तिरुवनंतपुरम,15 मई (युआईटीवी)- वीडी सतीशन सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही राज्य में लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस पार्टी की सत्ता में वापसी होने जा रही है। केरल में आखिरी बार कांग्रेस का मुख्यमंत्री 2011 में ओमन चांडी के रूप में बना था। अब लगभग डेढ़ दशक बाद कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन ने राज्य की सत्ता में वापसी की है,जिसे पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
राजधानी तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं। बताया जा रहा है कि वीडी सतीशन के साथ पूरा मंत्रिमंडल भी शपथ ले सकता है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ के घटक दलों के बीच मंत्रिमंडल गठन को लेकर अंतिम दौर की बातचीत जारी है। गठबंधन में शामिल विभिन्न दलों के बीच मंत्रियों की संख्या और विभागों के बँटवारे पर मंथन चल रहा है।
कांग्रेस इस शपथ ग्रहण समारोह को केवल संवैधानिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखना चाहती,बल्कि इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि समारोह में लगभग एक लाख लोग शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस नेतृत्व इस आयोजन के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि केरल में पार्टी एक बार फिर मजबूत स्थिति में लौट आई है।
समारोह में मल्लिकार्जुन खड़गे,राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रह सकते हैं। सूत्रों के अनुसार,सिद्धारमैया और रेवंत रेड्डी समेत अन्य राज्यों के कांग्रेस शासित सरकारों के मुख्यमंत्री भी शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा ले सकते हैं।
हालिया विधानसभा चुनावों में यूडीएफ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस ने अकेले 63 सीटों पर जीत दर्ज की,जो राज्य की राजनीति में उसके मजबूत पुनरुत्थान का संकेत माना जा रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर गहन विचार-विमर्श शुरू हो गया था।
मुख्यमंत्री पद को लेकर दिल्ली और केरल के बीच लगभग दस दिनों तक लगातार बैठकों,बातचीत और राजनीतिक मंथन का दौर चलता रहा। पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा हुई और अलग-अलग गुटों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें जारी रहीं। इस दौरान कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले।
सूत्रों के अनुसार,निर्णायक दौर की बातचीत गुरुवार सुबह शुरू हुई,जब केसी वेणुगोपाल को दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर बुलाया गया। लगभग तीन घंटे तक चली इस बैठक में राज्य की राजनीतिक स्थिति और नेतृत्व चयन पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने इसी बैठक के दौरान संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व वीडी सतीशन के नाम पर आगे बढ़ने का फैसला कर चुका है।
सूत्रों के मुताबिक,प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पार्टी के भीतर सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न नेताओं से बातचीत कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि नेतृत्व चयन के बाद किसी प्रकार का बड़ा असंतोष सामने न आए। कांग्रेस नेतृत्व चाहता था कि मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा ऐसे समय में हो जब पार्टी पूरी तरह एकजुट दिखाई दे।
इसी बीच राहुल गांधी ने रमेश चेन्निथला से भी बातचीत की। रिपोर्टों के अनुसार,चेन्निथला इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। हालाँकि,पार्टी नेतृत्व ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और अंततः वीडी सतीशन के नाम पर सहमति बन गई।
इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में मुकुल वासनिक,अजय माकन,जयराम रमेश और दीपा दासमुंशी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसी बैठक में मुख्यमंत्री पद की घोषणा को अंतिम रूप दिया गया।
बाद में केसी वेणुगोपाल ने सार्वजनिक रूप से वीडी सतीशन के नाम की घोषणा की। इसके साथ ही कई दिनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता और अंदरूनी खींचतान पर विराम लग गया। पार्टी नेतृत्व ने इसे सामूहिक निर्णय बताते हुए कहा कि सतीशन के नेतृत्व में केरल में नई सरकार विकास,सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधारों पर काम करेगी।
वीडी सतीशन को कांग्रेस के भीतर एक मजबूत संगठनात्मक नेता के रूप में देखा जाता है। उन्होंने विपक्ष के नेता के रूप में राज्य सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर आक्रामक भूमिका निभाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी साफ छवि और जमीनी पकड़ ने उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को पूरा करने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की होगी। राज्य में बेरोजगारी,विकास,बुनियादी ढाँचे और वित्तीय चुनौतियाँ नई सरकार के सामने प्रमुख मुद्दे होंगे। वहीं कांग्रेस नेतृत्व इस जीत को दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक मजबूती के संकेत के रूप में भी देख रहा है।
सोमवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक नहीं होगा,बल्कि यह कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक पुनरुत्थान का संदेश भी माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि केरल में मिली यह सफलता राष्ट्रीय राजनीति में भी उसके लिए सकारात्मक संकेत साबित होगी।
