नई दिल्ली,14 मई (युआईटीवी)- ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने के लिए सैयद अब्बास अराघची बुधवार शाम नई दिल्ली पहुँचे। भारत की राजधानी में उनके आगमन पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक को वैश्विक और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है,क्योंकि मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव,ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा करते हुए ईरानी विदेश मंत्री के स्वागत की जानकारी दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुँचे ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का हार्दिक स्वागत किया गया है। इसके साथ साझा तस्वीरों में भारतीय अधिकारियों को उनका स्वागत करते हुए देखा गया।
ईरान सरकार के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से भी इस यात्रा की पुष्टि की गई। जानकारी के अनुसार सैयद अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के साथ-साथ विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। यह बैठक इस साल के अंत में भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित की जा रही है,इसलिए इसे आगामी वैश्विक एजेंडे की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
ईरान की ओर से उम्मीद जताई गई है कि इस यात्रा के दौरान अराघची की मुलाकात भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य देशों के विदेश मंत्रियों से होगी। इन बैठकों में क्षेत्रीय स्थिरता,बहुपक्षीय सहयोग,आर्थिक साझेदारी और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे वार्ता के प्रमुख केंद्र में रह सकते हैं।
ईरानी विदेश मंत्री के नई दिल्ली पहुँचने से पहले ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी भी भारत पहुँचे थे। उनका स्वागत विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने किया। दोनों पक्षों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी बातचीत की गई।
भारत और ईरान के संबंध लंबे समय से ऐतिहासिक,सांस्कृतिक और रणनीतिक विश्वास पर आधारित रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार,ऊर्जा और संपर्क परियोजनाओं को लेकर लगातार सहयोग बढ़ता रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह साझेदारी और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ईरान की भूमिका ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद अहम हो गई है।
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए काजेम गरीबाबादी ने भारत को “दोस्त देश” बताया। उन्होंने कहा कि ईरान और भारत वर्तमान क्षेत्रीय तनाव के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 11 भारतीय जहाजों को वहाँ से गुजरने की अनुमति दी जा चुकी है और कुछ अन्य जहाजों के लिए भी प्रक्रिया जारी है।
गरीबाबादी ने कहा कि यह विशेष सुविधा फिलहाल केवल भारत को दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी देशों के जहाजों को ऐसी अनुमति नहीं दी जा रही और न ही हर जहाज को मंजूरी मिलेगी। उन्होंने भारत की ओर से मिले सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसे और दोस्ती के कारण यह समन्वय संभव हो पाया है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक 11 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजर चुके हैं,जबकि 13 अन्य जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं और आगे की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है,क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
ईरान के उप विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ जारी वार्ताओं के बीच ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम तैयार किए हैं। इन नियमों के तहत ईरान जहाजों पर कुछ शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। यह शुल्क अलग-अलग मानकों के आधार पर तय किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर वैश्विक व्यापार और तेल परिवहन लागत पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली में हो रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है,जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। रूस-यूक्रेन संघर्ष,पश्चिम एशिया में तनाव,वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुख बने हुए हैं। ऐसे में भारत,ईरान और अन्य ब्रिक्स देशों के बीच संवाद और सहयोग को बेहद अहम माना जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक आने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत की कोशिश है कि ब्रिक्स मंच के जरिए विकासशील देशों की आवाज को मजबूत किया जाए और वैश्विक दक्षिण के साझा हितों को प्रभावी तरीके से अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रखा जाए।
नई दिल्ली में ईरानी विदेश मंत्री की मौजूदगी यह संकेत भी देती है कि भारत और ईरान दोनों बदलते वैश्विक हालात में अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच व्यापार,ऊर्जा,समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर सहयोग और गहरा हो सकता है।
