फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में हैरी केन के दो गोल से इंग्लैंड ने पलटा मैच (तस्वीर क्रेडिट@lmts_football)

फीफा वर्ल्ड कप 2026: हैरी केन के दो गोल से इंग्लैंड ने पलटा मैच,डीआर कांगो को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अंतिम-16 में बनाई जगह

अटलांटा,2 जुलाई (युआईटीवी)- फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में इंग्लैंड ने दमदार वापसी करते हुए डीआर कांगो को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। अटलांटा स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 के इस मुकाबले में इंग्लैंड को शुरुआती झटका लगा और टीम पहले हाफ से ही एक गोल से पीछे चल रही थी। हालाँकि,कप्तान हैरी केन ने दूसरे हाफ में अपने अनुभव और शानदार फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे और इंग्लैंड को यादगार जीत दिला दी। इस जीत के साथ ही 1966 की विश्व चैंपियन इंग्लैंड ने न केवल अगले दौर में प्रवेश किया,बल्कि यह भी साबित कर दिया कि दबाव की परिस्थितियों में उसकी टीम मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता रखती है। अब अंतिम-16 में इंग्लैंड का सामना 6 जुलाई को मेक्सिको सिटी स्टेडियम में मेक्सिको से होगा।

मुकाबले की शुरुआत इंग्लैंड के लिए बिल्कुल भी अच्छी नहीं रही। मैच के केवल सातवें मिनट में डीआर कांगो ने शानदार आक्रमण करते हुए इंग्लैंड की रक्षा पंक्ति को चौंका दिया। दाईं ओर से आए बेहतरीन क्रॉस पर चांसल म्बेम्बा ने गेंद को ब्रायन सिपेंगा की ओर बढ़ाया। बॉक्स के बाईं तरफ पूरी तरह खाली खड़े सिपेंगा ने बिना कोई गलती किए नीचा शॉट लगाया,जिसने इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड को उनके नियर पोस्ट पर छका दिया। गेंद सीधे गोल में समा गई और डीआर कांगो ने मुकाबले में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। यह ब्रायन सिपेंगा के अंतर्राष्ट्रीय करियर का पहला गोल भी था और उन्होंने इसे विश्व कप जैसे बड़े मंच पर दर्ज कर अपनी टीम को शानदार शुरुआत दिलाई।

शुरुआती गोल खाने के बाद इंग्लैंड कुछ समय तक लय हासिल नहीं कर सका। डीआर कांगो के खिलाड़ी पूरे आत्मविश्वास के साथ खेल रहे थे और उन्होंने इंग्लैंड को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। हालाँकि,धीरे-धीरे इंग्लैंड ने गेंद पर नियंत्रण बनाना शुरू किया और आक्रमण तेज कर दिए। मिडफील्ड में जूड बेलिंगहम ने कई अच्छे मूव तैयार किए और विपक्षी गोल पर लगातार दबाव बनाया। उन्होंने दो शानदार हेडर भी लगाए, लेकिन डीआर कांगो के गोलकीपर लियोनेल म्पासी ने बेहतरीन बचाव करते हुए दोनों प्रयास विफल कर दिए।

इंग्लैंड को बराबरी का एक और शानदार मौका तब मिला,जब नोनी माडुएके ने बॉक्स के भीतर शानदार दौड़ लगाते हुए गेंद मार्कस रैशफोर्ड तक पहुँचाई। रैशफोर्ड ने दूर वाले पोस्ट की ओर शॉट लगाया,लेकिन डीआर कांगो के डिफेंडर एरॉन वान-बिसाका ने गोल लाइन पर खड़े होकर बेहतरीन क्लियरेंस कर अपनी टीम की बढ़त बचा ली। इसके बाद पहले हाफ के अंतिम क्षणों में इंग्लैंड को कॉर्नर मिला। कॉर्नर से आई गेंद पर कप्तान हैरी केन ने नजदीक से दमदार वॉली लगाई,लेकिन एक बार फिर गोलकीपर लियोनेल म्पासी ने शानदार रिफ्लेक्स दिखाते हुए गेंद को गोल में जाने से रोक दिया।

दूसरी ओर डीआर कांगो के पास भी अपनी बढ़त दोगुनी करने का सुनहरा अवसर था। योएन विसा ने शानदार मूव के बाद एरॉन वान-बिसाका के लो क्रॉस पर शॉट लगाया, लेकिन गेंद पोस्ट से टकराकर वापस मैदान में आ गई। यदि यह प्रयास सफल हो जाता तो इंग्लैंड की मुश्किलें और बढ़ सकती थीं। पहले हाफ की समाप्ति तक डीआर कांगो 1-0 की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा और इंग्लैंड पर बाहर होने का खतरा मंडराने लगा।

दूसरे हाफ में इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस ट्यूशेल ने टीम की रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने विंग पोजीशन पर नए खिलाड़ियों को उतारकर आक्रमण को और तेज करने का फैसला किया। इस बदलाव का असर जल्द ही मैदान पर दिखाई देने लगा। इंग्लैंड ने लगातार डीआर कांगो के हाफ में दबाव बनाना शुरू किया और गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया। सब्स्टीट्यूट एंथनी गॉर्डन ने मैदान पर उतरते ही खेल की गति बदल दी। उनकी तेज दौड़ और सटीक क्रॉस ने डीआर कांगो की रक्षा पंक्ति को परेशान करना शुरू कर दिया।

इंग्लैंड को आखिरकार 75वें मिनट में बराबरी का गोल मिल गया। एंथनी गॉर्डन ने बाईं ओर से शानदार क्रॉस डाला,जिस पर कप्तान हैरी केन ने बेहतरीन हेडर लगाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ स्कोर 1-1 हो गया और इंग्लैंड की वापसी की उम्मीदें मजबूत हो गईं। पूरे स्टेडियम में मौजूद इंग्लैंड के समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुँच गया,जबकि डीआर कांगो के खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ने लगा।

बराबरी का गोल करने के बाद इंग्लैंड ने आक्रमण की रफ्तार और तेज कर दी। टीम को विश्वास हो गया था कि जीत उसके हाथ लग सकती है। लगातार हमलों के बीच 86वें मिनट में एक बार फिर हैरी केन ने अपना अनुभव दिखाया। उन्होंने अपने मार्कर से शानदार तरीके से दूरी बनाई और नियर पोस्ट की ओर ऐसा सटीक शॉट लगाया,जिसे रोक पाना गोलकीपर लियोनेल म्पासी के लिए भी संभव नहीं था। गेंद सीधे नेट में चली गई और इंग्लैंड ने 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। इस गोल ने मुकाबले का पूरा रुख बदल दिया और डीआर कांगो की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।

अंतिम मिनटों में डीआर कांगो ने बराबरी करने की भरपूर कोशिश की,लेकिन इंग्लैंड की रक्षा पंक्ति ने कोई बड़ी गलती नहीं की। निर्धारित समय समाप्त होने तक स्कोर 2-1 ही रहा और इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। अंतिम सीटी बजते ही इंग्लैंड के खिलाड़ी और समर्थक जीत का जश्न मनाने लगे,जबकि डीआर कांगो के खिलाड़ियों के चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दे रही थी।

यह जीत इंग्लैंड के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रही। वर्ष 1986 के बाद पहली बार विश्व कप में ऐसा हुआ है कि इंग्लैंड हाफ टाइम तक एक गोल से पिछड़ने के बावजूद मुकाबला जीतने में सफल रहा। लंबे समय बाद टीम ने नॉकआउट मुकाबले में दबाव के बीच शानदार वापसी करते हुए अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया। इसके साथ ही इंग्लैंड ने अफ्रीकी टीमों के खिलाफ विश्व कप में अपना शानदार रिकॉर्ड भी कायम रखा। 1966 की विश्व चैंपियन टीम अब तक विश्व कप में अफ्रीकी देशों के खिलाफ खेले गए अपने पिछले नौ मुकाबलों में अजेय रही है और डीआर कांगो के खिलाफ जीत के साथ उसने इस रिकॉर्ड को बरकरार रखा।

इस विश्व कप में जर्मनी और नीदरलैंड जैसी मजबूत टीमें पहले ही नॉकआउट चरण से बाहर हो चुकी हैं। ऐसे में जब इंग्लैंड भी एक घंटे तक मुकाबले में पिछड़ रही थी,तब ऐसा लगने लगा था कि एक और बड़ी टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी,लेकिन कप्तान हैरी केन ने अपने अनुभव,नेतृत्व और बेहतरीन फिनिशिंग से टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाल लिया। उन्होंने साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।

दूसरी ओर डीआर कांगो ने भी अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। विश्व कप इतिहास में पहली बार नॉकआउट मुकाबला खेलने उतरी इस टीम ने शुरुआत से अंत तक इंग्लैंड को कड़ी टक्कर दी। गोलकीपर लियोनेल म्पासी ने कई शानदार बचाव किए और यदि अंतिम पलों में इंग्लैंड के हमले नहीं सफल होते,तो मुकाबले का परिणाम अलग भी हो सकता था। हालाँकि,टीम अपनी बढ़त को अंत तक कायम नहीं रख सकी और उसका विश्व कप सफर यहीं समाप्त हो गया।

अब इंग्लैंड की निगाहें अंतिम-16 के मुकाबले पर होंगी,जहाँ उसका सामना मेक्सिको से होगा। हैरी केन शानदार फॉर्म में हैं और टीम का आत्मविश्वास भी इस जीत के बाद काफी बढ़ा है। वहीं मेक्सिको भी मजबूत टीम मानी जाती है,इसलिए दोनों देशों के बीच होने वाला मुकाबला विश्व कप के सबसे चर्चित मैचों में शामिल हो सकता है। इंग्लैंड चाहेगा कि डीआर कांगो के खिलाफ मिली इस यादगार जीत की लय को बरकरार रखते हुए वह क्वार्टर फाइनल की ओर एक और मजबूत कदम बढ़ाए।