वाशिंगटन,13 मई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन दौरे पर रवाना होने से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने व्यक्तिगत और कूटनीतिक रिश्तों की खुलकर तारीफ की है। वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव,ईरान संकट,व्यापार युद्ध और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते समीकरणों के बीच ट्रंप का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्हाइट हाउस से चीन रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग बनाए रखना पूरी दुनिया के हित में है।
ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत और सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा, “हम हमेशा अच्छी तरह साथ रहे हैं। चीन के साथ काम करना अच्छा अनुभव रहा है और मुझे इस यात्रा के दौरान शानदार मुलाकात की उम्मीद है।” ट्रंप के इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है,जब अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी वर्चस्व, ताइवान मुद्दा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर लगातार मतभेद देखने को मिले हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ संकेत दिया कि उनकी इस यात्रा का सबसे बड़ा एजेंडा व्यापार रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक रिश्ते बहुत बड़े हैं और दोनों देश इससे लाभ उठा रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “हमारे चीन के साथ बड़े संबंध हैं। हम दोनों सुपरपावर हैं और कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है। सबसे ज्यादा फोकस व्यापार पर रहेगा।” माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच आयात शुल्क,तकनीकी कंपनियों पर प्रतिबंध,सप्लाई चेन और निवेश जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हो सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध कई बार तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिकी कंपनियों ने चीन की व्यापार नीतियों और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर चिंता जताई थी,जबकि चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ को अनुचित बताया था। हालाँकि,इसके बावजूद दोनों देशों ने आर्थिक संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं किए और लगातार बातचीत जारी रखी। ट्रंप की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रिश्तों को स्थिर करने की दिशा में एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि शी जिनपिंग इस साल के अंत तक अमेरिका का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी और इससे द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूती मिलेगी। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी इस साल के आखिर में अमेरिका आएँगे। यह काफी रोमांचक होगा।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह दौरा होता है तो इससे अमेरिका और चीन के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद को नई दिशा मिल सकती है।
इस दौरान ट्रंप ने ईरान संकट पर भी बयान दिया और कहा कि अगर चीन इस मुद्दे को हल करने में मदद करता है,तो अमेरिका उसका स्वागत करेगा। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस समय सैन्य रूप से कमजोर स्थिति में है और अमेरिका हालात पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए हुए है। उन्होंने कहा, “ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है। या तो वे सही रास्ता अपनाएँगे या हम बाकी काम पूरा करेंगे।” ट्रंप के इस बयान को मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है,जहाँ ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से टकराव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की भूमिका ईरान मामले में काफी अहम हो सकती है,क्योंकि चीन ईरान का एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक साझेदार माना जाता है। ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति के लिहाज से भी चीन की दिलचस्पी इस क्षेत्र में बनी हुई है। ऐसे में ट्रंप की कोशिश यह हो सकती है कि चीन ईरान पर दबाव बनाए और क्षेत्रीय तनाव को कम करने में भूमिका निभाए।
अपनी यात्रा के रणनीतिक महत्व पर बात करते हुए ट्रंप ने अमेरिका को दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत बताया। उन्होंने कहा कि चीन को दुनिया का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है और दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखें। ट्रंप ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं होगी,बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
गौरतलब है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हुई है। ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच कई बार तीखी बयानबाजी भी हो चुकी है। अमेरिका जहाँ ताइवान को समर्थन देता रहा है,वहीं चीन इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल मानता है। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों और नौसैनिक उपस्थिति को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।
तकनीकी क्षेत्र में भी अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। अमेरिकी प्रशासन ने कई चीनी तकनीकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं,जबकि चीन ने भी अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाने पर जोर दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को और प्रभावित कर सकते हैं।
ट्रंप की चीन यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। भारत भी इस बदलते अमेरिका-चीन समीकरण को करीब से देख रहा है,क्योंकि इसका सीधा असर इंडो-पैसिफिक रणनीति,वैश्विक व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। भारत लंबे समय से अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है,वहीं चीन के साथ सीमा और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका और चीन के रिश्तों में किसी भी बड़े बदलाव का प्रभाव एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितता,युद्ध जैसे हालात और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच होने वाली यह शिखर वार्ता आने वाले समय की वैश्विक राजनीति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
