भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब (तस्वीर क्रेडिट@DDNewsOdia)

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत को बताया ‘प्रभावशाली देश’, वैश्विक मुद्दों पर नई दिल्ली की भूमिका को बताया अहम

हेलसिंकी,12 जून (युआईटीवी)- भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके प्रभाव को एक बार फिर प्रमुख मान्यता मिली है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत को दुनिया का एक “प्रभावशाली देश” बताते हुए कहा है कि वैश्विक चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय संकटों के दौर में नई दिल्ली की राय को सुनना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह टिप्पणी हेलसिंकी में आयोजित प्रतिष्ठित ‘कुलतारना टॉक्स’ कार्यक्रम के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई मुलाकात के बाद की।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है,जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव,रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहा दबाव और बदलते अंतर्राष्ट्रीय शक्ति संतुलन जैसे मुद्दे विश्व राजनीति के केंद्र में हैं। ऐसे माहौल में भारत की भूमिका और उसकी विदेश नीति को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

मुलाकात के बाद फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ कई महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बातचीत में मध्य पूर्व और फारस की खाड़ी की मौजूदा स्थिति,रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों तथा आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन से जुड़े विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे।

स्टब ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में से एक है और वैश्विक मामलों में उसकी राय को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है,जब भारत अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति के कारण एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है। विभिन्न वैश्विक संकटों पर भारत का रुख अक्सर कई देशों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बनता रहा है।

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान समय में कूटनीति की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और कई क्षेत्रों में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में संवाद,सहयोग और कूटनीतिक प्रयास ही स्थायी समाधान का रास्ता दिखा सकते हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस मुलाकात को सकारात्मक और उपयोगी बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि कुलतारना वार्ता के अवसर पर फिनलैंड के राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने बदलते वैश्विक परिदृश्य पर विचारों का आदान-प्रदान किया और इस बात पर सहमति जताई कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय माहौल में कूटनीति का महत्व और बढ़ गया है।

जयशंकर ने कहा कि भारत और फिनलैंड अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल तकनीक,नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में तकनीकी सहयोग और हरित विकास की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

भारत और फिनलैंड के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश डिजिटल परिवर्तन,स्वच्छ प्रौद्योगिकी,शिक्षा,नवाचार और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। फिनलैंड तकनीकी नवाचार और डिजिटल समाधानों के लिए जाना जाता है,जबकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

अपने फिनलैंड दौरे के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने अन्य अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ भी महत्वपूर्ण चर्चाओं में भाग लिया। उन्होंने फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन और संयुक्त अरब अमीरात की विदेश राज्य मंत्री लाना नुसेबेह के साथ “उभरती शक्तियाँ और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा” विषय पर आयोजित एक विशेष चर्चा में हिस्सा लिया।

इस चर्चा के दौरान जयशंकर ने वैश्विक संघर्षों के व्यापक प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में होने वाला संघर्ष अब केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। आधुनिक वैश्विक व्यवस्था में किसी भी युद्ध,संकट या राजनीतिक अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। ऊर्जा बाजार,व्यापार,आपूर्ति श्रृंखलाएँ और खाद्य सुरक्षा जैसी कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएँ इन संघर्षों से प्रभावित होती हैं।

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे संघर्षों के प्रभाव को कम करने के लिए मिलकर प्रयास करे। जयशंकर के अनुसार,संवाद और कूटनीतिक समाधान ही स्थायी शांति का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि टकराव की बजाय बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विदेश मंत्री ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दुनिया ने देखा है कि किसी एक क्षेत्र या स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता कितनी बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए आवश्यक है कि वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत,लचीला और विविध बनाया जाए,ताकि किसी भी संकट की स्थिति में आर्थिक गतिविधियाँ बाधित न हों।

ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर जयशंकर ने भारत की नीति को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध और किफायती स्रोतों से ऊर्जा खरीदता है। उन्होंने संकेत दिया कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और भारत इसी सिद्धांत के आधार पर अपने निर्णय लेता है।

उन्होंने खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ भारत के संबंधों का भी विशेष उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा कि भारत और खाड़ी देशों के बीच संबंध केवल आर्थिक या ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं हैं,बल्कि इनकी नींव लोगों के बीच मजबूत संपर्क,सांस्कृतिक रिश्तों और लंबे समय से चले आ रहे सहयोग पर आधारित है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र के अलावा रणनीतिक,सुरक्षा और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में भी भारत और खाड़ी देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि फिनलैंड के राष्ट्रपति द्वारा भारत को एक प्रभावशाली देश के रूप में वर्णित किया जाना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का संकेत है। वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उसकी भागीदारी को गंभीरता से देखा जा रहा है।

हेलसिंकी में हुई यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसने यह भी दिखाया कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की आवाज को कितना महत्व दिया जा रहा है। आने वाले समय में भारत और फिनलैंड के बीच रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है,वहीं वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच समन्वय और संवाद भी और मजबूत हो सकता है।