अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

ईरान पर अमेरिका-इजरायल का दबाव तेज,डोनाल्ड ट्रंप का दावा—“ईरान लगभग खत्म होने की कगार पर”

वाशिंगटन,12 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। इस संघर्ष में इजरायल की भूमिका और अमेरिका की सैन्य रणनीति ने पूरे क्षेत्र की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमता गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी है और वह लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुँच गया है।

मैरीलैंड में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई का ईरान पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास ऐसी ताकत है कि वह एक घंटे के भीतर तेहरान की बिजली आपूर्ति और ऊर्जा क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका फिलहाल ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता क्योंकि इससे ईरान की आम जनता को भारी नुकसान हो सकता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा हालात पर उनकी कड़ी नजर बनी हुई है और अमेरिकी सेना हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध के मोर्चे पर अमेरिका को लगातार सकारात्मक खबरें मिल रही हैं और ईरान की सैन्य क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना,वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम अब पहले की तरह प्रभावी नहीं रह गए हैं। उनके अनुसार अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं ईरान के ऊपर लगभग स्वतंत्र रूप से ऑपरेशन कर रही हैं।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के पास अब अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पर्याप्त नियंत्रण प्रणाली या समन्वित सैन्य ढाँचा नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं ने पिछले कुछ दिनों में ईरान की कई रणनीतिक सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया है,जिससे उसकी रक्षा क्षमता को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक कई ऐसे सैन्य ठिकाने और फैक्ट्रियाँ नष्ट कर दी गई हैं,जहाँ रडार सिस्टम और एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार तैयार किए जाते थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो तेहरान सहित कई बड़े शहरों की बिजली व्यवस्था पर हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ईरान के लिए अपने बुनियादी ढाँचे को फिर से खड़ा करना लगभग असंभव हो जाएगा और उसे दोबारा पूरी तरह विकसित होने में 20 से 25 साल तक का समय लग सकता है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका फिलहाल इस तरह का हमला करने के पक्ष में नहीं है क्योंकि इसका मानवीय प्रभाव बहुत गंभीर हो सकता है।

अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे सैन्य अभियान को लेकर भी राष्ट्रपति ट्रंप ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम से अभियान चला रही है,जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्र में आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना है। ट्रंप ने दावा किया कि यह ऑपरेशन अब तक काफी सफल रहा है और इसके जरिए ईरान की कई सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 दिनों के भीतर अमेरिकी सेनाओं ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में उन फैक्ट्रियों को भी तबाह किया गया है,जहाँ रडार सिस्टम और एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरण बनाए जाते थे। ट्रंप के अनुसार इस तरह की कार्रवाई ने ईरान की रक्षा प्रणाली को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है।

हालाँकि,इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ता दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व के कई देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और इन ठिकानों पर हमलों की आशंका भी लगातार बनी हुई है। इसी बीच इराक में सक्रिय एक सशस्त्र समूह सराया अवलिया अल-दाम ने दावा किया है कि उसने पूरे इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सात हमले किए हैं।

इस समूह का कहना है कि ये हमले ईरान के समर्थन में किए गए हैं और अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियाँ बंद करनी चाहिए। हालाँकि,इन हमलों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। अमेरिकी सेना या इराकी सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमले की यह जानकारी सही साबित होती है,तो इससे पूरे क्षेत्र में संघर्ष और अधिक फैल सकता है। पहले से ही ईरान,अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने पश्चिम एशिया की स्थिति को बेहद अस्थिर बना दिया है।

दूसरी ओर ईरान की ओर से भी इस संघर्ष को लेकर लगातार तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि वह किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है और अमेरिका या उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई से डरने वाला नहीं है। ईरान का दावा है कि उसकी रक्षा प्रणाली अभी भी मजबूत है और वह अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

वैश्विक स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कई अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबे समय तक जारी रहता है,तो इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति,अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। खास तौर पर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

इसी कारण कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है,लेकिन फिलहाल जिस तरह के बयान और सैन्य गतिविधियाँ सामने आ रही हैं,उससे यह संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों की भूमिका भी जुड़ती जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस संकट को शांत किया जा सकता है या फिर यह टकराव और बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।