बीजिंग,14 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक राजनीति, व्यापार और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण मुलाकात गुरुवार को बीजिंग में देखने को मिली,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर पहुँचे। चीन की राजधानी बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप का बेहद भव्य और औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान चीन ने अपनी पारंपरिक सैन्य ताकत,अनुशासन और सांस्कृतिक प्रस्तुति का प्रदर्शन करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के सम्मान में विशेष समारोह आयोजित किया।
बीजिंग के ऐतिहासिक ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में आयोजित इस स्वागत समारोह ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रेड कार्पेट पर चलते हुए ट्रंप और शी जिनपिंग ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन किया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और फिर संयुक्त रूप से स्वागत समारोह का निरीक्षण किया। समारोह के दौरान चीनी सैनिकों ने बेहद व्यवस्थित और कोरियोग्राफ किए गए सैन्य प्रदर्शन का आयोजन किया,जिसे चीन की सैन्य क्षमता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है।
समारोह के दौरान सैन्य बैंड ने अमेरिकी राष्ट्रगान “द स्टार स्पैंगल्ड बैनर” की धुन बजाई। इसके साथ ही पारंपरिक चीनी संगीत भी माहौल में गूँजता रहा। रेड कार्पेट के दोनों ओर खड़े सैनिकों ने एक साथ कदमताल करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों का एक समूह भी वहाँ मौजूद था,जो चीनी और अमेरिकी झंडे लहराते हुए दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक प्रस्तुत कर रहा था। बच्चों के हाथों में फूलों के गुलदस्ते थे और वे दोनों नेताओं के स्वागत में उत्साह दिखा रहे थे।
स्वागत समारोह के बाद दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मुलाकात की। इसके बाद ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई,जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इस बैठक को अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा तनावपूर्ण मुद्दों को सुलझाने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार,तकनीक,वैश्विक सुरक्षा,ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कई संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक से पहले दोनों नेताओं ने शुरुआती संबोधन भी दिया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच स्थिर और संतुलित संबंध वैश्विक शांति और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि चीन अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने और मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का पक्षधर है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने भी चीन के स्वागत की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध पूरी दुनिया के हित में हैं। उन्होंने व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है,जब अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। तकनीकी प्रतिस्पर्धा,व्यापारिक टैरिफ,दक्षिण चीन सागर,ताइवान और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषय दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे में ट्रंप और शी की यह मुलाकात आने वाले समय में दोनों देशों की नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
बीजिंग में आयोजित यह समारोह चीन की कूटनीतिक शैली का भी एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। चीन अक्सर दुनिया के बड़े नेताओं के स्वागत में भव्य सैन्य और सांस्कृतिक प्रदर्शन करता रहा है। इस बार भी चीन ने अपनी सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक अनुशासन का ऐसा प्रदर्शन किया,जिसने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा। चीन की सेना अपने समन्वित मार्च और कोरियोग्राफ किए गए सैन्य कार्यक्रमों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पिछले वर्ष सितंबर में दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति की वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में भी चीन ने अपनी ताकत का भव्य प्रदर्शन किया था।
राष्ट्रपति ट्रंप और शी जिनपिंग की पिछली मुलाकात दक्षिण कोरिया में आयोजित एपीईसी शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस समय दोनों नेताओं ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी,जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में कुछ सुधार देखने को मिला था। हालाँकि,उसके बाद भी कई मुद्दों पर मतभेद बने रहे। यही कारण है कि इस बार की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेष रूप से व्यापार और तकनीक को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रतिस्पर्धा चल रही है। अमेरिका लगातार चीन की तकनीकी कंपनियों और औद्योगिक नीतियों को लेकर चिंता जताता रहा है,जबकि चीन अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ का विरोध करता रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बातचीत को वैश्विक बाजार भी बेहद ध्यान से देख रहा है।
इसके अलावा ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर उसके प्रभाव को देखते हुए अमेरिका और चीन दोनों ही इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में हैं। माना जा रहा है कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया।
बीजिंग में ट्रंप के स्वागत और दोनों नेताओं की बैठक ने यह संकेत दिया है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के बावजूद अमेरिका और चीन संवाद बनाए रखना चाहते हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच यह मुलाकात आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति,व्यापार और सुरक्षा के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बैठक से कौन से ठोस फैसले निकलते हैं और दोनों देशों के रिश्तों में आगे किस दिशा में बदलाव देखने को मिलता है।
