चेन्नई,14 जुलाई (युआईटीवी)- तमिलनाडु की नई सरकार अपने पहले पूर्ण बजट को अंतिम रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में 16 जुलाई को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में वर्ष 2026-27 के पूर्ण बजट के प्रमुख प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और उन्हें अंतिम मंजूरी दिए जाने की संभावना है। यह बजट अगस्त के पहले सप्ताह में तमिलनाडु विधानसभा में पेश किया जा सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आई सरकार पहली बार अपनी व्यापक आर्थिक और विकासात्मक नीति को बजट के माध्यम से राज्य के सामने रखेगी।
तमिलनाडु सचिवालय में सुबह होने वाली इस बैठक में राज्य के सभी मंत्री शामिल होंगे। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की वित्तीय आवश्यकताओं,योजनाओं और आगामी वर्ष के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं पर अंतिम विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसा बजट तैयार करना है,जो राज्य के विकास को नई गति देने के साथ-साथ चुनाव के दौरान जनता से किए गए प्रमुख वादों को भी पूरा करने की दिशा में ठोस कदम साबित हो।
सरकारी सूत्रों के अनुसार,इस बजट में सामाजिक कल्याण योजनाओं को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि,रोजगार,बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने,निवेश को आकर्षित करने,लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने तथा राज्य में आधुनिक औद्योगिक परियोजनाओं के विस्तार पर भी सरकार का विशेष ध्यान रहेगा।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता सँभालने के बाद से ही विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की लगातार समीक्षा की है। मुख्यमंत्री ने बीते कुछ सप्ताहों में विभागवार कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं,जिनमें अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति,बजट संबंधी आवश्यकताओं और नई परियोजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली गई। इन बैठकों के दौरान विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों और आँकड़ों के आधार पर ही आगामी बजट का प्रारूप तैयार किया गया है।
बताया जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में विभागवार खर्च,योजनाओं के लिए प्रस्तावित वित्तीय आवंटन,नई परियोजनाओं की लागत तथा सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ और किन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद बजट दस्तावेज को अंतिम रूप देकर विधानसभा में पेश करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
यह बजट इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह नई सरकार का पहला व्यापक वित्तीय दस्तावेज होगा। इससे पहले इस वर्ष की शुरुआत में तत्कालीन सरकार ने विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम बजट पेश किया था। चुनाव परिणाम आने के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और अब नई सरकार अपने कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। ऐसे में यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होगा,बल्कि सरकार की नीतिगत दिशा और विकास संबंधी प्राथमिकताओं का भी स्पष्ट संकेत देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार इस बार बुनियादी ढाँचे के विकास पर अधिक निवेश कर सकती है। सड़कों,पुलों,शहरी परिवहन,पेयजल,सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए बड़े आवंटन की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही डिजिटल बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और सरकारी सेवाओं को तकनीक आधारित बनाने के लिए भी कई नई घोषणाएँ की जा सकती हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों के आधुनिकीकरण,नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार,डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों के लिए नई छात्रवृत्ति और कौशल विकास योजनाओं की घोषणा भी बजट का हिस्सा बन सकती है।
कृषि क्षेत्र को भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है। किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार,कृषि उपकरणों पर सहायता,फसल उत्पादन बढ़ाने के उपाय और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने संबंधी योजनाओं पर भी बजट में विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों,ग्रामीण उद्यमिता और कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता का प्रस्ताव आ सकता है।
सरकार राज्य में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में भी सक्रिय है। संभावना है कि बजट में घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की जाए। इसके अलावा हरित ऊर्जा,स्वच्छ प्रौद्योगिकी,इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण,सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।
रोजगार सृजन सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम,उद्योगों के साथ साझेदारी,स्वरोजगार योजनाएँ और नए निवेश के माध्यम से रोजगार बढ़ाने की रणनीति बजट में प्रमुख स्थान पा सकती है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता,महिला उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन योजनाएँ और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के विस्तार की भी उम्मीद की जा रही है।
राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास और कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश कर रही है। बढ़ते विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाना और साथ ही राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती होगी। माना जा रहा है कि बजट में राजस्व बढ़ाने के उपायों के साथ-साथ सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यह बजट आने वाले वर्षों में तमिलनाडु की विकास यात्रा की दिशा तय करेगा। यदि सरकार अपने चुनावी वादों को वित्तीय समर्थन देने में सफल रहती है और साथ ही निवेश,रोजगार तथा बुनियादी ढाँचे पर संतुलित खर्च सुनिश्चित करती है,तो राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
16 जुलाई को होने वाली कैबिनेट बैठक को इसी कारण बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में लिए गए निर्णय न केवल आगामी बजट की रूपरेखा तय करेंगे,बल्कि नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और विकास के विजन को भी स्पष्ट करेंगे। अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा में प्रस्तुत होने वाला यह पहला पूर्ण बजट राज्य के आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकता है,जिस पर उद्योग जगत, निवेशकों,किसानों,कर्मचारियों,छात्रों और आम जनता की समान रूप से नजर रहेगी।
