अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

क्यूबा की सरकारी तेल कंपनी पर अमेरिका का बड़ा प्रहार,ट्रंप प्रशासन ने लगाए नए प्रतिबंध

वॉशिंगटन,12 जून (युआईटीवी)- अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। अमेरिकी प्रशासन ने क्यूबा की सरकारी तेल और गैस कंपनी यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका का आरोप है कि क्यूबा की सरकार ऊर्जा संसाधनों का उपयोग देश के नागरिकों की भलाई के बजाय सत्ता को मजबूत करने,विरोध को दबाने और शीर्ष नेतृत्व के हितों की रक्षा करने के लिए कर रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश 14404 के तहत यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो को प्रतिबंधित संस्था घोषित किया गया है। इस फैसले के साथ ही कंपनी की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियाँ और आर्थिक हित फ्रीज कर दिए जाएंगे। इसके अलावा,अमेरिकी नागरिकों या अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था को इस कंपनी के साथ लेन-देन करने से पहले विशेष अनुमति प्राप्त करनी होगी।

प्रतिबंधों के तहत यह भी प्रावधान किया गया है कि कंपनी से संबंधित किसी भी प्रकार की संपत्ति या आर्थिक हित की जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय को दी जाएगी। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस कदम से क्यूबा सरकार की आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ेगा और उसे अपनी नीतियों में बदलाव के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

मार्को रुबियो ने क्यूबा की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वहाँ की कम्युनिस्ट व्यवस्था लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र का उपयोग राजनीतिक नियंत्रण और भ्रष्टाचार के साधन के रूप में करती रही है। उन्होंने कहा कि दशकों से ऊर्जा अवसंरचना में पर्याप्त निवेश नहीं किया गया,जिसके कारण आम नागरिक लगातार बिजली कटौती,ईंधन संकट और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके विपरीत,सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को ऊर्जा संसाधनों का लाभ प्राथमिकता के आधार पर मिलता रहा है।

रुबियो ने कहा कि क्यूबा की सरकार ने कई बार ऐसे निर्णय लिए जिनसे आम जनता की परेशानियाँ बढ़ीं। उनके अनुसार,देश में ईंधन की कमी के बावजूद तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों को बाहरी बाजारों में बेचा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए ईंधन का विशेष भंडारण किया,जबकि आम नागरिक आवश्यक जरूरतों के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऊर्जा आपूर्ति को सामाजिक नियंत्रण के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया,जिससे सरकार अपने विरोधियों और आम लोगों पर प्रभाव बनाए रख सके।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपने बयान में क्यूबा के आम नागरिकों और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच कथित असमानता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जहाँ आम क्यूबाई नागरिक अपनी गाड़ियों में ईंधन भरवाने के लिए कई-कई सप्ताह तक इंतजार करने को मजबूर हैं और बार-बार बिजली संकट झेल रहे हैं,वहीं देश का शीर्ष नेतृत्व विशेष सुविधाओं का आनंद ले रहा है। रुबियो ने दावा किया कि कास्त्रो परिवार निजी विमानों से यात्रा करता है और सरकार पर्यटन उद्योग से जुड़े लक्जरी होटलों को प्राथमिकता के आधार पर बिजली उपलब्ध कराती है,जबकि आम लोगों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ता है।

अमेरिका ने यह आरोप भी लगाया कि यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो की कुछ महत्वपूर्ण संपत्तियाँ वर्षों पहले अमेरिकी मालिकों से अवैध रूप से अधिग्रहित की गई थीं। रुबियो ने कहा कि यह मामला केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है,बल्कि संपत्ति अधिकारों और न्याय के प्रश्न से भी जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार,अमेरिकी प्रशासन ऐसे मामलों को गंभीरता से देखता है और उन संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करता है जो कथित रूप से अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों का उपयोग कर रही हैं।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल आर्थिक दंड देना नहीं है,बल्कि क्यूबा की सरकार को अपने व्यवहार और नीतियों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना भी है। अमेरिका का दावा है कि यदि क्यूबा सरकार लोकतांत्रिक सुधारों, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों के सम्मान की दिशा में कदम उठाती है,तो भविष्य में संबंधों में सुधार की संभावनाएँ बन सकती हैं।

नए प्रतिबंधों के तहत यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो के साथ किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या वित्तीय लेन-देन प्रतिबंधित रहेगा,जब तक कि विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय से विशेष अनुमति प्राप्त न हो। इसका असर केवल अमेरिकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि उन विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर भी पड़ सकता है,जो इस कंपनी या क्यूबा की प्रतिबंधित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विदेशी व्यक्ति,कंपनी या बैंक प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखता है,तो उसे भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा कारोबार से जुड़ी कंपनियों के लिए विशेष महत्व रखती है,क्योंकि अमेरिका की आर्थिक शक्ति और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में उसकी भूमिका को देखते हुए ऐसे प्रतिबंधों का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की उस व्यापक नीति का हिस्सा है,जिसके तहत वह क्यूबा पर आर्थिक दबाव बनाए रखना चाहता है। पिछले छह दशकों से अधिक समय से अमेरिका क्यूबा पर विभिन्न प्रकार के आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लागू किए हुए है। यह दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले प्रतिबंध कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य अलग-अलग समय पर बदलता रहा है,लेकिन मूल रूप से अमेरिका ने इन्हें क्यूबा की राजनीतिक और आर्थिक नीतियों को प्रभावित करने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया है।

दूसरी ओर,क्यूबा लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताता रहा है। क्यूबा का दावा है कि इन प्रतिबंधों के कारण उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है और आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। क्यूबा सरकार का यह भी कहना रहा है कि आर्थिक दबाव के बावजूद उसने अपनी संप्रभुता और राजनीतिक व्यवस्था को बनाए रखा है।

नए प्रतिबंधों के बाद अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंधों में और तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र क्यूबा की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस क्षेत्र को निशाना बनाने वाले प्रतिबंधों का प्रभाव दूरगामी हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्यूबा सरकार इन आरोपों और प्रतिबंधों पर क्या प्रतिक्रिया देती है तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम को किस नजरिए से देखता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा के ऊर्जा क्षेत्र पर सीधा दबाव बनाकर एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वह हवाना की मौजूदा नीतियों के प्रति कठोर रुख बनाए रखने के पक्ष में है। आने वाले समय में इन प्रतिबंधों का असर क्यूबा की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर किस रूप में दिखाई देता है,इस पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।