जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद पेरिस पहुँचे प्रधानमंत्री मोदी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद पेरिस पहुँचे प्रधानमंत्री मोदी,भारतीय समुदाय के स्वागत से अभिभूत,भारत-फ्रांस साझेदारी को बताया वैश्विक प्रगति की कुंजी

पेरिस,18 जून (युआईटीवी)- फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण बैठकों और कूटनीतिक चर्चाओं के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के अगले चरण के लिए गुरुवार सुबह पेरिस पहुँचे। फ्रांस की राजधानी पहुँचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया। बड़ी संख्या में मौजूद प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया और भारत के प्रति अपने जुड़ाव तथा गर्व का परिचय दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भारत और फ्रांस के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर गर्व है।

पेरिस पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात करते हुए दिखाई दिए। इन तस्वीरों में स्वागत के दौरान लोगों का उत्साह और प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान स्पष्ट रूप से नजर आया। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि पेरिस पहुंचने पर भारतीय समुदाय द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके प्रयास भारत-फ्रांस संबंधों को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत और फ्रांस की साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका महत्व वैश्विक स्तर पर भी है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में जब दुनिया अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है,तब भारत और फ्रांस जैसे लोकतांत्रिक और दूरदर्शी देशों के बीच मजबूत सहयोग विश्व की प्रगति और स्थिरता के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग वैश्विक विकास,नवाचार और शांति के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

पेरिस पहुँचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी को लेकर भी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि एवियन में आयोजित इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान उन्हें कई देशों के नेताओं के साथ बातचीत करने और भारत के दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि सम्मेलन के दौरान शासन,नीति-निर्माण,आर्थिक विकास,वैश्विक चुनौतियों और तकनीकी प्रगति जैसे विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत ने सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ की चिंताओं और अपेक्षाओं को मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर अधिक महत्व मिलना चाहिए और विश्व व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक समृद्धि तभी संभव है,जब विकसित और विकासशील देश मिलकर काम करें तथा सभी देशों को समान अवसर और संसाधन उपलब्ध हों।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि अब उनके फ्रांस दौरे का अंतिम चरण शुरू हो रहा है,जिसमें कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पेरिस में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध प्रौद्योगिकी और नवाचार कार्यक्रम ‘वीवा टेक 2026’ में वे संबोधन देंगे। इसके अलावा प्रवासी भारतीयों के साथ एक विशेष सामुदायिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे,जहाँ भारतीय समुदाय के लोगों से सीधे संवाद करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वीवा टेक 2026’ में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल भुगतान,स्टार्टअप संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर निर्माण और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ऐसे में इस प्रतिष्ठित मंच पर भारत की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं को प्रस्तुत करना वैश्विक निवेशकों और तकनीकी कंपनियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।

भारत वर्तमान समय में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक है। देश में स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई पहल कर रही है। इसी कारण ‘वीवा टेक 2026’ में प्रधानमंत्री की उपस्थिति को भारत की तकनीकी शक्ति और नवाचार क्षमता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यद्यपि भारत जी-7 का सदस्य नहीं है,फिर भी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका के कारण उसे लगातार ऐसे मंचों पर आमंत्रित किया जा रहा है। भारत ने हाल के वर्षों में खुद को ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित किया है। समावेशी विकास,निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था,जलवायु न्याय और प्रौद्योगिकी तक समान पहुँच जैसे मुद्दों पर भारत लगातार विकासशील देशों के हितों की वकालत करता रहा है।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जी-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी और वहाँ विभिन्न देशों के नेताओं के साथ हुई चर्चाएँ वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर भारत की भूमिका को और मजबूत करेंगी। भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति,विशाल बाजार और रणनीतिक महत्व के कारण दुनिया के प्रमुख देश उसके साथ सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं।

फ्रांस और भारत के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच कई दशकों से मजबूत रणनीतिक साझेदारी मौजूद है। रक्षा,अंतरिक्ष,परमाणु ऊर्जा,समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने लगातार मिलकर काम किया है। इसके अलावा सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में भी संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।

फ्रांस लंबे समय से भारत का विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं और आधुनिक सैन्य तकनीकों के आदान-प्रदान में भी सहयोग बढ़ा है। वहीं अंतरिक्ष अनुसंधान और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

प्रवासी भारतीय समुदाय भी भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फ्रांस में रहने वाले भारतीय विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर पहचान बना चुके हैं। वे न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक पुल का काम करते हैं,बल्कि आपसी समझ और सहयोग को भी बढ़ावा देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में इसी योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों को और करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पेरिस में आयोजित होने वाले सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों से संवाद करेंगे और उनके अनुभवों को सुनेंगे। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के दौरान भारत की उपलब्धियों,भविष्य की योजनाओं और दोनों देशों के संबंधों को लेकर भी चर्चा होगी।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पेरिस दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक,तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति देने का अवसर माना जा रहा है। जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी के बाद अब पेरिस में होने वाले कार्यक्रमों पर भी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे तथा प्रौद्योगिकी,नवाचार और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव के नए आयाम स्थापित होंगे।