मुंबई,6 जुलाई (युआईटीवी)- देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारी वर्षा के बीच रविवार को मानखुर्द के जनता नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब एक तीन मंजिला चॉल अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में पाँच बच्चों और एक महिला सहित छह लोगों की मौत हो गई,जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। इस दुखद घटना पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
जानकारी के अनुसार,पिछले कई दिनों से मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार भारी बारिश हो रही है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर जलभराव,यातायात बाधित होने और कमजोर इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। इसी बीच मानखुर्द के जनता नगर क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला चॉल अचानक ढह गई। घटना इतनी अचानक हुई कि भवन में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। मलबे में कई लोग दब गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी।
सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल,अग्निशमन विभाग,पुलिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका की टीमें घटनास्थल पर पहुँच गईं। बचाव दलों ने मलबा हटाकर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। कई घंटों तक चले राहत कार्य के दौरान छह लोगों के शव बरामद किए गए। मृतकों में पाँच बच्चे और एक महिला शामिल हैं। हादसे में घायल हुए एक व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया,जहाँ उसका इलाज जारी है। अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान पूरी सावधानी के साथ चलाया गया ताकि यदि मलबे में कोई और व्यक्ति फँसा हो तो उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
इस दुखद घटना पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी संदेश में कहा गया कि मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की है और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजनों को पाँच-पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को राहत कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने भी इस हादसे पर दुख जताया और गोवंडी स्थित अस्पताल पहुंचकर घायल व्यक्ति तथा मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को सांत्वना देते हुए भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी हर संभव सहायता करेगा। मेयर कार्यालय के अनुसार,राहत एवं बचाव अभियान समय पर शुरू किया गया और सभी संबंधित एजेंसियों ने समन्वय के साथ कार्य किया। प्रशासन अब यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि आसपास की अन्य जर्जर इमारतों का तत्काल निरीक्षण किया जाए,ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने भी घटनास्थल की स्थिति पर जानकारी देते हुए कहा कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण मानखुर्द के जनता नगर इलाके में यह दर्दनाक हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि घटना में छह लोगों की जान चली गई है और राहत एवं बचाव कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल,पुलिस,अग्निशमन विभाग तथा अन्य एजेंसियाँ लगातार जुटी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इलाके में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण मौजूद हैं। सरकार इस पूरे मामले की विस्तृत जाँच कराएगी ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है,तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद इलाके में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने सरकार और नगर निगम प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने घोषणा की थी कि एक जनवरी 1995 तक बनी सभी झोपड़ियों का पुनर्वास किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया था कि उसके बाद बनने वाली झोपड़ियों के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अबू आजमी ने सवाल किया कि जब ऐसी स्पष्ट नीति पहले से मौजूद थी तो उसके बाद भी बड़ी संख्या में अवैध झोपड़ियां और निर्माण कैसे होते रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण ऐसे निर्माणों को बढ़ावा मिला। उनके अनुसार,कथित तौर पर धन लेकर अवैध झोपड़ियों और निर्माणों को अनुमति दी जाती रही,जिसके कारण आज हजारों लोग असुरक्षित भवनों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अवैध निर्माण हटाना चाहती है,तो सबसे पहले उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए,जिन्होंने नियमों की अनदेखी की। उनका कहना था कि केवल गरीब लोगों के घर तोड़ने से समस्या का समाधान नहीं होगा,बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों को भी जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
अबू आजमी ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को कई बार विधानसभा में उठाया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने माँग की कि जिन झोपड़ियों और इमारतों की स्थिति बेहद जर्जर और खतरनाक है,वहाँ रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए। उनके अनुसार,समय रहते पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था की जाती,तो इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सकता था।
मुंबई में हर वर्ष मानसून के दौरान जर्जर इमारतों के गिरने की घटनाएँ चिंता का कारण बनती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश,कमजोर निर्माण सामग्री,समय पर मरम्मत का अभाव और अनियोजित निर्माण ऐसी दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बनते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल राहत एवं बचाव कार्य तक सीमित नहीं है,बल्कि शहर की पुरानी और असुरक्षित इमारतों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
फिलहाल मानखुर्द की इस घटना ने एक बार फिर मुंबई में भवन सुरक्षा,अवैध निर्माण और पुनर्वास नीति को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार ने हादसे की जाँच के आदेश दे दिए हैं और राहत कार्य पूरा होने के बाद दुर्घटना के कारणों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। वहीं,मृतकों के परिजनों के लिए यह हादसा अपूरणीय क्षति बनकर सामने आया है। पूरे शहर की निगाहें अब जाँच के निष्कर्षों और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।
