मणिपुर में दो नागा नागरिकों की हत्या पर उबाल (तस्वीर क्रेडिट@Northeast_Diary)

मणिपुर में दो नागा नागरिकों की हत्या पर उबाल,तीन दिन के बंद का ऐलान,राज्य सरकार पर उठे सवाल

इंफाल,20 अप्रैल (युआईटीवी)- पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक बार फिर जातीय तनाव ने गंभीर रूप ले लिया है। उखरुल जिले में दो नागा नागरिकों की कथित रूप से बर्बर हत्या के बाद नागा संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया है। इस घटना के विरोध में यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने तीन दिन के पूर्ण बंद का आह्वान किया है,जो आज आधी रात से शुरू होकर 23 अप्रैल की आधी रात तक जारी रहेगा। इस बंद का असर राज्य के कई इलाकों में देखने को मिल सकता है,जहाँ सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।

यह फैसला यूएनसी मुख्यालय में आयोजित एक संयुक्त आपात बैठक में लिया गया, जिसमें अखिल नागा छात्र संघ मणिपुर,नागा महिला संघ और विभिन्न जिलों के नागा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य उखरुल जिले के टीएम-कसोम गाँव के पास हुई इस घटना की कड़ी निंदा करना और आगे की रणनीति तय करना था।

जानकारी के अनुसार,उखरुल जिले के रहने वाले चाइनाओशांग शोकवुंगनाओ (45) और यारूइंगम वाशुम (42) नामक दो नागा नागरिक राष्ट्रीय हाइवे 202 पर यात्रा कर रहे थे, तभी कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों ने उन्हें रोक लिया और निर्ममता से उनकी हत्या कर दी। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर,बल्कि पूरे नागा समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों में भय और असुरक्षा की भावना तेजी से बढ़ रही है।

यूएनसी और अन्य संगठनों ने इस घटना के बाद सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए हैं। बंद के दौरान आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी सरकारी और निजी संस्थान,दुकानें और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। इसके साथ ही शोक की इस अवधि में कुकी समुदाय के साथ सभी सामाजिक और आर्थिक संबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित करने का भी निर्णय लिया गया है। यह कदम दोनों समुदायों के बीच बढ़ते तनाव को और उजागर करता है।

इसके अलावा 23 अप्रैल को शाम 6:30 बजे सभी नागा जिला मुख्यालयों और इंफाल में सामूहिक शोकसभाएँ आयोजित की जाएँगी,जहाँ मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस दौरान लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाएं व्यक्त करने की अपील की गई है।

यूएनसी ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। संगठन का कहना है कि यह घटना ऐसे समय में हुई जब मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने हाल ही में उखरुल जिले का दौरा किया था। यूएनसी के नेताओं ने सवाल उठाया कि जब उच्च स्तर पर सुरक्षा की समीक्षा की जा चुकी थी,तो फिर इतनी गंभीर घटना कैसे हो गई। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक के लिए राज्य सरकार से नैतिक जिम्मेदारी लेने की माँग की है।

नागा संगठनों के नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ दो व्यक्तियों की हत्या नहीं है,बल्कि यह नागा समुदाय की गरिमा और उनकी क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसी घटनाएँ लगातार होती रहीं और सरकार सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही,तो भविष्य में और भी बड़े आंदोलन किए जा सकते हैं।

बैठक का समापन थामडोक फ्रांसिस के नेतृत्व में एक मिनट के मौन के साथ किया गया,जिसमें मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस दौरान उपस्थित सभी संगठनों ने एकजुटता का संदेश दिया और कहा कि नागा समुदाय इस कठिन समय में एक साथ खड़ा है।

यह घटना मणिपुर में लंबे समय से चले आ रहे जातीय संघर्ष को फिर से उजागर करती है। राज्य में नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव पहले से ही मौजूद रहा है और इस तरह की घटनाएँ हालात को और जटिल बना देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए,तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लगातार डर के माहौल में जी रहे हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह जल्द-से-जल्द दोषियों को पकड़कर सख्त कार्रवाई करे और इलाके में शांति बहाल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

फिलहाल,पूरे राज्य की नजरें सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से कैसे निपटता है और क्या वह नागा समुदाय के विश्वास को बहाल करने में सफल हो पाता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह घटना राज्य की कानून-व्यवस्था और सामाजिक समरसता पर किस हद तक असर डालती है।