ट्विशा शर्मा मौत मामला में गिरिबाला सिंह की कॉल लिस्ट जारी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ट्विशा शर्मा मौत मामला: कॉल रिकॉर्ड्स से बढ़े सवाल,प्रभावशाली लोगों से संपर्क के आरोपों ने जाँच को घेरा

नई द‍िल्‍ली,22 मई (युआईटीवी)- भोपाल की मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। इस मामले में अब एक नया मोड़ तब आया जब ट्विशा शर्मा के वकील ने उन मोबाइल नंबरों और संपर्कों की सूची सार्वजनिक की,जिनसे कथित तौर पर भोपाल की सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह ने अपनी बहू की मौत के बाद संपर्क किया था। इन खुलासों के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है तथा जाँच की निष्पक्षता को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। ट्विशा शर्मा के परिवार और उनकी कानूनी टीम ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों के संपर्क और कथित हस्तक्षेप ने इस पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।

बताया जा रहा है कि यह सूची उन दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है,जिन्हें अदालत में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की ओर से पेश किया गया था। समर्थ सिंह इस मामले में सह आरोपी हैं और फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। ट्विशा शर्मा के वकील का दावा है कि 12 मई से 14 मई के बीच कई वरिष्ठ अधिकारी,डॉक्टर,न्यायपालिका से जुड़े लोग और सीसीटीवी संचालन से जुड़े व्यक्तियों का आरोपी पक्ष से लगातार संपर्क बना हुआ था। इन दावों ने पूरे मामले को केवल एक पारिवारिक विवाद या दहेज हत्या के आरोप तक सीमित नहीं रहने दिया,बल्कि अब यह मामला प्रशासनिक और कानूनी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

ट्विशा शर्मा की कानूनी टीम ने एक बयान जारी कर कहा कि जहाँ एक ओर मृतका का परिवार न्याय की उम्मीद में संघर्ष कर रहा था,वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष को व्यवस्था के विभिन्न प्रभावशाली वर्गों का समर्थन मिलता दिखाई दिया। बयान में कहा गया कि घटना के तुरंत बाद आरोपी पक्ष के संपर्क में कई वरिष्ठ लोग रहे,जिससे यह आशंका पैदा होती है कि जांच की दिशा प्रभावित करने की कोशिश की गई हो सकती है।

वकील ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका से जुड़े कुछ सदस्य,पुलिस अधिकारी,डॉक्टर और अन्य प्रभावशाली लोग लगातार आरोपी पक्ष के संपर्क में थे। कानूनी टीम के अनुसार,यह बेहद गंभीर विषय है क्योंकि किसी भी संवेदनशील मामले में शुरुआती जाँच सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि उसी दौरान प्रभावशाली लोगों के बीच लगातार बातचीत हुई हो,तो इससे निष्पक्ष जाँच पर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।

जारी की गई सूची में जिन लोगों के नाम होने का दावा किया गया है,उनमें आईएएस अधिकारी मनु श्रीवास्तव,लोकायुक्त न्यायमूर्ति सत्येंद्र कुमार सिंह,डॉक्टर राजबाला सिंह भदौरिया तथा सीसीटीवी संचालन से जुड़े रोहित विश्वकर्मा और विनोद वाणी शामिल बताए जा रहे हैं। हालाँकि,इन नामों के सामने आने के बाद अब तक संबंधित व्यक्तियों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर ट्विशा शर्मा के परिवार ने माँग की है कि इन सभी संपर्कों की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत के बाद किन परिस्थितियों में बातचीत की गई थी।

मामले में कटारा हिल्स पुलिस थाने की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। ट्विशा शर्मा के वकील ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी सहित कई अधिकारी घटना के बाद आरोपी पक्ष के संपर्क में थे। हालाँकि,पुलिस ने अब तक इन आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जवाब नहीं दिया है। पुलिस का कहना है कि जाँच नियमानुसार की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है।

33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की 12 मई की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ट्विशा पेशे से मॉडल और अभिनेत्री थीं और उनकी शादी कुछ महीने पहले ही समर्थ सिंह से हुई थी। शुरुआती पुलिस जाँच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया,लेकिन ट्विशा के परिवार ने इस दावे को खारिज करते हुए हत्या का आरोप लगाया। परिवार का कहना है कि ट्विशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था और उनकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई।

ट्विशा शर्मा के परिवार ने दूसरे पोस्टमार्टम की माँग की थी और दावा किया था कि पहली जाँच पूरी तरह निष्पक्ष नहीं थी। कानूनी टीम के अनुसार परिवार अभी भी भोपाल स्थित एम्स में शव के दूसरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहा है। परिवार का आरोप है कि मामले को आत्महत्या बताकर जल्दबाजी में बंद करने की कोशिश की गई।

इस बीच,दहेज हत्या मामले में आरोपी गिरिबाला सिंह को 15 मई को अंतरिम जमानत मिल गई। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर राहत दी। जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने अदालत में एक नई याचिका दायर की,जिसमें उन्होंने मीडिया में वायरल हो रही ऑडियो क्लिप और व्हाट्सएप चैट को फर्जी बताया है। उन्होंने दावा किया कि इन डिजिटल सामग्रियों के जरिए उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

गिरिबाला सिंह ने अदालत से माँग की है कि ऑडियो क्लिप और चैट के मूल स्रोत की न्यायिक निगरानी में जाँच कराई जाए। उनका कहना है कि जब तक इन सामग्रियों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो जाती,तब तक इन्हें सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर यानी डीवीआर को जब्त करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं।

याचिका में कहा गया है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को जब्त करते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और इससे रिकॉर्डिंग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। गिरिबाला सिंह ने अदालत से माँग की है कि डीवीआर की दोबारा जाँच कराई जाए और सीलबंद रिकॉर्डिंग का नए सिरे से सत्यापन कराया जाए। इस माँग के बाद अब डिजिटल सबूत भी जाँच के केंद्र में आ गए हैं।

दूसरी ओर समर्थ सिंह अब भी फरार हैं। पेशे से वकील समर्थ सिंह की गिरफ्तारी नहीं हो पाने को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। ट्विशा शर्मा के परिवार का आरोप है कि यदि पुलिस चाहती,तो अब तक उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता था। परिवार का कहना है कि आरोपी पक्ष के प्रभावशाली संपर्कों के कारण कार्रवाई धीमी पड़ गई है। हालाँकि,पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समर्थ सिंह की तलाश जारी है और उन्हें पकड़ने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं।

मामले में एक और विवाद तब खड़ा हुआ,जब गिरिबाला सिंह ने ट्विशा शर्मा पर नशीले पदार्थों का सेवन करने और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने का आरोप लगाया। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नशीले पदार्थों के सेवन का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं और कई लोगों ने मृतका की छवि खराब करने की कोशिश का आरोप लगाया।

ट्विशा शर्मा की मौत ने मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा,दहेज प्रताड़ना और प्रभावशाली लोगों के कथित दबाव जैसे मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग निष्पक्ष जाँच और त्वरित न्याय की माँग कर रहे हैं। कई महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले में स्वतंत्र जाँच की माँग उठाई है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है और जाँच के दौरान प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आती है,तो यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल बन सकता है। ऐसे मामलों में जाँच एजेंसियों पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव और बढ़ जाता है।

फिलहाल पूरे मामले की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में अदालत में कई महत्वपूर्ण सुनवाई होने की संभावना है। परिवार को उम्मीद है कि दूसरे पोस्टमार्टम और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच से सच्चाई सामने आएगी। वहीं आरोपी पक्ष लगातार खुद को निर्दोष बता रहा है। इस बीच ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा रहस्य हर नए खुलासे के साथ और गहराता जा रहा है,जबकि पूरा देश अब इस मामले में निष्पक्ष जाँच और न्याय की दिशा में उठाए जाने वाले अगले कदमों पर नजर बनाए हुए है।