नई दिल्ली,7 मई (युआईटीवी)- दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल ने भारत में हरित ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 100 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की है। कंपनी का यह निवेश देश में रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को गति देने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एप्पल का यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब दुनिया भर की बड़ी कंपनियाँ कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बना रही हैं।
कंपनी ने बताया कि यह निवेश भारत की अग्रणी रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट कंपनियों में शामिल क्लीनमैक्स के सहयोग से किया जाएगा। इस साझेदारी के तहत देशभर में 150 मेगावाट से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने की योजना बनाई गई है। माना जा रहा है कि यह परियोजना भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलेगी।
आईफोन निर्माता कंपनी के अनुसार प्रस्तावित ऊर्जा क्षमता इतनी होगी कि लगभग डेढ़ लाख भारतीय घरों को हर साल बिजली उपलब्ध कराई जा सके। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में इस परियोजना का विस्तार किया जा सकता है। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा,बल्कि भारत में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
एप्पल ने साफ किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में उसकी आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह रिन्यूएबल एनर्जी आधारित बनाना है। कंपनी लंबे समय से अपने वैश्विक परिचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रही है। एप्पल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपने संपूर्ण परिचालन क्षेत्र में कार्बन न्यूट्रल बनना है। भारत में किया जा रहा यह निवेश उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कंपनी की पर्यावरण और आपूर्ति श्रृंखला नवाचार की उपाध्यक्ष सारा चैंडलर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एप्पल की कारोबारी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कंपनी के लिए नवाचार केवल तकनीक तक सीमित नहीं है,बल्कि पृथ्वी और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। सारा चैंडलर ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था में निवेश करना एप्पल के लिए गर्व की बात है और कंपनी आने वाले समय में भी इस दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहाँ स्वच्छ ऊर्जा की संभावनाएं काफी व्यापक हैं। ऐसे में हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एप्पल जैसी वैश्विक कंपनी का यह कदम अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी भारत में हरित ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित कर सकता है।
यह पहली बार नहीं है,जब एप्पल ने भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहल की हो। इससे पहले भी कंपनी क्लीनमैक्स के साथ मिलकर रूफटॉप सोलर परियोजनाओं पर काम कर चुकी है। इन परियोजनाओं के जरिए भारत में एप्पल के कार्यालयों और खुदरा स्टोरों को पूरी तरह रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। कंपनी का दावा है कि उसके भारत स्थित कई परिचालन केंद्र पहले ही 100 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित हो चुके हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के अलावा एप्पल ने भारत में प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और हरित उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए भी नई साझेदारियों की घोषणा की है। कंपनी ने कहा कि वह डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के साथ मिलकर रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ पर्यावरण में प्लास्टिक के रिसाव को कम करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में प्लास्टिक प्रदूषण तेजी से बढ़ती चुनौती बन चुका है। ऐसे में निजी कंपनियों और पर्यावरण संगठनों के बीच सहयोग से इस समस्या के समाधान में मदद मिल सकती है। एप्पल का मानना है कि अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण प्रणाली को मजबूत किए बिना पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा।
इसके साथ ही कंपनी ने एक्यूमेन के साथ भी साझेदारी की है। इस साझेदारी का उद्देश्य उन शुरुआती चरण के हरित उद्यमों को सहायता देना है,जो अपशिष्ट प्रबंधन,पुनर्योजी कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कंपनी इन स्टार्टअप्स को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन और कारोबारी सहायता प्रदान करेगी ताकि वे अपने नवाचारों को बड़े स्तर पर लागू कर सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि चक्रीय अर्थव्यवस्था और पुनर्योजी कृषि आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से बन सकते हैं। ऐसे में एप्पल जैसी बड़ी कंपनी का इन क्षेत्रों में निवेश करना इस बात का संकेत है कि भविष्य में तकनीकी कंपनियां केवल डिजिटल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगी,बल्कि पर्यावरण और सामाजिक विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएँगी।
भारत सरकार भी लगातार रिन्यूएबल एनर्जी और हरित विकास को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। देश ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में विदेशी निवेश और वैश्विक कंपनियों की भागीदारी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एप्पल का यह निवेश भारत की हरित ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को मजबूती देने के साथ-साथ स्वच्छ और टिकाऊ विकास के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
एप्पल की यह पहल केवल एक कारोबारी निवेश नहीं,बल्कि पर्यावरण संरक्षण,स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे भारत के हरित ऊर्जा क्षेत्र को नई ताकत मिलने की उम्मीद है और आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर दिखाई दे सकता है।
