नई दिल्ली,15 मई (युआईटीवी)- नीट यूजी 2026 को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पुनर्परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। सरकार ने यह निर्णय पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद लिया है। शिक्षा मंत्री ने यह भी साफ किया कि सरकार परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस वर्ष हुई घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसलिए सरकार ने केवल पुनर्परीक्षा कराने का ही फैसला नहीं लिया,बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की भी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से नीट यूजी परीक्षा पारंपरिक ओएमआर आधारित प्रणाली के बजाय कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की जाएगी। सरकार का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा से पेपर लीक,नकल और अन्य गड़बड़ियों पर अधिक प्रभावी तरीके से नियंत्रण किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि नीट यूजी 2026 की परीक्षा तीन मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आने लगे। इसके बाद पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी चिंता का माहौल बन गया। कई जगहों पर प्रदर्शन हुए और परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए को सात मई तक अपने शिकायत और निगरानी तंत्र के जरिए परीक्षा में गड़बड़ियों की जानकारी मिलने लगी थी। इसके बाद आठ मई को यह मामला केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया। प्रारंभिक जाँच के दौरान यह सामने आया कि कुछ ऐसे प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र में शामिल थे,जो पहले से प्रसारित तथाकथित गेस पेपर से मिलते-जुलते थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि एनटीए और शिक्षा विभाग ने तुरंत प्रारंभिक जाँच शुरू की और बाद में मामला भारत सरकार की केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया। जाँच में यह भी सामने आया कि मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था,बल्कि दो से तीन राज्यों में संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले थे। इसी वजह से संबंधित राज्य सरकारों और एजेंसियों से भी संपर्क किया गया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आठ से 11 मई के बीच हुई जाँच के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुँची कि गेस पेपर के नाम पर वास्तविक प्रश्नों को बाहर पहुँचाया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि शिक्षा माफिया और असामाजिक तत्वों की वजह से मेहनती और ईमानदार छात्रों का भविष्य प्रभावित हो। इसलिए 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति ‘मालप्रैक्टिस के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ की है। उनके अनुसार,परीक्षा माफिया,तकनीक का दुरुपयोग करने वाले गिरोह और सोशल मीडिया के जरिए भ्रम फैलाने वाले तत्व आज शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि कई बार सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने की कोशिश की जाती है और यह दावा किया जाता है कि नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं को भी प्रभावित किया जा सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई है और एजेंसी विभिन्न पहलुओं की जाँच कर रही है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र किस प्रकार बाहर गया,किन लोगों की इसमें भूमिका थी और किस नेटवर्क के जरिए इसे फैलाया गया।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। कई छात्रों ने दोबारा परीक्षा कराने के फैसले का समर्थन किया,जबकि कुछ छात्रों ने मानसिक दबाव और दोबारा तैयारी की कठिनाइयों को लेकर चिंता जताई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों का भविष्य और उनकी मेहनत है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करके इस परीक्षा की तैयारी करते हैं और ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार किसी भी परिस्थिति में ईमानदार छात्रों के अधिकारों से समझौता नहीं करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीट यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गड़बड़ी का मामला केवल शिक्षा प्रणाली ही नहीं,बल्कि पूरे प्रशासनिक ढाँचे के लिए चुनौती बन जाता है। हर वर्ष लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएँ छात्रों के मनोबल को प्रभावित करती हैं और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर करती हैं।
सरकार द्वारा अगले वर्ष से कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने की घोषणा को भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार,कंप्यूटर आधारित परीक्षा से प्रश्नपत्र की सुरक्षा मजबूत की जा सकती है और पेपर लीक की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि इसके साथ तकनीकी ढाँचे,परीक्षा केंद्रों की तैयारी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आएँगी।
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को लागू करने से पहले विस्तृत तैयारी की जाएगी,ताकि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मंत्रालय यह सुनिश्चित करने की योजना बना रहा है कि परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी,सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत हो।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में बनी राधाकृष्णन समिति की कई सिफारिशों को लागू किया गया था,लेकिन इसके बावजूद इस प्रकार की घटना सामने आई। इसलिए अब और अधिक कठोर कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की गई है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में परीक्षा सुरक्षा को लेकर नए नियम और सख्त व्यवस्थाएँ लागू की जा सकती हैं।
वहीं दूसरी ओर परीक्षा रद्द होने और पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद छात्रों के बीच दोबारा तैयारी को लेकर दबाव बढ़ गया है। कई छात्र अब एक बार फिर अपनी तैयारी में जुट गए हैं। कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों का कहना है कि छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत रहना होगा और नई परीक्षा तिथि को अवसर के रूप में देखना चाहिए।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं का असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा रद्द होना छात्रों में तनाव और निराशा पैदा कर सकता है। इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका इस समय बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
देशभर में अब 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। सरकार और परीक्षा एजेंसियाँ इस बार सुरक्षा और निगरानी को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की बात कह रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नई परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सके।
फिलहाल पूरा देश इस महत्वपूर्ण परीक्षा पर नजर बनाए हुए है। लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह केवल एक परीक्षा नहीं,बल्कि भविष्य का सवाल है। ऐसे में सरकार पर निष्पक्ष परीक्षा कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का भारी दबाव बना हुआ है।
