वाशिंगटन,16 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति का बचाव करते हुए कहा है कि केवल सैन्य कार्रवाई से न तो होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है और न ही पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की मौजूदा रणनीति सैन्य शक्ति, कूटनीति और आर्थिक दबाव का संतुलित मिश्रण है,जिसका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना,क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित होने से बचाना है।
प्रसिद्ध पॉडकास्ट ‘द जो रोगन एक्सपीरियंस’ में दिए गए एक विस्तृत साक्षात्कार के दौरान जेडी वेंस ने कहा कि किसी भी जटिल अंतर्राष्ट्रीय संकट का समाधान केवल सैन्य ताकत के भरोसे नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सेना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण साधन है,लेकिन कूटनीति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार यदि किसी समस्या का स्थायी समाधान निकालना है,तो संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करना,उनकी चिंताओं को समझना और राजनीतिक समाधान तलाशना आवश्यक होता है।
वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका एक तरफ ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए हुए है,वहीं दूसरी ओर बातचीत के रास्ते भी खुले रखे गए हैं। उनका मानना है कि केवल प्रतिबंध या केवल सैन्य कार्रवाई किसी भी दीर्घकालिक समाधान की गारंटी नहीं दे सकती। इसलिए दोनों उपायों का संतुलित उपयोग करना आवश्यक है।
साक्षात्कार के दौरान जेडी वेंस ने यह भी स्वीकार किया कि जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान की शुरुआत हुई थी,तब वह व्यक्तिगत रूप से इस कदम को लेकर पूरी तरह उत्साहित नहीं थे। हालाँकि,उन्होंने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति के रूप में उनकी संवैधानिक भूमिका राष्ट्रपति को सलाह देना है। अंतिम निर्णय राष्ट्रपति का होता है और निर्णय लिए जाने के बाद सरकार का दायित्व उसे प्रभावी ढंग से लागू करना होता है।
उन्होंने कहा कि उनका दृष्टिकोण यह नहीं है कि किसी फैसले के कुछ ही महीनों बाद उसकी आलोचना शुरू कर दी जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई नीति लागू हो जाती है,तब सरकार के सभी जिम्मेदार लोगों का प्रयास होना चाहिए कि वह नीति सफल हो और उसके घोषित उद्देश्य पूरे किए जा सकें। उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान इसी बात पर है कि मौजूदा रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
जेडी वेंस ने ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह सुरक्षित बनाना,क्षेत्र में हिंसा को कम करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करना था। उनके अनुसार इस प्रारंभिक समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की आवाजाही दोबारा सामान्य होने लगी,जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली।
उन्होंने कहा कि हालाँकि,शुरुआती प्रगति सकारात्मक रही, लेकिन बाद में ईरान के कट्टरपंथी गुटों ने इस प्रक्रिया का विरोध करना शुरू कर दिया। उनके अनुसार इन समूहों को यह आशंका थी कि तेहरान अपने प्रमुख रणनीतिक हितों से पीछे हट रहा है। इसी कारण समुद्री जहाजों पर हमलों की घटनाएं फिर से सामने आने लगीं,जिससे क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया।
वेंस ने कहा कि अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम को बेहद सावधानी से संभाल रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की नीति ‘गाजर और डंडे’ दोनों का इस्तेमाल करने की है। उनके अनुसार जहाँ एक ओर अमेरिका व्यवहारिक और बातचीत के पक्षधर ईरानी नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है,वहीं दूसरी ओर यदि किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि होती है,तो उसका जवाब भी दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत संवेदनशील कूटनीतिक संतुलन है,जिसमें आर्थिक प्रतिबंधों और प्रोत्साहनों का उपयोग परिस्थितियों के अनुसार किया जा रहा है। उनका मानना है कि इस रणनीति से ईरान पर दबाव भी बना रहता है और बातचीत की संभावना भी समाप्त नहीं होती।
उपराष्ट्रपति ने यह दावा भी किया कि ईरान की परमाणु सुविधाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है और वे अभी भी पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाई हैं। उनके अनुसार अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था और इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर जो आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं,वे अब तक सही साबित नहीं हुई हैं। उनके अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से पर्याप्त मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ऊर्जा संकट जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।
जेडी वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े स्थायी समाधान की दिशा में बातचीत अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं और अमेरिका दीर्घकालिक समाधान के लिए संवाद का रास्ता खुला रखना चाहता है। उनका मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से परमाणु विवाद का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति के उन आलोचकों पर भी तीखा हमला बोला जो लगातार अधिक सैन्य कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वेंस ने कहा कि उनके आलोचकों के पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि कई लोग हर समस्या का समाधान केवल बमबारी में देखते हैं,लेकिन वे यह नहीं बताते कि उसके बाद आगे क्या किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी देश पर लगातार सैन्य हमले किए जाएँ,लेकिन उसके बाद राजनीतिक समाधान की कोई योजना न हो,तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है। उनके अनुसार केवल बमबारी करना किसी भी संकट का स्थायी समाधान नहीं है और इस प्रकार की सोच लंबे समय में अधिक समस्याएँ पैदा कर सकती है।
जेडी वेंस ने विशेष रूप से इस संभावना को भी खारिज किया कि अमेरिका ईरान में सरकार बदलने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर जमीनी सेना भेज सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अब उस तरह की नीति का समर्थन नहीं करता,जिसमें किसी दूसरे देश में शासन परिवर्तन के लिए बड़ी सैन्य कार्रवाई की जाए।
उन्होंने लीबिया का उदाहरण देते हुए कहा कि अतीत में ऐसे हस्तक्षेपों के परिणाम दुनिया देख चुकी है। उनके अनुसार किसी देश में सरकार बदलने के लिए बड़े पैमाने पर सैनिक भेजना अक्सर दीर्घकालिक अस्थिरता को जन्म देता है। इसलिए अमेरिका उस रास्ते पर दोबारा नहीं जाना चाहता।
वेंस ने कहा कि अमेरिका ईरान में सरकार परिवर्तन के लिए डेढ़ लाख जमीनी सैनिक नहीं भेजने वाला है। उनका कहना था कि वर्तमान प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना,परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है,न कि किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था को बलपूर्वक बदलना।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस के ये बयान ऐसे समय आए हैं,जब पश्चिम एशिया की स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है,जहाँ से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकता है।
उपराष्ट्रपति के बयान से यह संकेत भी मिलता है कि ट्रंप प्रशासन ईरान को लेकर दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। एक ओर वह सुरक्षा और सैन्य तैयारी को बनाए रखना चाहता है,वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से स्थायी समाधान खोजने की कोशिश भी जारी रखना चाहता है।
फिलहाल अमेरिका की यह नीति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले समय में ईरान के साथ होने वाली आगे की वार्ताओं,होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े घटनाक्रम इस बात को तय करेंगे कि ट्रंप प्रशासन की यह संतुलित रणनीति कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय तक शांति और स्थिरता स्थापित की जा सकेगी।
