डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

एच-1बी और रोजगार वीजा में कथित धोखाधड़ी पर ट्रंप प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, व्यापक जाँच शुरू; दर्जनों समन जारी

वॉशिंगटन,9 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका में रोजगार आधारित वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और विदेशी श्रमिकों से जुड़े संभावित धोखाधड़ी के मामलों पर ट्रंप प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल ने घोषणा की है कि एच-1बी और ‘पर्म’ रोजगार वीजा कार्यक्रमों से जुड़े मामलों की व्यापक जाँच शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार,इस जाँच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं विदेशी श्रमिकों की भर्ती प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल तो नहीं किया गया,श्रमिकों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क तो सक्रिय नहीं हैं और क्या रोजगार वीजा योजनाओं का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया गया है।

श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने इस कार्रवाई को विदेशी श्रम कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त और व्यापक जांच बताया। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसियों ने पहले ही दर्जनों समन जारी कर दिए हैं और कई मामलों में दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की जाँच शुरू हो चुकी है। उनके अनुसार यह अभियान केवल औपचारिक जाँच तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि हर उस सूचना की गहन पड़ताल की जाएगी जिससे किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि का संकेत मिलता हो।

फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान एंथनी डी’एस्पोसिटो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन विदेशी श्रम कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी के खिलाफ अब तक की सबसे आक्रामक कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार आधारित वीजा योजनाओं का उपयोग केवल वैध और पारदर्शी तरीके से हो तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या नियमों के दुरुपयोग को बर्दाश्त न किया जाए।

उन्होंने बताया कि इस अभियान में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में गठित फ्रॉड टास्क फोर्स भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। उनके अनुसार जाँच एजेंसियाँ हर सुराग पर काम कर रही हैं और किसी भी सूचना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में प्राथमिक स्तर पर भी संदेह दिखाई देता है,तो उसकी पूरी जाँच की जाएगी ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

एंथनी डी’एस्पोसिटो ने यह भी बताया कि जाँच एजेंसियों को कुछ व्हिसलब्लोअर्स से महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं। उनके अनुसार इन सूचनाओं में कुछ बड़ी कंपनियों का भी उल्लेख किया गया है,जिनमें कॉग्निजेंट जैसी प्रमुख कंपनी का नाम भी सामने आया है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष कंपनी के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं की,लेकिन यह संकेत दिया कि जाँच के दौरान सभी उपलब्ध सूचनाओं और दस्तावेजों की निष्पक्ष तरीके से समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी,उनकी टीम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की फ्रॉड टास्क फोर्स के साथ मिलकर काम करेगी। उनका कहना था कि यह केवल श्रम कानूनों का मामला नहीं है,बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा,आर्थिक पारदर्शिता और रोजगार व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा विषय है। इसलिए विभिन्न सरकारी एजेंसियाँ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

इंस्पेक्टर जनरल ने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी श्रम कार्यक्रमों में होने वाली कथित धोखाधड़ी का संबंध केवल वीजा नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं हो सकता,बल्कि इसके पीछे बड़े आपराधिक नेटवर्क भी सक्रिय हो सकते हैं। उनके अनुसार कुछ मामलों में मानव तस्करी,संगठित अपराध और अंतर्राष्ट्रीय गिरोहों की भूमिका की भी आशंका है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ केवल कानून का उल्लंघन नहीं करतीं,बल्कि समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में विदेशी श्रमिकों की भर्ती प्रक्रिया का उपयोग ऐसे संगठनों द्वारा किया जा सकता है,जिनका संबंध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों या अंतर्राष्ट्रीय अपराध नेटवर्क से हो। इसलिए जाँच एजेंसियाँ केवल वीजा दस्तावेजों की जांच तक सीमित नहीं रहेंगी,बल्कि इन मामलों के पीछे मौजूद संभावित आपराधिक नेटवर्क की भी गहन जाँच की जाएगी।

एंथनी डी’एस्पोसिटो ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल अमेरिका को सुरक्षित बनाना नहीं है,बल्कि रोजगार बाजार को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना भी है। उनके अनुसार यदि रोजगार आधारित वीजा कार्यक्रमों का गलत इस्तेमाल होता है,तो इसका सीधा असर अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसरों पर पड़ता है। इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन योजनाओं का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों और वैध नियोक्ताओं तक ही सीमित रहे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जाँच केवल औद्योगिक इकाइयों या फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं होगी। उनके अनुसार प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिले हैं कि कुछ संदिग्ध मामले चिकित्सा संस्थानों,अस्पतालों और डॉक्टरों के क्लीनिकों से भी जुड़े हो सकते हैं। यदि ऐसे स्थानों पर नियमों का उल्लंघन हुआ है,तो इससे केवल प्रशासनिक समस्या ही नहीं,बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि योग्यताओं या नियमों की अनदेखी कर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है,तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

इंस्पेक्टर जनरल ने कहा कि जाँच के दौरान अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में स्थित फैक्ट्रियों,बंदरगाहों,अस्पतालों,नर्सिंग सुविधाओं और अन्य संस्थानों की भी जाँच की जाएगी। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं रोजगार आधारित वीजा योजनाओं का उपयोग अवैध तरीके से कर्मचारियों की नियुक्ति या श्रम कानूनों के उल्लंघन के लिए तो नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि इस व्यापक अभियान में अमेरिकी न्याय विभाग और संघीय अभियोजकों का भी सहयोग लिया जा रहा है। जाँच एजेंसियाँ एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही हैं,ताकि यदि किसी मामले में आपराधिक गतिविधि के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं,तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जाँच में किसी व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता सामने आती है,तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

एंथनी डी’एस्पोसिटो ने कहा कि जो लोग कथित धोखाधड़ी में शामिल पाए जाएँगे,उन्हें चिन्हित किया जाएगा, नके खिलाफ जाँच पूरी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना नहीं है,बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी सख्त संदेश देना है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि रोजगार आधारित वीजा कार्यक्रम अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनका उद्देश्य योग्य विदेशी पेशेवरों को अवसर प्रदान करना है,लेकिन यदि इन योजनाओं का गलत इस्तेमाल होता है,तो इससे न केवल प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है,बल्कि उन लोगों के हित भी प्रभावित होते हैं जो पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हैं। इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना आवश्यक है।

ट्रंप प्रशासन लंबे समय से रोजगार आधारित वीजा कार्यक्रमों में सुधार और नियमों के सख्त पालन की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। प्रशासन का कहना है कि एच-1बी और अन्य रोजगार वीजा योजनाओं का उद्देश्य अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करना है,न कि उनका उपयोग किसी प्रकार की धोखाधड़ी या अवैध गतिविधि के लिए किया जाए। इसी नीति के तहत अब व्यापक जाँच अभियान शुरू किया गया है।

फिलहाल इस जाँच के शुरुआती चरण में दस्तावेजों की समीक्षा,समन जारी करने और विभिन्न संस्थानों से जानकारी एकत्र करने का काम चल रहा है। आने वाले दिनों में जाँच का दायरा और बढ़ सकता है तथा कई अन्य कंपनियों और संस्थानों की भी जाँच की जा सकती है। इस कार्रवाई पर अमेरिका के उद्योग जगत,तकनीकी क्षेत्र और रोजगार आधारित वीजा धारकों की भी नजर बनी हुई है,क्योंकि जाँच के निष्कर्ष भविष्य में इन कार्यक्रमों से जुड़ी नीतियों और नियमों को भी प्रभावित कर सकते हैं।