वॉशिंगटन,23 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका में सरकारी शटडाउन के बीच देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई है। लंबी सुरक्षा कतारों,उड़ानों में देरी और यात्रियों की बढ़ती नाराजगी के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक अहम कदम उठाते हुए इमीग्रेशन एंड कस्टम इंफोर्समेंट (आईसीई) एजेंटों को हवाई अड्डों पर तैनात करने का फैसला किया है। इस निर्णय का उद्देश्य परिवहन सुरक्षा प्रशासन पर बढ़ते दबाव को कम करना और यात्रियों को हो रही परेशानी को कुछ हद तक नियंत्रित करना है।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के आंशिक शटडाउन के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। होमलैंड सुरक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाली एजेंसियों में कर्मचारियों की कमी साफ तौर पर दिखाई दे रही है,जिसका सबसे बड़ा असर हवाई अड्डों की सुरक्षा जाँच व्यवस्था पर पड़ा है। देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को घंटों तक लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ रहा है,जिससे यात्रा अनुभव बेहद कठिन हो गया है।
व्हाइट हाउस के सीमा मामलों के प्रमुख टॉम होमन ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि सोमवार से आईसीई एजेंट हवाई अड्डों पर तैनात किए जाएँगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये एजेंट एक्स-रे मशीनों जैसी तकनीकी जाँच प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे,बल्कि प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी रखने,पहचान की जाँच करने और भीड़ को नियंत्रित करने जैसे कार्यों में मदद करेंगे। उनका कहना है कि इससे टीएसए अधिकारियों को अपने मुख्य तकनीकी कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।
हालाँकि,इस फैसले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। प्रशासन का दावा है कि आईसीई एजेंट “फोर्स मल्टिप्लायर” के रूप में काम करेंगे और सुरक्षा जाँच प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेंगे, लेकिन आलोचकों का मानना है कि बिना विशेष प्रशिक्षण वाले एजेंटों की तैनाती से समस्या का समाधान नहीं होगा,बल्कि इससे नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
शटडाउन के चलते स्थिति और गंभीर हो गई है क्योंकि टीएसए कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं मिल रहा है,जिसके कारण उनकी अनुपस्थिति दर में भारी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार,कई स्थानों पर टीएसए कर्मचारियों की अनुपस्थिति 40 प्रतिशत तक पहुँच गई है। इससे सुरक्षा जाँच प्रक्रिया धीमी हो गई है और लंबी कतारें आम बात बन गई हैं।
देश के प्रमुख हवाई अड्डों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। हार्ट्सफील्ड-जैक्सन अटलांटा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा,जो दुनिया के सबसे व्यस्त एयर हब्स में से एक माना जाता है,इस अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। यहाँ यात्रियों को पाँच घंटे तक इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि सुरक्षा लाइनें बैगेज क्लेम क्षेत्र तक फैल गई थीं।
इसी तरह लुइस आर्मस्ट्रांग न्यू ओरलेंस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी स्थिति काफी खराब रही,जहाँ एक यात्री ने बताया कि सुरक्षा लाइनें पार्किंग गेराज तक पहुँच गई थीं। इस तरह के दृश्य देशभर के कई एयरपोर्ट्स पर देखने को मिले,जिससे यात्रियों में भारी नाराजगी है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी हो रही है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के डेमोक्रेट्स जानबूझकर डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को बंद रखकर अमेरिकी नागरिकों और कर्मचारियों को परेशानी में डाल रहे हैं। उन्होंने इसे “गलत और अस्वीकार्य” करार दिया।
वहीं दूसरी ओर,डेमोक्रेटिक नेताओं ने प्रशासन के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। चाल्स स्कूमर ने आईसीई एजेंटों की तैनाती पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण वाले एजेंटों को हवाई अड्डों पर तैनात करना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे सुरक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और स्थिति और बिगड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई अड्डों पर सुरक्षा जाँच के कई महत्वपूर्ण चरण तकनीकी प्रशिक्षण और अनुभव की माँग करते हैं। ऐसे में आईसीई एजेंटों की भूमिका सीमित ही रह सकती है। हालाँकि,प्रशासन का तर्क है कि सहायक कार्यों में उनकी तैनाती से टीएसए अधिकारियों को राहत मिलेगी और वे अपनी विशेषज्ञता वाले कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि जिन हवाई अड्डों पर निजी स्क्रीनिंग ठेकेदार काम करते हैं,वहाँ स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। स्क्रीनिंग पार्टनरशिप प्रोग्राम के तहत संचालित इन हवाई अड्डों पर कर्मचारियों को शटडाउन के दौरान भी वेतन मिलता रहा,जिससे उनकी उपस्थिति बनी रही और लंबी कतारों की समस्या कम देखने को मिली। यह अंतर यह दर्शाता है कि मौजूदा संकट का मुख्य कारण स्टाफ की कमी और भुगतान से जुड़ी समस्याएँ हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी हवाई यात्रा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ और लंबी कतारें न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं,बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि इस स्थिति का समाधान केवल अस्थायी उपायों से संभव नहीं है। इसके लिए दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत है। जब तक शटडाउन की स्थिति बनी रहेगी,तब तक इस तरह की समस्याएँ सामने आती रहेंगी।
ट्रंप प्रशासन द्वारा आईसीई एजेंटों की तैनाती का फैसला एक तात्कालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है,लेकिन इसकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कदम वास्तव में यात्रियों की परेशानी को कम करने में कितना सफल होता है। फिलहाल,अमेरिकी हवाई अड्डों पर अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है और लाखों यात्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
