चिन्नास्वामी स्टेडियम में द्रविड़ और कुंबले के नाम पर एंड समर्पित (तस्वीर क्रेडिट@Shashank16Feb)

आईपीएल 2026: चिन्नास्वामी स्टेडियम में द्रविड़ और कुंबले के नाम पर एंड समर्पित,कर्नाटक क्रिकेट के दिग्गजों को मिला बड़ा सम्मान

नई दिल्ली,6 अप्रैल (युआईटीवी)- इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल ) 2026 के दौरान एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण तब देखने को मिला,जब एम. चिन्नस्वामी स्टेडियम में भारत के दो महान क्रिकेटरों राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले को विशेष सम्मान दिया गया। चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच मुकाबले से पहले कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ ने स्टेडियम के दो छोरों का नाम इन दिग्गजों के नाम पर रखकर उन्हें सम्मानित किया। यह आयोजन न केवल कर्नाटक क्रिकेट के लिए,बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बन गया।

कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित इस समारोह में ‘राहुल द्रविड़ एंड’ और ‘अनिल कुंबले एंड’ का औपचारिक अनावरण किया गया। पहले ‘बीईएमएल एंड’ के नाम से जाना जाने वाला छोर अब राहुल द्रविड़ के नाम से जाना जाएगा,जबकि ‘पवेलियन एंड’ को अनिल कुंबले के नाम पर समर्पित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर दोनों खिलाड़ियों के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे,जिससे समारोह और भी भावनात्मक बन गया।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केएससीए के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने की। उनके साथ उपाध्यक्ष सुजीत सोमसुंदर और संघ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। समारोह के दौरान द्रविड़ और कुंबले के क्रिकेट करियर की उपलब्धियों को याद किया गया और उनके योगदान को सराहा गया।

राहुल द्रविड़,जिन्हें ‘द वॉल’ के नाम से भी जाना जाता है,भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक रहे हैं। उन्होंने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में 24,177 रन बनाकर एक मिसाल कायम की। टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में उनकी स्थिरता और तकनीकी कौशल ने भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई। वहीं अनिल कुंबले भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल गेंदबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने सभी प्रारूपों में कुल 956 विकेट लेकर देश को अनगिनत मैच जिताए और अपनी लेग स्पिन गेंदबाजी से बल्लेबाजों के लिए हमेशा चुनौती पेश की।

इन दोनों खिलाड़ियों की खास बात यह भी है कि उन्होंने न केवल भारतीय टीम की कप्तानी की,बल्कि बाद में राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। इस तरह वे उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं,जिन्होंने मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह भारतीय क्रिकेट को मजबूत किया।

समारोह में राहुल द्रविड़ की माँ पुष्पा और उनके भाई विजय भी मौजूद रहे,जबकि अनिल कुंबले के परिवार से उनकी पत्नी चेतना,बेटा मयास और बेटियाँ आरुणि और स्वस्ति इस खास मौके का हिस्सा बने। परिवार के सदस्यों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया,क्योंकि यह केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं था,बल्कि उन वर्षों की मेहनत और समर्पण का जश्न था,जो इन खिलाड़ियों ने क्रिकेट को दिए।

कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ ने फरवरी में ही इस सम्मान की घोषणा कर दी थी। उस समय संघ ने कहा था कि द्रविड़ और कुंबले जैसे दिग्गजों को स्थायी रूप से सम्मानित करने के लिए स्टेडियम के हिस्सों का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा,ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को याद रख सकें। अब इस घोषणा को अमल में लाते हुए यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

इस मौके पर अनिल कुंबले ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बेहद विनम्रता दिखाई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक क्रिकेट ने उन्हें और उनके जैसे कई खिलाड़ियों को पहचान दिलाई है। कुंबले ने कहा, “यह कहना गलत नहीं होगा कि हम सभी के योगदान ने कर्नाटक क्रिकेट को वह बनाया है,जो आज वह है और कर्नाटक क्रिकेट ने ही हम सभी को बनाया है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह मायने नहीं रखता कि किस स्टैंड या एंड का नाम किसके नाम पर है,बल्कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी खिलाड़ियों के योगदान को सम्मान मिला है और वह हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।

यह सम्मान न केवल द्रविड़ और कुंबले के लिए,बल्कि कर्नाटक क्रिकेट की उस परंपरा के लिए भी है,जिसने भारतीय क्रिकेट को कई महान खिलाड़ी दिए हैं। चिन्नास्वामी स्टेडियम, जो पहले से ही कई ऐतिहासिक मुकाबलों का गवाह रहा है,अब इन दो दिग्गजों के नाम से और भी खास हो गया है।

इस आयोजन ने यह भी संदेश दिया है कि क्रिकेट में केवल वर्तमान प्रदर्शन ही नहीं,बल्कि अतीत के योगदान को भी समान रूप से महत्व दिया जाना चाहिए। द्रविड़ और कुंबले जैसे खिलाड़ियों ने जिस समर्पण और अनुशासन के साथ खेल को आगे बढ़ाया,वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

आईपीएल के इस सीजन में जहाँ एक ओर रोमांचक मुकाबले चल रहे हैं,वहीं दूसरी ओर ऐसे आयोजन क्रिकेट के इतिहास और परंपरा को जीवित रखने का काम कर रहे हैं। द्रविड़ और कुंबले के नाम पर स्टेडियम के छोर समर्पित करना भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्याय को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।