एयर इंडिया

एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2025-26 में 2.8 अरब डॉलर का भारी घाटा,सिंगापुर एयरलाइंस के मुनाफे पर भी पड़ा असर

नई दिल्ली,15 मई (युआईटीवी)- एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2025-26 में भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को जारी सिंगापुर एयरलाइंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार,एयर इंडिया को मार्च 2026 तक के 12 महीनों में लगभग 3.56 अरब सिंगापुर डॉलर यानी मौजूदा विनिमय दर के अनुसार करीब 2.8 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। एयर इंडिया में हिस्सेदारी रखने वाली सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा है कि इस नुकसान का सीधा असर उसके समूह के कुल मुनाफे पर पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक,सिंगापुर एयरलाइंस ग्रुप के शुद्ध लाभ में इस वित्त वर्ष के दौरान 57.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का शुद्ध लाभ घटकर 1.184 अरब सिंगापुर डॉलर रह गया,जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में समूह ने 2.778 अरब सिंगापुर डॉलर का शुद्ध लाभ कमाया था। कंपनी ने स्पष्ट किया कि एयर इंडिया में उसकी 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है और एयर इंडिया के लगातार बढ़ते घाटे ने समूह की बैलेंस शीट पर गंभीर प्रभाव डाला है।

सिंगापुर एयरलाइंस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार लाभ में गिरावट की सबसे बड़ी वजह नवंबर 2024 में पूरा हुआ एयर इंडिया-विस्तारा विलय रही। पिछले वित्त वर्ष में इस विलय से समूह को 1.098 अरब सिंगापुर डॉलर का गैर-नकद लेखा लाभ प्राप्त हुआ था,जबकि इस बार ऐसा कोई लाभ नहीं मिला। इसके अलावा इस वर्ष एयर इंडिया के पूरे साल के घाटे को समूह की बैलेंस शीट में शामिल किया गया,जबकि पिछले वर्ष केवल चार महीनों का प्रभाव ही शामिल था।

कंपनी के अनुसार,पिछले वित्त वर्ष में सहयोगी कंपनियों से लाभ प्राप्त हुआ था,लेकिन इस बार स्थिति उलट गई। इस वर्ष सहयोगी इकाइयों से 846 मिलियन सिंगापुर डॉलर का नुकसान दर्ज किया गया,जिसकी मुख्य वजह एयर इंडिया का लगातार घाटे में रहना है। सिंगापुर एयरलाइंस ने हालाँकि,यह भी स्पष्ट किया कि वह एयर इंडिया में अपनी हिस्सेदारी को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे अपनी दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।

सिंगापुर एयरलाइंस ग्रुप का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है और एयर इंडिया में उसकी हिस्सेदारी उसे इस विशाल बाजार में मजबूत उपस्थिति प्रदान करती है। कंपनी के अनुसार,यह निवेश उसकी मल्टी-हब रणनीति का अहम हिस्सा है,जो सिंगापुर हब को और मजबूत करने के साथ भविष्य के विकास में भी मदद करेगा। कंपनी का मानना है कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से भारतीय विमानन बाजार में मौजूदगी उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

हालाँकि,एयर इंडिया के लिए पिछले कुछ महीने बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं। एयरलाइन को कई अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं,जिससे उसकी पुनरुद्धार योजनाओं को झटका लगा है। विशेष रूप से पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर एयरलाइन के संचालन पर पड़ा है। कई उड़ानों के रूट प्रभावित हुए हैं,जिससे यात्रा समय और परिचालन लागत दोनों में वृद्धि हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक विमानन उद्योग पर व्यापक असर डाला है। इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले कई अंतर्राष्ट्रीय मार्ग प्रभावित हुए हैं,जिसके कारण एयरलाइंस को वैकल्पिक और लंबे रूट अपनाने पड़ रहे हैं। इससे ईंधन की खपत बढ़ी है और परिचालन खर्च में भारी इजाफा हुआ है। एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस,जो पहले से वित्तीय दबाव में हैं,उनके लिए यह स्थिति और अधिक कठिन साबित हो रही है।

जेट ईंधन की बढ़ती कीमतें भी एयरलाइन उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। हाल के महीनों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण विमान ईंधन महँगा हुआ है। विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा ईंधन पर निर्भर करता है,इसलिए इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है।

नागर विमानन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार,अप्रैल महीने में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की हवाई यात्री संख्या में गिरावट दर्ज की गई। घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या अप्रैल में 140.8 लाख रही,जो सालाना और मासिक आधार पर लगभग 4 प्रतिशत कम है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय यातायात में मार्च की तुलना में 20 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली और यात्रियों की संख्या घटकर 28.3 लाख रह गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता,बढ़ती यात्रा लागत और भू-राजनीतिक तनाव के कारण यात्रियों की संख्या पर असर पड़ा है। कई यात्रियों ने विदेश यात्राएँ टाल दी हैं,जबकि कुछ मार्गों पर उड़ानों की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। इसका असर एयरलाइंस की आय पर पड़ रहा है।

एयर इंडिया पिछले कुछ वर्षों से अपने पुनर्गठन और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया से गुजर रही है। एयरलाइन ने नए विमानों के ऑर्डर,सेवा सुधार और नेटवर्क विस्तार जैसी कई योजनाओं की घोषणा की थी,लेकिन लगातार बढ़ती लागत,अंतर्राष्ट्रीय संकट और परिचालन चुनौतियों ने इन योजनाओं की गति को प्रभावित किया है।

इसके बावजूद कंपनी भविष्य को लेकर आशावादी बनी हुई है। एयर इंडिया का मानना है कि लंबी अवधि में भारतीय विमानन बाजार में विकास की अपार संभावनाएँ हैं। भारत में मध्यम वर्ग का विस्तार,बढ़ती आय और हवाई यात्रा की बढ़ती माँग विमानन क्षेत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वहीं सिंगापुर एयरलाइंस ने भी यह संकेत दिया है कि वह एयर इंडिया के साथ अपने रणनीतिक सहयोग को जारी रखेगी। कंपनी का मानना है कि वर्तमान चुनौतियाँ अस्थायी हैं और आने वाले वर्षों में भारतीय विमानन बाजार से उसे मजबूत लाभ मिल सकता है।

फिलहाल एयर इंडिया और सिंगापुर एयरलाइंस दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती लागत,कमजोर वैश्विक माँग और भू-राजनीतिक तनाव के बीच संतुलन बनाए रखने की है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एयर इंडिया अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने और परिचालन स्थिरता हासिल करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होता है और ईंधन की कीमतों में स्थिरता आती है,तो विमानन उद्योग धीरे-धीरे बेहतर स्थिति में लौट सकता है,लेकिन फिलहाल एयर इंडिया के सामने चुनौतियाँ काफी बड़ी दिखाई दे रही हैं और कंपनी को अपने पुनरुद्धार अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।