तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी हलचल, 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज सामने आने से तेज हुई अटकलें (तस्वीर क्रेडिट@AvinashKS14)

तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी हलचल,19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज सामने आने से तेज हुई अटकलें

कोलकाता,12 जून (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान और संभावित गुटबाजी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। शुक्रवार को पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इन दस्तावेजों में यह दावा किया गया है कि हस्ताक्षर करने वाले सांसद लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधित्व का मुख्य और बहुमत वाला समूह हैं। हालाँकि,इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है,लेकिन इनके सार्वजनिक होने के बाद पार्टी के भीतर संभावित असंतोष और शक्ति संतुलन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार,इन तीन पन्नों को उस कथित पत्र का हिस्सा माना जा रहा है,जिसे कुछ सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में सौंपा था। हालाँकि,यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सामने आए दस्तावेज वास्तव में उसी पत्र के अंतिम पृष्ठ हैं या नहीं। इस विषय पर लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है,जिससे पूरे मामले को लेकर रहस्य और गहरा गया है।

सामने आए दस्तावेजों में सबसे पहला हस्ताक्षर बारासात से चार बार की लोकसभा सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार का दिखाई दे रहा है। उनके बाद दूसरा हस्ताक्षर बीरभूम से चार बार की सांसद और अभिनेत्री से राजनेता बनीं शताब्दी रॉय का है। इन दोनों नेताओं को तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है और उनके हस्ताक्षरों की मौजूदगी ने दस्तावेजों को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।

इन दोनों सांसदों के अलावा दस्तावेजों में कुल 19 सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। इनमें मथुरापुर से बापी हलदार,बर्दवान पूर्व से शर्मिला सरकार,हावड़ा से प्रसून बनर्जी,कूचबिहार से जगदीश वर्मा बसुनिया,बोलपुर से असित मल,बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती,झाड़ग्राम से कालीपद सोरेन,घाटल से दीपक अधिकारी,जिन्हें देव के नाम से भी जाना जाता है,मेदिनीपुर से जून मालिया,बैरकपुर से पार्थ भौमिक,जंगीपुर से खलीलुर रहमान,मुर्शिदाबाद से अबू ताहेर खान,बहरामपुर से यूसुफ पठान,आरामबाग से मिताली बाग,कोलकाता दक्षिण से माला रॉय,हुगली से रचना बनर्जी और जादवपुर से सायनी घोष के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

दस्तावेजों में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि रचना बनर्जी और सायनी घोष के हस्ताक्षर अन्य सांसदों की तुलना में अलग स्थान पर दिखाई दे रहे हैं। हस्ताक्षरों का क्रम भी बाकी नामों से मेल नहीं खाता। इस बात ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालाँकि,इस संबंध में एक ऐसे सांसद के करीबी सूत्रों ने दावा किया है,जिन्हें कथित तौर पर इस समूह का हिस्सा माना जा रहा है,कि रचना बनर्जी और सायनी घोष ने बाद में इस पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसी कारण उनके हस्ताक्षर अलग स्थान पर दर्ज किए गए।

फिलहाल इन तीन पन्नों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो सकी है। न तो दस्तावेजों को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित किया गया है और न ही किसी स्वतंत्र एजेंसी ने इनके वास्तविक होने की पुष्टि की है। इसके बावजूद इन दस्तावेजों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि जिन 19 सांसदों के नाम इस दस्तावेज में बताए जा रहे हैं, उनमें से किसी ने भी अब तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। न तो किसी सांसद ने इन दस्तावेजों का समर्थन किया है और न ही उनका खंडन किया है। इस चुप्पी ने मामले को और अधिक जटिल बना दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि दस्तावेज वास्तविक हैं,तो सांसदों की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया का इंतजार किया जाएगा,क्योंकि इससे पार्टी के भीतर की स्थिति पर अधिक प्रकाश पड़ सकता है।

लोकसभा में वर्तमान समय में तृणमूल कांग्रेस के कुल 27 सांसद हैं। ऐसे में यदि 19 सांसद वास्तव में किसी साझा दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर यह दावा कर रहे हैं कि वे पार्टी के बहुमत वाले समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं,तो इसका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है। हालाँकि,अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित पत्र का उद्देश्य क्या था और इसे किस संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को सौंपा गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल संसदीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसका प्रभाव तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक संगठनात्मक ढाँचे पर भी पड़ सकता है। यदि पार्टी के भीतर किसी प्रकार का मतभेद या असंतोष मौजूद है,तो ऐसे दस्तावेज उन संकेतों को और मजबूत कर सकते हैं। वहीं यदि यह केवल किसी विशेष प्रशासनिक या संसदीय प्रक्रिया से जुड़ा मामला है,तो पार्टी नेतृत्व की ओर से जल्द स्पष्टीकरण आने की संभावना भी जताई जा रही है।

इस बीच पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तृणमूल कांग्रेस अभी इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचती दिखाई दे रही है। यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है और विभिन्न तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या पहले 28 थी,लेकिन सितंबर 2024 में बशीरहाट से सांसद हाजी शेख नूरुल इस्लाम के निधन के बाद यह संख्या घटकर 27 रह गई थी। वह चुनाव जीतने के कुछ ही महीनों बाद चल बसे थे,जिसके बाद यह सीट खाली हो गई। वर्तमान स्थिति में पार्टी के लिए लोकसभा में अपने सांसदों की एकजुटता बनाए रखना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सामने आए दस्तावेजों की वास्तविकता क्या है और उनका उद्देश्य क्या था। जब तक लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व या संबंधित सांसदों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता,तब तक यह मामला राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों का विषय बना रहेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता आने की संभावना है,जिससे यह तय हो सकेगा कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है।