नई दिल्ली,23 मार्च (युआईटीवी)- देश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियाँ तेज हो गई हैं और इसी क्रम में भारत के चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राष्ट्रीय और राज्य-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर मुफ्त प्रसारण समय उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल वाउचर जारी किए हैं। इस कदम का उद्देश्य चुनाव प्रचार के दौरान सभी मान्यता प्राप्त पार्टियों को समान अवसर प्रदान करना है,ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बन सके।
निर्वाचन आयोग ने यह व्यवस्था लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम,1951 की धारा 39A के तहत लागू की है। इस प्रावधान के अनुसार,चुनाव के दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सरकारी प्रसारण माध्यमों पर निर्धारित समय दिया जाता है,जिससे वे अपनी नीतियों, कार्यक्रमों और विचारों को मतदाताओं तक पहुँचा सकें। इस बार आयोग ने इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए डिजिटल वाउचर प्रणाली को अपनाया है।
यह सुविधा उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लागू की गई है,जहाँ विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें असम,केरल,पुडुचेरी,तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में चुनाव लड़ने वाली मान्यता प्राप्त पार्टियों को आईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल समय वाउचर प्रदान किए गए हैं,जिनके जरिए वे दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर अपने प्रचार संदेश प्रसारित कर सकेंगी।
निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई व्यवस्था के अनुसार,यह प्रसारण अवधि उम्मीदवारों की सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद शुरू होगी और मतदान की तारीख से दो दिन पहले तक जारी रहेगी। इस दौरान पार्टियों को अपने विचार और एजेंडा जनता के सामने रखने का अवसर मिलेगा। प्रसारण के समय का निर्धारण पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा,जिसमें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर ‘लॉटरी सिस्टम’ का उपयोग किया जाएगा।
यह लॉटरी प्रक्रिया संबंधित राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पार्टी के साथ भेदभाव न हो और सभी को समान अवसर मिले। इस प्रक्रिया से चुनाव प्रचार में निष्पक्षता और पारदर्शिता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र राजनीतिक दल को दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो दोनों पर 45 मिनट का ‘आधार समय’ मुफ्त प्रसारण के रूप में दिया गया है। यह समय राज्य के भीतर क्षेत्रीय नेटवर्क पर सभी पार्टियों को समान रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त,पार्टियों को उनके पिछले विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त समय भी आवंटित किया जाएगा,जिससे बड़े और छोटे दलों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया के लिए कुछ सख्त दिशानिर्देश भी तय किए हैं। राजनीतिक दलों को अपने प्रसारण के लिखित अंश और रिकॉर्डिंग पहले से जमा करनी होगी,ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सामग्री आचार संहिता और अन्य कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हो। रिकॉर्डिंग केवल उन स्टूडियो में की जा सकती है,जो प्रसार भारती द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करते हों। इसके अलावा,पार्टियाँ चाहें तो दूरदर्शन या ऑल इंडिया रेडियो के केंद्रों पर भी अपनी रिकॉर्डिंग करवा सकती हैं।
इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रसार भारती निगम द्वारा चुनाव के दौरान अधिकतम दो ‘पैनल चर्चा’ या ‘बहस’ कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में सभी पात्र राजनीतिक दलों को अपने प्रतिनिधि भेजने का अवसर मिलेगा। इन चर्चाओं का संचालन एक अनुमोदित समन्वयक द्वारा किया जाएगा,जिससे बहस संतुलित और निष्पक्ष बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल वाउचर प्रणाली के माध्यम से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी,बल्कि यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी पार्टियों को समान अवसर मिले,चाहे उनका आकार या संसाधन कुछ भी हो। खासतौर पर छोटे और क्षेत्रीय दलों के लिए यह व्यवस्था बेहद लाभकारी साबित हो सकती है,क्योंकि उन्हें भी राष्ट्रीय स्तर के मंच पर अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।
इसके अलावा,सरकारी प्रसारण माध्यमों के जरिए प्रचार करने से चुनावी खर्च को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है। निजी मीडिया पर विज्ञापन देने की तुलना में यह एक सस्ता और प्रभावी विकल्प है,जिससे चुनाव प्रक्रिया अधिक समावेशी बनती है।
निर्वाचन आयोग की यह पहल चुनावी प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष,पारदर्शी और संतुलित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इस अवसर का किस तरह उपयोग करते हैं और यह व्यवस्था मतदाताओं तक उनकी पहुँच को किस हद तक प्रभावित करती है।
