने का साधन है।

सुनेत्रा पवार ने भरोसा दिलाया कि वह अजीत पवार के सपनों के न्यायपूर्ण,समानता-आधारित और विकसित महाराष्ट्र को साकार करने के लिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में महाराष्ट्र के लोगों का प्यार और समर्थन ही उनकी असली ताकत है और उसी भरोसे के सहारे वह आगे बढ़ेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार का यह दौरा और उनका सार्वजनिक बयान यह संकेत देता है कि वह केवल संवैधानिक पद की जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं रहेंगी,बल्कि अजीत पवार और यशवंतराव चव्हाण की वैचारिक विरासत को राजनीतिक व्यवहार में भी उतारने की कोशिश करेंगी। सतारा और फलटन का यह दौरा एक तरह से उनके राजनीतिक सफर की दिशा तय करता हुआ नजर आया है।

यशवंतराव चव्हाण की समाधि पर श्रद्धांजलि से लेकर विदिप जाधव के परिवार से मुलाकात और भावुक सार्वजनिक बयान तक, सुनेत्रा पवार का यह पूरा दौरा महाराष्ट्र की राजनीति में निरंतरता,संवेदना और वैचारिक प्रतिबद्धता का संदेश लेकर आया है। यह साफ संकेत है कि अजीत पवार की अनुपस्थिति में भी उनकी सोच,उनके आदर्श और उनकी राजनीतिक विरासत जीवित रहेगी और अब उसकी जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार के कंधों पर है।