अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

रॉबर्ट म्यूलर के निधन पर ट्रंप की टिप्पणी से मचा राजनीतिक तूफान,रिपब्लिकन नेताओं ने भी की आलोचना

वॉशिंगटन,23 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका के पूर्व एफबीआई निदेशक रॉबर्ट म्यूलर के निधन के बाद अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। म्यूलर के लंबे सार्वजनिक जीवन और योगदान को लेकर जहाँ कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी,वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। ट्रंप की ओर से सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी को लेकर न केवल विपक्षी दलों ने,बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी कड़ी आपत्ति जताई है।

रॉबर्ट म्यूलर का शनिवार को निधन हो गया। उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक एफबीआई का नेतृत्व किया और अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल को खास तौर पर 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद के दौर में एजेंसी के पुनर्गठन और आतंकवाद-रोधी प्रयासों के लिए याद किया जाता है। इसके अलावा,उन्होंने 2016 के अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की जाँच का नेतृत्व किया,जिसने कई वर्षों तक अमेरिकी राजनीति को प्रभावित किया।

म्यूलर के निधन की खबर सामने आने के तुरंत बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट किया,जिसमें उन्होंने कहा कि म्यूलर के निधन से उन्हें खुशी है और अब वह निर्दोष लोगों को नुकसान नहीं पहुँचा सकेंगे। इस टिप्पणी ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएँ पैदा कर दीं। कई लोगों ने इसे एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी के प्रति असम्मानजनक और असंवेदनशील बताया।

इस बयान के बाद आलोचनाओं का सिलसिला शुरू हो गया। खास बात यह रही कि ट्रंप के इस बयान की आलोचना केवल डेमोक्रेट्स तक सीमित नहीं रही,बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इसे अनुचित करार दिया। न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी ने एबीसी न्यूज के कार्यक्रम “दिस वीक विद जॉर्ज स्टेफानोपोलोस” में इस मुद्दे पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

क्रिस्टी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के निधन पर इस तरह की टिप्पणी करना बेहद निंदनीय है और जब यह टिप्पणी एक मौजूदा राष्ट्रपति द्वारा की जाए,तो यह और भी अधिक गंभीर हो जाती है। उन्होंने म्यूलर को एक सम्मानित सैन्य दिग्गज और समर्पित सार्वजनिक सेवक बताया,जिनकी सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रॉबर्ट म्यूलर का सैन्य और सार्वजनिक जीवन बेहद उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने वियतनाम युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया और इस दौरान घायल भी हुए। उनके साहस और सेवा के लिए उन्हें ‘पर्पल हार्ट’, ‘ब्रॉन्ज स्टार’ और ‘नेवी कमेंडेशन मेडल’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। बाद में उन्होंने कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में लंबा करियर बनाया और एफबीआई के निदेशक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।

क्रिस्टी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने यूएस अटॉर्नी के रूप में काम करते समय म्यूलर के साथ पेशेवर रूप से काम किया था। उन्होंने कहा कि भले ही पेशेवर मतभेद हो सकते हैं,लेकिन इससे किसी व्यक्ति के प्रति सम्मान कम नहीं होता। उन्होंने म्यूलर की प्रतिबद्धता और देश सेवा के प्रति उनके समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि जब भी देश ने उन्हें बुलाया,उन्होंने कभी पीछे हटने का विकल्प नहीं चुना।

क्रिस्टी ने ट्रंप की टिप्पणी को व्यक्तिगत शिकायत से प्रेरित बताया। उनके अनुसार,यह बयान इस भावना से जुड़ा है कि ट्रंप खुद को हर परिस्थिति में केंद्र में रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा और दृष्टिकोण देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के लिए उचित नहीं है।

कार्यक्रम में मौजूद अन्य विश्लेषकों और नेताओं ने भी म्यूलर की विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने कानून प्रवर्तन और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके दशकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि म्यूलर ने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना किया और अमेरिका की सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।

म्यूलर को 2001 में एफबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था और उन्होंने उस समय एजेंसी की कमान सँभाली जब देश 9/11 हमलों के बाद एक बड़े संकट से गुजर रहा था। उनके नेतृत्व में एफबीआई ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीतियों को मजबूत किया और कई महत्वपूर्ण अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

इसके अलावा,म्यूलर की अगुवाई में हुई रूस जाँच ने भी अमेरिकी राजनीति में बड़ा प्रभाव डाला। इस जाँच में 2016 के चुनाव को प्रभावित करने के लिए रूस के प्रयासों और ट्रंप अभियान से संभावित संबंधों की जाँच की गई थी। यह जाँच लंबे समय तक राजनीतिक बहस का केंद्र बनी रही और इसके परिणामों ने अमेरिका के राजनीतिक माहौल को गहराई से प्रभावित किया।

ट्रम्प और म्यूलर के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे थे,खासकर रूस जाँच के दौरान। यही कारण माना जा रहा है कि ट्रंप की प्रतिक्रिया इतनी तीखी और विवादास्पद रही। हालाँकि,इस प्रतिक्रिया ने यह भी दिखा दिया कि अमेरिकी राजनीति में व्यक्तिगत मतभेद किस हद तक सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।

रॉबर्ट म्यूलर के निधन पर ट्रंप की टिप्पणी ने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। जहाँ एक ओर म्यूलर के योगदान और उनकी विरासत को याद किया जा रहा है,वहीं दूसरी ओर इस घटना ने राजनीतिक शिष्टाचार और सार्वजनिक पद की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का अमेरिकी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या इससे राजनीतिक संवाद के स्तर में कोई बदलाव आता है।