भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता आज से लागू (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता आज से लागू, निर्यात, निवेश और उद्योगों के लिए खुले नए अवसर

नई दिल्ली,14 जुलाई (युआईटीवी)- भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के प्रभावी होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात क्षेत्र,विनिर्माण उद्योग,सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों,कृषि,मत्स्य पालन और सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर लेकर आएगा। वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन के कई उत्पाद भारतीय बाजार में पहले की तुलना में कम शुल्क पर उपलब्ध हो सकेंगे,जिससे उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलने की संभावना है।

यह समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है,बल्कि निवेश,प्रौद्योगिकी, नवाचार,डिजिटल व्यापार,वित्तीय सेवाओं और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। कई दौर की बातचीत और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार हुए इस समझौते को भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समझौते के लागू होने के साथ ही भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में बड़ी राहत मिलेगी। इस व्यवस्था के तहत भारत को ब्रिटेन की लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (जीरो-ड्यूटी) बाजार पहुँच प्राप्त होगी। इसका अर्थ है कि भारत से निर्यात होने वाले अधिकांश उत्पाद अब ब्रिटेन में बिना आयात शुल्क के पहुँच सकेंगे। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और वे अन्य देशों के मुकाबले अधिक आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हो पाएंगे।

इस समझौते का सबसे अधिक लाभ उन क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है,जो श्रम आधारित उद्योगों पर निर्भर हैं। वस्त्र उद्योग,चमड़ा उद्योग,फुटवियर,समुद्री उत्पाद,रत्न एवं आभूषण, खेल सामग्री और खिलौना उद्योग जैसे क्षेत्रों के लिए यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन उद्योगों में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है और ब्रिटेन के विशाल बाजार तक आसान पहुँच मिलने से इनके उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

इंजीनियरिंग उत्पादों,ऑटोमोबाइल कलपुर्जों और जैविक रसायनों के निर्यातकों को भी इस समझौते का सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर बाजार पहुँच मिलने से भारतीय कंपनियाँ ब्रिटेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेंगी। इससे विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि होने के साथ-साथ देश के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

दूसरी ओर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी यह समझौता कई मायनों में लाभकारी साबित हो सकता है। समझौते के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर सीमा शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी की जाएगी। इनमें स्कॉच व्हिस्की,जिन,चॉकलेट,बिस्कुट,सौंदर्य प्रसाधन और कई अन्य प्रीमियम उत्पाद शामिल हैं। हालाँकि,इन वस्तुओं पर शुल्क में कमी एक साथ नहीं होगी,बल्कि तय समय सीमा के अनुसार धीरे-धीरे लागू की जाएगी।

ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर वर्तमान में लगने वाला 150 प्रतिशत आयात शुल्क पहले चरण में घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा। इसके बाद अगले दस वर्षों में इसे क्रमिक रूप से घटाकर 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इसी प्रकार ब्रिटेन से आयात होने वाले ऑटोमोबाइल पर भी कोटा आधारित व्यवस्था के तहत चरणबद्ध तरीके से शुल्क में कमी की जाएगी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश पहले ही जारी कर दिए हैं। इन नियमों में स्पष्ट किया गया है कि कौन-कौन से उत्पाद इस समझौते के अंतर्गत विशेष शुल्क छूट के पात्र होंगे तथा निर्यातकों और आयातकों को किन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता और सरलता आने की उम्मीद है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत और ब्रिटेन दोनों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने का माध्यम नहीं है,बल्कि निवेश,नवाचार,आधुनिक प्रौद्योगिकी और उद्योगों के बीच सहयोग को भी नई ऊँचाई प्रदान करेगा। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाते हुए ब्रिटेन की कंपनियों के साथ साझेदारी को मजबूत करें और वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति का विस्तार करें।

उन्होंने पहले भी कहा था कि इस समझौते से किसानों,मछुआरों,कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए वैश्विक बाजार के नए द्वार खुलेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उनका मानना है कि महिला उद्यमियों,युवाओं,स्टार्टअप्स और सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों को भी इस समझौते का विशेष लाभ मिलेगा। ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार तक आसान पहुँच मिलने से भारतीय उद्यम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक मजबूती से अपनी पहचान बना सकेंगे।

इस समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था भी है। इसके अंतर्गत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्य करने वाले योग्य भारतीय पेशेवरों को ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें एक निर्धारित अवधि तक दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा अंशदान देने की आवश्यकता नहीं होगी। यह व्यवस्था भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए वित्तीय राहत का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो सकती है।

भारत और ब्रिटेन के बीच इस व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर किए गए थे। इससे पहले दोनों देशों के बीच कुल 14 दौर की विस्तृत वार्ताएं हुई थीं। समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं,जिनमें वस्तुओं का व्यापार,सेवाएँ, डिजिटल व्यापार,वित्तीय सेवाएँ,बौद्धिक संपदा अधिकार,नवाचार,सतत विकास,सरकारी खरीद और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समाहित किया गया है।

समझौते के अंतर्गत भारत भी लगभग 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। इनमें से लगभग 85 प्रतिशत उत्पाद अगले दस वर्षों के भीतर पूरी तरह शुल्क मुक्त हो जाएँगे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में संतुलित वृद्धि होने की संभावना है और निवेशकों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार होगा।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ऐसे समय लागू हुआ है,जब वैश्विक अर्थव्यवस्था नई चुनौतियों का सामना कर रही है और कई देश अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविध बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ पहुँचा सकती है। इससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होगी,बल्कि तकनीकी सहयोग,अनुसंधान,नवाचार और विनिर्माण क्षेत्र में भी नई संभावनाएँ विकसित होंगी।

भारत के लिए यह समझौता विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को भी मजबूती मिलेगी। भारतीय उत्पादों को एक बड़े और विकसित बाजार तक आसान पहुँच मिलने से घरेलू उद्योगों का विस्तार होगा,निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं ब्रिटेन के लिए भी भारत जैसा विशाल उपभोक्ता बाजार निवेश और व्यापार की नई संभावनाएँ लेकर आएगा। दोनों देशों के बीच यह समझौता आने वाले वर्षों में आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भी नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।