नागपुर,20 जून (युआईटीवी)- नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा से ठीक पहले एक ऐसी प्रशासनिक गड़बड़ी सामने आई है,जिसने छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा जारी प्रवेश पत्र में कथित तकनीकी त्रुटि के कारण महाराष्ट्र के नागपुर के एक छात्र को परीक्षा केंद्र भारत के बजाय संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में आवंटित कर दिया गया। परीक्षा से एक दिन पहले सामने आई इस घटना ने न केवल संबंधित परिवार को परेशान किया है,बल्कि परीक्षा प्रबंधन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल नीट यूजी लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों के आवंटन में किसी भी प्रकार की त्रुटि अभ्यर्थियों पर मानसिक और भावनात्मक दबाव बढ़ा सकती है। नागपुर के छात्र अब्दुल्ला के मामले ने यही चिंता एक बार फिर उजागर कर दी है। छात्र और उसके परिवार का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने परीक्षा केंद्र के लिए महाराष्ट्र के भीतर ही तीन शहरों का चयन किया था,लेकिन प्रवेश पत्र जारी होने पर परीक्षा केंद्र अबू धाबी दिखाया गया।
परिवार के अनुसार,आवेदन भरते समय नागपुर,वर्धा और भंडारा को प्राथमिकता के तौर पर चुना गया था। इन शहरों का चयन इसलिए किया गया था,ताकि छात्र को अपने राज्य के भीतर ही सुविधाजनक परीक्षा केंद्र मिल सके,लेकिन जब प्रवेश पत्र डाउनलोड किया गया तो उसमें परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी का नाम देखकर परिवार पूरी तरह हैरान रह गया।
छात्र के पिता मोहम्मद तालिब ने इस पूरी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि परिवार को समझ नहीं आ रहा कि ऐसी गलती आखिर कैसे हो सकती है। उन्होंने बताया कि आवेदन करते समय सभी जानकारियाँ सावधानीपूर्वक भरी गई थीं और किसी भी चरण में विदेश में परीक्षा केंद्र चुनने जैसा कोई विकल्प नहीं चुना गया था। इसके बावजूद प्रवेश पत्र में विदेशी परीक्षा केंद्र का उल्लेख होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
तालिब के अनुसार,उनके बेटे ने इससे पहले भी नीट परीक्षा दी थी और उस समय उसे नागपुर में ही परीक्षा केंद्र मिला था। पिछली परीक्षा के दौरान किसी तरह की तकनीकी समस्या या आवेदन संबंधी गड़बड़ी सामने नहीं आई थी। उन्होंने बताया कि पहले की तरह इस बार भी परीक्षा केंद्र के लिए महाराष्ट्र के शहरों को ही प्राथमिकता दी गई थी। परिवार का कहना है कि उन्होंने कभी भी भारत के बाहर किसी परीक्षा केंद्र के लिए आवेदन नहीं किया और न ही ऐसी कोई माँग की थी।
इस अप्रत्याशित स्थिति का सबसे अधिक असर छात्र पर पड़ा है। परिवार के मुताबिक,जब अब्दुल्ला को यह जानकारी मिली कि उसका परीक्षा केंद्र अबू धाबी में आवंटित किया गया है,तो वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गया। लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। उसके पिता ने बताया कि इस घटना के बाद उनका बेटा तनाव में आ गया और भावनात्मक रूप से टूट गया। उन्होंने कहा कि वह लगातार चिंता में था और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसे दवा देकर आराम करने के लिए कहा गया।
परिवार का कहना है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर ऐसी गलती किसी भी छात्र के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए विद्यार्थी कई वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं और ऐसे में परीक्षा केंद्र से जुड़ी गड़बड़ी उनके पूरे प्रयासों पर असर डाल सकती है। यही कारण है कि परिवार इस मामले को लेकर बेहद चिंतित है।
घटना सामने आने के बाद परिवार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से संपर्क किया और अपनी समस्या बताई। उनके अनुसार,अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और प्रारंभिक स्तर पर यह स्वीकार किया कि यह तकनीकी त्रुटि हो सकती है। परिवार का दावा है कि एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सिस्टम में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी आई थी,जिसके कारण यह समस्या उत्पन्न हुई।
परिवार को यह भी आश्वासन दिया गया कि मामले की जाँच की जा रही है और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा। अधिकारियों ने कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि वे निर्धारित समय पर दोबारा संपर्क करेंगे और छात्र को परीक्षा में शामिल होने का अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाएँगे।
इस घटना ने परीक्षा संचालन में तकनीकी प्रणालियों की विश्वसनीयता को लेकर भी बहस शुरू कर दी है। डिजिटल प्रक्रिया के बढ़ते उपयोग ने परीक्षा प्रबंधन को आसान जरूर बनाया है, लेकिन छोटी तकनीकी त्रुटियाँ भी छात्रों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवेश पत्र जारी करने से पहले सभी जानकारियों की बहुस्तरीय जाँच होनी चाहिए,ताकि इस प्रकार की गलतियों से बचा जा सके।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि परीक्षा केंद्र आवंटन जैसी प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित होने के बावजूद मानवीय निगरानी आवश्यक है। यदि किसी छात्र को उसके चुने गए राज्यों से हजारों किलोमीटर दूर स्थित केंद्र आवंटित हो जाता है,तो यह संकेत है कि प्रणाली में कहीं न कहीं गंभीर खामी मौजूद है।
हालाँकि,इस पूरे घटनाक्रम के बीच परिवार का ध्यान किसी विवाद या आरोप-प्रत्यारोप पर नहीं है। उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब्दुल्ला को परीक्षा में शामिल होने का उचित अवसर मिल सके। छात्र के पिता ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके बेटे का एक साल बर्बाद न हो और वह अपनी मेहनत के अनुरूप परीक्षा दे सके। उन्होंने कहा कि परिणाम बाद की बात है,लेकिन परीक्षा में बैठने का अवसर मिलना जरूरी है।
नीट यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा लाखों विद्यार्थियों के करियर का आधार होती है। ऐसे में नागपुर के इस छात्र के साथ हुई घटना ने परीक्षा प्रबंधन की चुनौतियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी इस मामले का समाधान किस तरह करती है और छात्र को समय रहते परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल पाता है या नहीं। फिलहाल परिवार को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द कार्रवाई करेंगे और इस असामान्य स्थिति का उचित समाधान निकालेंगे।
