नई दिल्ली, 15 मई (युआईटीवी)- देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। राहुल गांधी ने ईंधन कीमतों में हुई वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों की कीमत अब आम जनता को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “गलती सरकार की,कीमत जनता चुकाएगी। 3 रुपए का झटका आ चुका,बाकी वसूली किस्तों में की जाएगी।” उनके इस बयान को बढ़ती महँगाई और ईंधन कीमतों को लेकर सरकार पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि केंद्र सरकार अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का सही तरीके से सामना करने में विफल रही है,जिसका असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
ईंधन कीमतों में वृद्धि के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि देश इस समय केवल वैश्विक ईंधन संकट का सामना नहीं कर रहा,बल्कि भारत में आर्थिक संकट की एक बड़ी वजह नेतृत्व संकट,दूरदर्शिता की कमी और प्रशासनिक अक्षमता भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का बोझ अब आम जनता को उठाना पड़ रहा है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर साझा अपने संदेश में कहा कि यह संकट केवल अंतर्राष्ट्रीय हालात की वजह से नहीं आया,बल्कि सरकार की गलत नीतियों ने भी इसे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल,डीजल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। खड़गे के अनुसार,जब डीजल की कीमतें बढ़ती हैं,तो इसका प्रभाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहता,बल्कि उद्योगों,कृषि,घरेलू बजट और बाजार की कीमतों तक पहुँच जाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश में महँगाई पहले से ही लोगों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है और अब ईंधन कीमतों में वृद्धि से स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पश्चिम एशिया में शुरू हुए तनाव और युद्ध की स्थिति को लेकर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए। खड़गे ने कहा कि जब विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछे,तब उन्हें नजरअंदाज किया गया और जनता को यह संदेश दिया गया कि सब कुछ सामान्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा के मामलों में दूरदर्शिता नहीं दिखाई। खड़गे ने अमेरिकी प्रतिबंधों और रूसी तेल खरीद को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मार्च में रूस से तेल खरीद को लेकर जो 30 दिन की छूट दी गई थी,उसमें अमेरिका द्वारा ‘अनुमति’ और ‘इजाजत’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया,जो भारत की संप्रभुता के लिहाज से चिंताजनक है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि आखिर भारत सरकार ऐसी स्थिति में क्यों पहुँचीं,जहाँ उसे ऊर्जा जरूरतों के लिए बाहरी देशों से अनुमति माँगने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को समय रहते वैकल्पिक रणनीति तैयार करनी चाहिए थी,ताकि वैश्विक संकट का असर भारत की जनता पर कम पड़े।
खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं,तब केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत नहीं दी। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने ईंधन पर टैक्स के जरिए लगभग 43 लाख करोड़ रुपये की कमाई की,लेकिन उसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया गया। उन्होंने पूछा कि जब तेल सस्ता था,तब जनता को राहत क्यों नहीं दी गई और अब संकट के समय पूरा बोझ लोगों पर क्यों डाला जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं के बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्ष लगातार यह मुद्दा उठा रहा है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर महँगाई को बढ़ावा देंगी। पेट्रोल और डीजल के महँगे होने से परिवहन लागत बढ़ती है,जिसका असर खाद्य पदार्थों,रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ाया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है,इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के घरेलू बाजार पर पड़ता है।
हालाँकि,केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण तेल कंपनियों पर भारी दबाव पड़ा है और उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकार और तेल कंपनियों का तर्क है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की जाती,तो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर वित्तीय संकट और गहरा सकता था।
इस बीच विपक्ष सरकार से टैक्स में कटौती और आम जनता को राहत देने की माँग कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार को एक्साइज ड्यूटी कम करनी चाहिए,ताकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि बढ़ती महँगाई से मध्यम वर्ग,किसान,छोटे व्यापारी और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
देश में ईंधन कीमतों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आम जनता की चिंता लगातार बढ़ रही है। कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी हैं। इसके साथ ही रसोई गैस और परिवहन लागत बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है,तो राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार महँगाई और ईंधन संकट से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।
