मोरक्को ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराया (तस्वीर क्रेडिट@CricUniverse7)

फीफा विश्व कप 2026: मोरक्को ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराया,रोमांचक मुकाबले के बाद अंतिम-16 में बनाई जगह

मॉन्टेरी,30 जून (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 में मोरक्को ने एक बार फिर अपनी जुझारू खेल भावना का शानदार प्रदर्शन करते हुए नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर अंतिम-16 में जगह बना ली। मंगलवार को मॉन्टेरी स्टेडियम में खेले गए इस बेहद रोमांचक मुकाबले का फैसला निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद भी नहीं हो सका। दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं, जिसके बाद विजेता का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। इस मुकाबले में मोरक्को के गोलकीपर यासीन बौनू सबसे बड़े नायक साबित हुए। उन्होंने निर्णायक समय पर शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम की जीत सुनिश्चित की,जबकि इस्माइल साइबारी ने विजयी पेनल्टी को गोल में बदलकर मोरक्को को अगले दौर का टिकट दिला दिया।

मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक अंदाज अपनाया। नीदरलैंड ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की,जबकि मोरक्को ने तेज काउंटर अटैक के जरिए विपक्षी रक्षा पंक्ति को चुनौती दी। पहले हाफ में दोनों टीमों को कुछ अच्छे मौके मिले,लेकिन दोनों गोलकीपरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए किसी भी टीम को बढ़त हासिल नहीं करने दी। इसके चलते पहले 45 मिनट बिना किसी गोल के समाप्त हुए।

दूसरे हाफ में मुकाबले की रफ्तार और तेज हो गई। दोनों टीमें लगातार आक्रमण कर रही थीं,लेकिन सफलता नीदरलैंड को 72वें मिनट में मिली। क्राइसेंसियो समरविले ने बाएं छोर से शानदार दौड़ लगाते हुए संतुलन बिगड़ने के बावजूद बेहतरीन टचबैक दिया,जिस पर कोडी गैकपो ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को गोल में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ नीदरलैंड ने 1-0 की बढ़त बना ली और ऐसा लगने लगा कि टीम जीत की ओर बढ़ रही है।

इस गोल के साथ कोडी गैकपो ने विश्व कप में नीदरलैंड के लिए अपना छठा गोल दागा। वह अब विश्व कप इतिहास में नीदरलैंड के लिए संयुक्त रूप से दूसरे सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे आगे केवल जॉनी रेप हैं,जिन्होंने 1974 और 1978 के विश्व कप में कुल सात गोल किए थे। गैकपो का यह रिकॉर्ड उनके लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन का प्रमाण भी माना जा रहा है।

हालाँकि, मोरक्को ने हार नहीं मानी और अंतिम मिनटों तक संघर्ष जारी रखा। जब मुकाबला समाप्ति की ओर बढ़ रहा था और नीदरलैंड जीत के बेहद करीब दिखाई दे रहा था,तभी इंजुरी टाइम के पहले मिनट यानी 91वें मिनट में मोरक्को ने शानदार वापसी की। अतिरिक्त समय की शुरुआत में स्थानापन्न खिलाड़ी चेम्सडाइन टैल्बी ने दाएं छोर से सटीक क्रॉस दिया,जिस पर सेंट्रल डिफेंडर इसा डियोप ने बेहतरीन हेडर लगाकर गेंद को गोल में पहुँचा दिया। इस गोल ने पूरे स्टेडियम का माहौल बदल दिया और मुकाबला 1-1 की बराबरी पर पहुँच गया।

इसके बाद दोनों टीमों के बीच अतिरिक्त समय में भी जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। दोनों पक्षों ने निर्णायक गोल करने के लिए पूरा जोर लगाया। मोरक्को ने काउंटर अटैक के जरिए कई मौके बनाए,जबकि नीदरलैंड ने लगातार गेंद पर कब्जा बनाए रखते हुए आक्रमण किए। हालाँकि,दोनों टीमों की रक्षापंक्ति और गोलकीपरों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया,जिसके कारण अतिरिक्त 30 मिनट में भी कोई गोल नहीं हो सका।

आखिरकार मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। शूटआउट की शुरुआत से ही दबाव साफ दिखाई दे रहा था। दोनों टीमों ने अपनी पहली दो कोशिशों में से एक-एक पेनल्टी गंवा दी। तीसरी कोशिश में दोनों ने गोल किया,लेकिन चौथी पेनल्टी पर फिर दोनों टीमों से चूक हुई। ऐसे में मुकाबला पूरी तरह रोमांचक मोड़ पर पहुँच गया और आखिरी क्षण तक किसी को भी जीत का भरोसा नहीं था।

निर्णायक पल तब आया जब नीदरलैंड के क्राइसेंसियो समरविले पेनल्टी लेने पहुँचे। मोरक्को के अनुभवी गोलकीपर यासीन बौनू ने शानदार अनुमान लगाते हुए उनके शॉट को रोक दिया। यह बचाव पूरे मुकाबले का सबसे अहम क्षण साबित हुआ। इसके बाद इस्माइल साइबारी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पेनल्टी को गोल में बदल दिया और मोरक्को को 3-2 से यादगार जीत दिला दी।

इस जीत के साथ मोरक्को ने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप 2026 के अंतिम-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। अब उसका सामना 5 जुलाई को ह्यूस्टन में सह-मेजबान कनाडा से होगा। मोरक्को की टीम इस जीत से आत्मविश्वास से भर गई है और वह टूर्नामेंट में आगे भी इसी लय को बरकरार रखना चाहेगी।

दूसरी ओर,नीदरलैंड के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। टीम ने अधिकांश समय तक मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा और बढ़त भी हासिल की थी,लेकिन अंतिम क्षणों में रक्षा पंक्ति की एक चूक ने पूरा मैच बदल दिया। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट में भी खिलाड़ी दबाव को सँभाल नहीं सके और टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया।

मोरक्को की इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े टूर्नामेंटों में केवल स्टार खिलाड़ियों के दम पर नहीं,बल्कि सामूहिक प्रदर्शन,मजबूत मानसिकता और आखिरी मिनट तक संघर्ष करने की क्षमता के दम पर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। यासीन बौनू की गोलकीपिंग,इसा डियोप का अहम गोल और इस्माइल साइबारी की निर्णायक पेनल्टी लंबे समय तक मोरक्को के प्रशंसकों की यादों में दर्ज रहेगी। अब सभी की निगाहें अंतिम-16 के उस मुकाबले पर होंगी,जहाँ मोरक्को की टीम कनाडा के खिलाफ एक और बड़ा उलटफेर करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।