होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से तेल बाजार में उथल-पुथल (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल बाजार में उछाल,वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

नई दिल्ली,20 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा बंद करने के फैसले ने अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल मचा दी है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया,जिससे दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

सुबह के कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 95.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गई,जो हाल के महीनों में सबसे ऊँचे स्तरों में से एक है। वहीं,डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 6.11 प्रतिशत की मजबूती के साथ 87.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। इस अचानक आई तेजी का सीधा कारण होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना माना जा रहा है,जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है।

भारत के घरेलू बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर कच्चे तेल का 18 मई 2026 का वायदा अनुबंध 6.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 8,175 रुपये पर पहुँच गया। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आई हलचल का प्रभाव भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर तुरंत पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है,जहाँ से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में इसका बंद होना न केवल तेल की कीमतों को प्रभावित करता है,बल्कि पूरी सप्लाई चेन को बाधित कर सकता है।

ईरान ने इस कदम के साथ ही समुद्री जहाजों को चेतावनी दी है कि यदि कोई भी जहाज बिना अनुमति के इस जलमार्ग को पार करने की कोशिश करता है,तो उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस बयान ने अंतराष्ट्रीय व्यापार जगत में चिंता को और बढ़ा दिया है,क्योंकि इससे समुद्री परिवहन की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दूसरी ओर,संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि ईरान इस जलमार्ग को बंद करके अमेरिका या वैश्विक समुदाय को ब्लैकमेल नहीं कर सकता। उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।

वहीं, ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह उसके बंदरगाहों की लगातार नाकाबंदी कर रहा है,जिसके जवाब में यह कदम उठाया गया है। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन भी बताया है,जिससे दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव में और वृद्धि हो गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा कि देश की नौसेना अपने दुश्मनों को “नई करारी हार” देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस बीच,अमेरिका की ओर से भी सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं। हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया,जिसने कथित तौर पर अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी। इस कार्रवाई के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है,जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि दोनों देशों के बीच तय किया गया अस्थायी युद्धविराम भी ज्यादा समय तक कायम नहीं रह पाएगा।

इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी साफ तौर पर देखा गया। भारत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले,जिससे निवेशकों की चिंता झलकती है। हालाँकि,एशियाई बाजारों में कुछ हद तक सकारात्मक रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई,हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 1 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक माहौल रहा था। एसएंडपी 500 इंडेक्स 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ,जबकि नैस्डैक में 1.52 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालाँकि,विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है,तो इसका असर इन बाजारों पर भी जल्द देखने को मिल सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार,यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है,तो तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं,जिससे महँगाई में तेजी आएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। खासतौर पर भारत जैसे देशों के लिए,जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पैदा हुआ यह संकट केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है,बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या नहीं,क्योंकि इसका सीधा असर दुनिया की आर्थिक स्थिरता पर पड़ने वाला है।