पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराकर रचा इतिहास (तस्वीर क्रेडिट@kreedajagat)

फीफा विश्व कप 2026:पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराकर रचा इतिहास,चार बार की विश्व चैंपियन टीम विश्व कप से बाहर

फॉक्सबोरो, 30 जून (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब दक्षिण अमेरिकी टीम पराग्वे ने चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर अंतिम-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। मंगलवार को बोस्टन स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 के इस मुकाबले में निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं। इसके बाद विजेता का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ,जहाँ पराग्वे ने धैर्य और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस हार के साथ ही जर्मनी का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया,जबकि फीफा विश्व कप के इतिहास में पहली बार जर्मनी किसी पेनल्टी शूटआउट में पराजित हुआ।

मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने तेज गति से खेलना शुरू किया। जर्मनी ने गेंद पर कब्जा बनाए रखते हुए आक्रामक फुटबॉल खेलने की कोशिश की,जबकि पराग्वे ने मजबूत रक्षात्मक रणनीति अपनाते हुए जवाबी हमलों पर भरोसा किया। शुरुआती मिनटों में जर्मनी ने कई अवसर बनाए,लेकिन पराग्वे की रक्षा पंक्ति ने शानदार तालमेल दिखाते हुए सभी प्रयासों को विफल कर दिया। दूसरी ओर,पराग्वे ने सीमित मौकों का पूरा फायदा उठाने की रणनीति अपनाई और जर्मन डिफेंस पर लगातार दबाव बनाने का प्रयास किया।

पहले हाफ के अंतिम चरण में पराग्वे को अपनी मेहनत का फल मिला। मैच के 42वें मिनट में जूलियो एन्सिसो ने शानदार गोल करते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल की शुरुआत मिडफील्ड से हुए तेज आक्रमण से हुई,जहाँ पराग्वे के खिलाड़ियों ने सटीक पासिंग के जरिए जर्मनी की रक्षा पंक्ति को पूरी तरह भेद दिया। एन्सिसो ने मिले अवसर का बेहतरीन तरीके से फायदा उठाया और गेंद को गोलकीपर की पहुँच से दूर नेट में पहुँचाकर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद पराग्वे के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ गया,जबकि जर्मनी पर बराबरी हासिल करने का दबाव बढ़ने लगा।

पहले हाफ के अंत तक जर्मनी ने बराबरी की कोशिश जारी रखी,लेकिन पराग्वे के गोलकीपर और रक्षापंक्ति ने कोई गलती नहीं की। परिणामस्वरूप पहले 45 मिनट की समाप्ति तक पराग्वे 1-0 की बढ़त के साथ ड्रेसिंग रूम लौटा।

दूसरे हाफ में जर्मनी ने पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाया। टीम ने लगातार गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और पराग्वे के हाफ में दबाव बनाना शुरू किया। आखिरकार उसका प्रयास 61वें मिनट में सफल हुआ,जब फ्लोरियन विर्ट्ज़ ने दाएं छोर से शानदार क्रॉस दिया। इस क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज़ ने सटीक हेडर लगाकर गेंद को गोल में पहुँचा दिया और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के बाद जर्मनी ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की और लगातार आक्रमण जारी रखा।

कुछ ही देर बाद जर्मनी को बढ़त मिलने की उम्मीद भी जगी,जब जोनाथन टाह ने हेडर के जरिए गेंद को गोल में पहुँचा दिया। हालाँकि, वीडियो समीक्षा के बाद यह गोल अमान्य घोषित कर दिया गया। इस फैसले ने जर्मन खिलाड़ियों और समर्थकों को निराश कर दिया, जबकि पराग्वे ने राहत की सांस ली। इसके बाद दोनों टीमों ने कई मौके बनाए,लेकिन कोई भी टीम निर्णायक गोल नहीं कर सकी।

निर्धारित समय समाप्त होने के बाद मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुँचा। अतिरिक्त 30 मिनट में दोनों टीमों ने पूरी ताकत झोंक दी। जर्मनी ने लगातार आक्रमण किए,जबकि पराग्वे ने संयम बनाए रखते हुए जवाबी हमलों के जरिए गोल करने का प्रयास किया। दोनों गोलकीपरों ने शानदार प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण बचाव किए। अतिरिक्त समय समाप्त होने तक भी स्कोर 1-1 ही रहा,जिसके बाद मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से होना तय हुआ।

पेनल्टी शूटआउट की शुरुआत जर्मनी ने की,लेकिन टीम को बड़ा झटका तब लगा जब काई हैवर्ट्ज़ की पहली पेनल्टी पर पराग्वे के गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। इसके तुरंत बाद मॉरिसियो ने अपनी पेनल्टी को सफलतापूर्वक गोल में बदलते हुए पराग्वे को बढ़त दिला दी।

हालाँकि,जर्मनी ने जल्द ही वापसी की। जोशुआ किमिख ने अपनी पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम का खाता खोला और मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा। इसके बाद पराग्वे के कप्तान गुस्तावो गोमेज़ ने शानदार शॉट लगाकर स्कोर 2-1 कर दिया। जर्मनी की ओर से जमाल मुसियाला ने भी दबाव में बेहतरीन पेनल्टी लगाई और स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया।

शूटआउट जैसे-जैसे आगे बढ़ा,तनाव भी बढ़ता गया। पराग्वे के मटियास गैलार्ज़ा ने अपनी पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम को फिर बढ़त दिला दी। इसके बाद जर्मनी के निक वोल्टेमेड अपना प्रयास सफल नहीं कर सके और उनका शॉट रोक लिया गया। इससे पराग्वे जीत के बेहद करीब पहुँच गया।

इसके बावजूद जर्मनी ने हार नहीं मानी। पराग्वे के एंटोनियो सनाब्रिया के संभावित निर्णायक शॉट को अनुभवी गोलकीपर मैनुअल नोयर ने शानदार अंदाज में रोक लिया। नोयर के इस बचाव ने जर्मनी की उम्मीदों को एक बार फिर जिंदा कर दिया। इसके बाद नादिम अमीरी ने शानदार पेनल्टी लगाकर स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया और मुकाबला फिर पूरी तरह खुल गया।

रोमांच यहीं खत्म नहीं हुआ। पराग्वे के फेबियन बालबुएना की पेनल्टी को भी मैनुअल नोयर ने शानदार डाइव लगाकर रोक दिया। ऐसा लग रहा था कि जर्मनी अब वापसी कर सकता है,लेकिन पराग्वे ने मानसिक मजबूती का शानदार परिचय दिया। निर्णायक क्षण में जोसे कनाले दबाव के बीच पेनल्टी लेने पहुँचे और उन्होंने बिना कोई गलती किए गेंद को नेट में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट 4-3 से जीत लिया और इतिहास रच दिया।

यह जीत पराग्वे के लिए सिर्फ अंतिम-16 में पहुँचने तक सीमित नहीं रही,बल्कि उसने विश्व फुटबॉल में अपनी नई पहचान भी बनाई। कोच गुस्तावो अल्फारो की रणनीति, खिलाड़ियों का अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की क्षमता इस जीत की सबसे बड़ी वजह रही। टीम ने पूरे मुकाबले में दिखाया कि वह किसी भी मजबूत प्रतिद्वंद्वी को चुनौती देने की क्षमता रखती है।

दूसरी ओर,जर्मनी के लिए यह हार बेहद दर्दनाक रही। चार बार विश्व कप जीतने वाली टीम ने पूरे मैच में संघर्ष किया और कई अवसर भी बनाए,लेकिन निर्णायक क्षणों में किस्मत और सटीकता दोनों ने उसका साथ नहीं दिया। मैनुअल नोयर ने शूटआउट में दो शानदार बचाव कर टीम को मुकाबले में बनाए रखा,लेकिन साथी खिलाड़ी उस अवसर का लाभ नहीं उठा सके। विश्व कप इतिहास में पहली बार पेनल्टी शूटआउट में मिली हार जर्मनी के लिए लंबे समय तक याद की जाएगी।

अब पराग्वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अंतिम-16 में उतरेगा,जहाँ उसकी नजर अपने इस शानदार अभियान को आगे बढ़ाने पर होगी। वहीं,जर्मनी को इस अप्रत्याशित हार से सबक लेते हुए भविष्य की तैयारियों पर ध्यान देना होगा। विश्व कप 2026 में पराग्वे की यह जीत उन मुकाबलों में शामिल हो गई है,जिन्हें लंबे समय तक टूर्नामेंट के सबसे बड़े उलटफेरों में गिना जाएगा।