अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

ओमान की खाड़ी में बढ़ा तनाव: अमेरिकी नौसेना ने ईरानी जहाज जब्त किया,तेहरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

वॉशिंगटन,20 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार,अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को रोकने के लिए गोलीबारी की और बाद में उसे अपने कब्जे में ले लिया। इस घटना के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे समुद्री डकैती करार दिया है और जल्द जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर इस पूरी घटना का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि “टीओयूएसकेए” नाम का एक बड़ा कार्गो जहाज,जो लगभग 900 फीट लंबा बताया जा रहा है,अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। उनके मुताबिक,यह जहाज आकार और वजन में लगभग एक एयरक्राफ्ट कैरियर के बराबर था,जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई थी।

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार,अमेरिकी नौसेना के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस एसपीआरयूएएनसीई ने जहाज को कई बार चेतावनी दी कि वह रुक जाए और आगे न बढ़े। हालाँकि,ईरानी क्रू ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने सख्त कार्रवाई करते हुए जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया,जिससे जहाज को आगे बढ़ने से रोका जा सके। ट्रंप ने दावा किया कि इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज को अपने नियंत्रण में ले लिया और अब उसकी पूरी कस्टडी अमेरिकी सेना के पास है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि इस जहाज पर पहले से ही अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंध लगे हुए थे और यह पहले भी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अब अमेरिकी एजेंसियाँ यह जाँच कर रही हैं कि जहाज पर क्या सामान मौजूद था और क्या वह अंतर्राष्ट्रीयनियमों का उल्लंघन कर रहा था।

दूसरी ओर,ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सेना ने अमेरिकी कार्रवाई को “समुद्री लूट” और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए ओमान सागर में एक ईरानी व्यावसायिक जहाज पर हमला किया है।

ईरानी सेना के मुताबिक,अमेरिकी बलों ने न केवल जहाज को जब्त किया,बल्कि उसके नेविगेशनल उपकरणों को भी नुकसान पहुँचाया और जहाज के डेक पर सैनिकों को तैनात कर दिया। इस बयान में यह भी कहा गया कि यह कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बयान के अंत में साफ तौर पर चेतावनी दी गई कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना जल्द ही अमेरिका की इस कार्रवाई का जवाब देगी।

इस घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी लंबे समय से रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहाँ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है।

घटना का समय भी बेहद अहम माना जा रहा है,क्योंकि इससे पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं की खबरें सामने आई थीं। ट्रंप ने हाल ही में बताया था कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद जाने वाला है। इस बयान के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम हो सकता है,लेकिन अब इस सैन्य कार्रवाई ने उन संभावनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार,व्हाइट हाउस की ओर से प्रस्तावित इस प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस,विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल हो सकते हैं। हालाँकि,ईरान की ओर से अब तक आधिकारिक रूप से यह पुष्टि नहीं की गई है कि वह इस वार्ता में हिस्सा लेगा या नहीं।

कुछ ईरानी सूत्रों ने संकेत दिया है कि एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँच सकता है,लेकिन ईरान के कई मीडिया संस्थानों ने इस पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में बातचीत की संभावना कम नजर आ रही है,खासकर तब जब समुद्र में इस तरह की सैन्य कार्रवाई हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव का एक और खतरनाक चरण हो सकती है। दोनों देशों के बीच पहले भी कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है,जिसमें आर्थिक प्रतिबंध,सैन्य गतिविधियाँ और कूटनीतिक बयानबाजी शामिल रही है। अब ओमान की खाड़ी में हुई यह घटना इस संघर्ष को और जटिल बना सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें फिलहाल इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं। यदि ईरान वास्तव में जवाबी कार्रवाई करता है,तो यह स्थिति बड़े सैन्य टकराव में बदल सकती है। वहीं अगर कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाता है, तो तनाव को कम करने की संभावना भी बनी रह सकती है।

फिलहाल,इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। समुद्र में हुई यह कार्रवाई केवल एक जहाज तक सीमित नहीं है,बल्कि यह वैश्विक राजनीति,सुरक्षा और आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ेगा—संघर्ष की ओर या समाधान की ओर।