अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 तोपों के लिए 4,000 करोड़ रुपये के सपोर्ट पैकेज को दी मंजूरी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

भारत की सैन्य ताकत को मिलेगा बड़ा बल,अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 तोपों के लिए 4,000 करोड़ रुपये के सपोर्ट पैकेज को दी मंजूरी

नई दिल्ली,22 जून (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को एक नई मजबूती देते हुए अमेरिका ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए लगभग 482.2 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,000 करोड़ रुपये के रखरखाव और तकनीकी सहायता पैकेज को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह पैकेज भारतीय सेना और वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे अत्याधुनिक अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों तथा एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों की परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस सहायता से भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने इस प्रस्तावित रक्षा सौदे की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह एजेंसी विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत विभिन्न देशों को अमेरिकी रक्षा उपकरणों और सेवाओं की आपूर्ति का संचालन करती है। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग भी इस संभावित बिक्री के बारे में अमेरिकी कांग्रेस को सूचित कर चुका था। अब औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

इस पैकेज का एक बड़ा हिस्सा भारतीय सेना की एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के रखरखाव और तकनीकी सहायता से जुड़ा हुआ है। भारत ने इन आधुनिक तोपों को विशेष रूप से ऊँचाई वाले क्षेत्रों और पर्वतीय इलाकों में अपनी तोपखाना क्षमता बढ़ाने के लिए शामिल किया था। कम वजन और अधिक गतिशीलता के कारण ये तोपें दुर्गम क्षेत्रों में भी आसानी से तैनात की जा सकती हैं। यही वजह है कि इन्हें भारत की सामरिक जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिकी अधिसूचना के अनुसार,भारत ने इन तोपों के लिए दीर्घकालिक रखरखाव और तकनीकी सहायता की माँग की है। इसमें स्पेयर पार्ट्स,सहायक उपकरण,मरम्मत सेवाएँ, तकनीकी सहयोग,प्रशिक्षण कार्यक्रम,फील्ड सर्विस प्रतिनिधियों की सहायता,डिपो स्तर की मरम्मत क्षमता और अन्य आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता शामिल है। इस संपूर्ण एम777 समर्थन कार्यक्रम की अनुमानित लागत लगभग 230 मिलियन डॉलर आंकी गई है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आधुनिक हथियार प्रणाली की प्रभावशीलता केवल उसकी खरीद तक सीमित नहीं होती,बल्कि उसके नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी उन्नयन पर भी निर्भर करती है। ऐसे में यह पैकेज भारतीय सेना को इन तोपों का अधिक प्रभावी और लंबे समय तक उपयोग करने में मदद करेगा।

दूसरी ओर,भारतीय वायुसेना और सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों के लिए भी एक व्यापक सहायता पैकेज को मंजूरी दी गई है। अपाचे हेलीकॉप्टर आधुनिक युद्धक्षेत्र में अपनी घातक क्षमता,उन्नत सेंसर प्रणाली और सटीक हमले की क्षमता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इन हेलीकॉप्टरों को अपनी सैन्य शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार,अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए स्वीकृत सहायता पैकेज में इंजीनियरिंग सहायता,तकनीकी परामर्श,लॉजिस्टिक समर्थन,तकनीकी प्रकाशनों की उपलब्धता,प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा अन्य कार्यक्रम संबंधी सेवाएँ शामिल हैं। इस सहायता कार्यक्रम की अनुमानित लागत लगभग 198.2 मिलियन डॉलर बताई गई है।

अपाचे हेलीकॉप्टर कार्यक्रम के लिए अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनियाँ बोइंग और लॉकहीड मार्टिन मुख्य ठेकेदार की भूमिका निभाएँगी। दोनों कंपनियाँ हेलीकॉप्टरों के रखरखाव,तकनीकी सहायता और परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक सेवाएँ प्रदान करेंगी। वहीं एम777 हॉवित्जर कार्यक्रम के लिए यूनाइटेड किंगडम स्थित बीएई सिस्टम्स प्रमुख ठेकेदार होगी,जो इन तोपों से संबंधित तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक दशक में रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और आधुनिक सैन्य तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया है। अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 तोपें भी इसी रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा हैं,जिन्हें भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को उन्नत बनाने के लिए शामिल किया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में आधुनिक हथियार प्रणालियों की निरंतर उपलब्धता और संचालन क्षमता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर मौजूद सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह सहायता पैकेज और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में एम777 तोपों की उपयोगिता और युद्धक्षेत्र में अपाचे हेलीकॉप्टरों की भूमिका भारतीय सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी इस प्रस्तावित बिक्री को अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप बताया है। विभाग का कहना है कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। विभाग के अनुसार,यह पैकेज भारत की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करेगा।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इस सहायता से भारत की घरेलू सुरक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलेगी और वह क्षेत्रीय खतरों का बेहतर ढंग से सामना कर सकेगा। साथ ही इससे भारत की सैन्य तैयारियों में निरंतरता बनी रहेगी और आधुनिक हथियार प्रणालियों की प्रभावशीलता लंबे समय तक कायम रखी जा सकेगी।

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि यह मंजूरी केवल एक तकनीकी या लॉजिस्टिक समझौता नहीं है,बल्कि भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों की गहराई का भी संकेत है। ऐसे समय में जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं,दोनों देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अमेरिका की ओर से स्वीकृत यह बहु-मिलियन डॉलर सहायता पैकेज भारतीय सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता को बनाए रखने और उसे और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इसके जरिए भारत अपनी आधुनिक सैन्य प्रणालियों का अधिक कुशलता के साथ संचालन कर सकेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर पाएगा।