बेंगलुरु,28 मई (युआईटीवी)- कर्नाटक की राजनीति इन दिनों जबरदस्त हलचल और अटकलों के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के संभावित इस्तीफे और राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास ‘कावेरी’ में हुई एक अहम मुलाकात ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। उपमुख्यमंत्री और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार कई कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने पहुँचे। इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो गईं।
सुबह हुई इस मुलाकात के दौरान सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच आत्मीयता का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री का अभिवादन करने के बाद डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और उन्हें गले लगाया। यह दृश्य राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि पिछले कई दिनों से राज्य में यह चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की तैयारी कर रहा है।
मुलाकात की तस्वीरें सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों के कार्यालयों की ओर से जारी की गईं। तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच सौहार्द और निकटता दिखाने की कोशिश साफ नजर आई। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इन तस्वीरों को जानबूझकर सार्वजनिक किया गया,ताकि पार्टी के भीतर एकता और तालमेल का संदेश दिया जा सके। खासकर ऐसे समय में,जब मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान और संभावित बदलाव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
कर्नाटक कांग्रेस ने भी इस मुलाकात की तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। पार्टी ने पोस्ट में लिखा कि “वह दिन, आज का दिन और सदा के लिए… एकता ही हमारी शक्ति है। जनसेवा ही हमारी शाश्वत प्रतिबद्धता है।” इस संदेश को पार्टी नेतृत्व की ओर से एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि चाहे राजनीतिक अटकलें कितनी भी तेज क्यों न हों,पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच कोई मतभेद नहीं है।
इस बैठक में केवल डीके शिवकुमार ही नहीं,बल्कि कई कैबिनेट मंत्री और सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले विधायक भी शामिल हुए। इससे यह साफ संकेत मिला कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रही हलचल केवल अफवाहों तक सीमित नहीं है,बल्कि पार्टी के अंदर गंभीर राजनीतिक मंथन जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आने वाले दिनों के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की भूमिका हो सकती है।
राज्य में पिछले कुछ समय से यह चर्चा लगातार चल रही है कि कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के विकल्प पर विचार कर रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबे समय तक खींचतान चली थी। उस समय पार्टी आलाकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर संतुलन बनाने की कोशिश की थी। हालाँकि,तब से ही यह अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं कि सत्ता साझा करने के किसी फार्मूले पर अंदरूनी सहमति बनी थी।
इसी पृष्ठभूमि में गुरुवार की यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जाता है और उनके समर्थक लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन की माँग करते रहे हैं। हालाँकि,कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अब तक आधिकारिक रूप से किसी भी बदलाव की पुष्टि नहीं की है।
बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि सिद्धारमैया मीडिया से बातचीत कर संभावित इस्तीफे और भविष्य के नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर स्थिति स्पष्ट करेंगे। हालाँकि,दोपहर तक राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस बना रहा और हर किसी की नजर मुख्यमंत्री आवास तथा राजभवन की गतिविधियों पर टिकी रही।
इस बीच राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने भी पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर चल रही बैठकों और राजनीतिक चर्चाओं की ज्यादा जानकारी नहीं है। सिद्धारमैया के संभावित इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह पार्टी आलाकमान के हाथ में है। जब उनसे पूछा गया कि अगर सिद्धारमैया को हटाया गया तो क्या इससे दलितों और पिछड़े वर्गों में गलत संदेश जाएगा,तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए कि आगे क्या होता है।
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा उस खबर को लेकर हो रही है,जिसमें कहा गया कि कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत बेंगलुरु से बाहर चले गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा देने वाले हैं तो राज्यपाल की अनुपस्थिति का क्या असर पड़ेगा। हालाँकि,कांग्रेस सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इससे इस्तीफे की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और तय कार्यक्रम के अनुसार ही सभी घटनाक्रम आगे बढ़ेंगे।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सिद्धारमैया को निर्देश दिया गया था कि वह निर्धारित समय के अनुसार अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय में सौंप दें,भले ही राज्यपाल शहर में मौजूद न हों। इससे यह संकेत मिला कि पार्टी नेतृत्व पूरे मामले को लेकर गंभीरता से काम कर रहा है और घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है।
हालाँकि,कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में सत्ता साझा करने के किसी भी फार्मूले की खबरों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री बदलने को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है और मीडिया में चल रही कई बातें केवल अटकलें हैं।
इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही राज्य की राजनीति के बड़े चेहरे हैं और दोनों के समर्थकों के बीच लंबे समय से नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। कांग्रेस आलाकमान अब तक संतुलन बनाकर चलने की कोशिश करता रहा है,लेकिन बदलते राजनीतिक हालात में नेतृत्व परिवर्तन का सवाल फिर से चर्चा में आ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस के लिए कर्नाटक बेहद महत्वपूर्ण राज्य है,क्योंकि दक्षिण भारत में यह पार्टी का सबसे बड़ा मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी फैसले को लेकर काफी सावधानी बरतना चाहता है। अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है तो उसका असर केवल कर्नाटक की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके राजनीतिक संदेश निकाले जाएंगे।
फिलहाल कर्नाटक में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मुलाकात ने यह जरूर संकेत दिया है कि कांग्रेस नेतृत्व अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उभरने नहीं देना चाहता,लेकिन आने वाले दिनों में पार्टी आलाकमान क्या फैसला लेता है,इस पर पूरे राज्य की राजनीति की दिशा निर्भर करेगी।
कर्नाटक की जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षक अब अगले घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं। सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सिद्धारमैया वास्तव में इस्तीफा देंगे,क्या डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिलेगी या फिर कांग्रेस नेतृत्व मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखने का फैसला करेगा। फिलहाल राज्य की राजनीति में सस्पेंस और चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।
