संयुक्त राष्ट्र,9 जून (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद और भारत विरोधी प्रचार के मुद्दे पर घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए संगठित तरीके से भारत विरोधी माहौल तैयार कर रहा है। भारतीय प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था और सुरक्षा प्रतिष्ठान अपने नागरिकों के मन में भारत के प्रति नफरत पैदा कर सत्ता और संसाधनों पर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों पर आयोजित चर्चा के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसकी नीतियों और गतिविधियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों को अपनी असफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराना पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब इस तरह के दुष्प्रचार से अच्छी तरह परिचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया को गुमराह करने की पाकिस्तान की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान में एक सुनियोजित प्रचार तंत्र काम कर रहा है,जो धार्मिक शब्दावली और भावनात्मक नारों का इस्तेमाल करके लोगों को भ्रमित करता है। उन्होंने विशेष रूप से उन समूहों का उल्लेख किया,जिन्हें पाकिस्तान के भीतर “फितना अल हिंदुस्तान” जैसे नामों से संबोधित किया जाता है। भारत का कहना है कि इस तरह की शब्दावली का उपयोग केवल धार्मिक भावनाओं को भड़काने और लोगों के बीच विभाजन पैदा करने के उद्देश्य से किया जाता है।
पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान देश के भीतर मौजूद गंभीर राजनीतिक,आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी माहौल तैयार करते हैं। उनके अनुसार,पाकिस्तान की तथाकथित “डीप स्टेट” लगातार भारत के खिलाफ नफरत फैलाकर अपनी राजनीतिक भूमिका और प्रभाव को बनाए रखने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि यह रणनीति नई नहीं है,बल्कि वर्षों से अपनाई जाती रही है।
भारत ने अपने वक्तव्य में पाकिस्तान के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान में सेना का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हाल के संवैधानिक बदलाव इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष किए गए 27वें संवैधानिक संशोधन ने सेना की भूमिका को और अधिक मजबूत किया है,जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उसका प्रभाव बढ़ा है। भारत के अनुसार,यह स्थिति दर्शाती है कि पाकिस्तान में सत्ता के वास्तविक केंद्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच असंतुलन लगातार गहराता जा रहा है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि किसी भी देश के लिए यह आवश्यक है कि वह अपनी आंतरिक चुनौतियों का समाधान स्वयं तलाशे,लेकिन पाकिस्तान बार-बार अपनी समस्याओं का दोष पड़ोसी देशों पर मढ़ने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रणनीति न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नुकसानदेह है,बल्कि इससे आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसी समस्याओं को भी बढ़ावा मिलता है।
अफगानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा के दौरान भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया। भारत ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंड नहीं अपनाने चाहिए और सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ समान रूप से कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं है,बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है।
भारत ने अपने वक्तव्य में कई अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों का नाम लेते हुए कहा कि इनके खिलाफ समन्वित और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। भारत ने इस्लामिक स्टेट, अलकायदा,लश्कर-ए-तैयबा,जैश-ए-मोहम्मद और उनसे जुड़े अन्य संगठनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संगठन क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। भारत का मानना है कि इन संगठनों के खिलाफ केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा,बल्कि ठोस और समन्वित कदम उठाने होंगे।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवादी नेटवर्क सीमाओं से बंधे नहीं होते और वे विभिन्न देशों में फैले संसाधनों,वित्तीय सहायता तथा प्रचार तंत्र का उपयोग करते हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी सफल हो सकती है,जब सभी देश बिना किसी राजनीतिक या रणनीतिक भेदभाव के एक समान दृष्टिकोण अपनाएँ।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है,जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा संबंधी मुद्दे एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। क्षेत्र में सीमा-पार आतंकवाद,कट्टरपंथ और चरमपंथी गतिविधियों को लेकर कई देशों ने चिंता व्यक्त की है। भारत लंबे समय से यह मुद्दा उठाता रहा है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन या संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे महत्वपूर्ण मंच पर भारत का यह वक्तव्य केवल पाकिस्तान की आलोचना तक सीमित नहीं है,बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है। भारत लगातार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि आतंकवाद और कट्टरपंथ के मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर स्पष्ट और सुसंगत नीति अपनाने की आवश्यकता है।
भारत ने अपने संबोधन में यह भी संकेत दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा एजेंसियों या सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन विचारधाराओं और प्रचार तंत्रों पर भी ध्यान देना होगा,जो नफरत,कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देते हैं। भारत का कहना है कि यदि ऐसे तंत्रों को समय रहते नहीं रोका गया,तो वे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के इस कड़े रुख को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद,नफरत फैलाने वाले प्रचार और धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के खिलाफ वैश्विक समुदाय को एकजुट होना होगा। भारत का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता,शांति और विकास के लिए यह आवश्यक है कि सभी देश जिम्मेदार रवैया अपनाएँ और आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करें।
