डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

अमेरिकी नौसैनिक ताकत को नई धार देने की तैयारी,डोनाल्ड ट्रंप ने शिपबिल्डिंग बढ़ाने के लिए बड़े अभियान का किया ऐलान

वाशिंगटन,16 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की नौसैनिक क्षमता को मजबूत करने और लंबे समय से गिरावट का सामना कर रहे शिपबिल्डिंग उद्योग को फिर से गति देने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार घरेलू स्तर पर जहाजों के निर्माण को तेजी से बढ़ाएगी,शिपयार्डों का आधुनिकीकरण करेगी और जरूरत पड़ने पर विदेशी साझेदारों के साथ मिलकर भी जहाजों का निर्माण कराएगी। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसेना का आधुनिकीकरण और रक्षा औद्योगिक आधार का पुनर्निर्माण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।

पेनसिल्वेनिया डिफेंस एंड इनोवेशन समिट में बुधवार को स्थानीय समयानुसार दिए गए अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि उसके पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना होने के बावजूद उसके कई युद्धपोत पुराने हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि बीते दशकों में अमेरिका जहाज निर्माण के क्षेत्र में अपनी पारंपरिक बढ़त खोता गया है और अब समय आ गया है कि इस स्थिति को बदला जाए। उनके अनुसार,केवल नई तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि तेजी से जहाज तैयार करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अपनी नौसेना के लिए बड़ी संख्या में नए जहाजों की आवश्यकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि देश की नौसेना आज भी दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में गिनी जाती है,लेकिन कई जहाज पुराने हो चुके हैं और उनकी जगह आधुनिक युद्धपोतों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका को भविष्य की चुनौतियों का सामना करना है,तो उसे अपने नौसैनिक बेड़े को आधुनिक बनाना ही होगा।

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ऐतिहासिक फिलाडेल्फिया शिपयार्ड को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रशासन यहाँ दो बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय सुरक्षा जहाजों का निर्माण कराएगा। उनके अनुसार,यह केवल दो नए जहाज बनाने की परियोजना नहीं है,बल्कि अमेरिकी जहाज निर्माण उद्योग को फिर से खड़ा करने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना से भविष्य में और भी बड़े स्तर पर उत्पादन का मार्ग प्रशस्त होगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका केवल घरेलू संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय उन देशों की विशेषज्ञता का भी लाभ उठाने के लिए तैयार है,जिन्होंने जहाज निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण कोरिया का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ की कई कंपनियाँ जहाज निर्माण में अग्रणी हैं और अमेरिका उनके साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जहाज ऐसे भी खरीदे जा सकते हैं,जिनका निर्माण अमेरिका के बाहर हुआ हो,ताकि नौसेना की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी कमजोरी का संकेत नहीं है,बल्कि एक व्यावहारिक रणनीति का हिस्सा है। जब तक घरेलू उत्पादन पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो जाता,तब तक मित्र देशों और सहयोगी कंपनियों के साथ मिलकर काम करना अमेरिका के हित में होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम लक्ष्य अमेरिकी औद्योगिक क्षमता को इतना मजबूत बनाना है कि भविष्य में देश अपनी अधिकांश जरूरतें स्वयं पूरी कर सके।

अपने भाषण में ट्रंप ने अमेरिकी शिपबिल्डिंग उद्योग के पतन के कारणों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका प्रतिदिन एक नया जहाज बनाने की क्षमता रखता था,लेकिन समय के साथ अनेक शिपयार्ड बंद हो गए या उन्हें समुद्र तटीय रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए बेच दिया गया। इसके कारण जहाज निर्माण का मजबूत औद्योगिक ढाँचा कमजोर होता गया। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं था,बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी एक बड़ी चूक साबित हुई।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को एक बार फिर उसी स्थिति में लौटना होगा,जहाँ वह बड़े पैमाने पर और तेज गति से जहाजों का निर्माण कर सके। उनके अनुसार,आधुनिक युद्ध केवल उन्नत हथियारों से नहीं जीते जाते,बल्कि मजबूत औद्योगिक क्षमता और समय पर उत्पादन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश के पास युद्ध के समय पर्याप्त उत्पादन क्षमता नहीं है,तो उसकी सैन्य ताकत भी सीमित हो जाती है।

इस दौरान फिलाडेल्फिया शिपयार्ड की वर्तमान मालिक कंपनी दक्षिण कोरिया की हनवा डिफेंस यूएसए ने भी अपनी भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल कूल्टर ने कहा कि दक्षिण कोरिया में उनकी कंपनी का शिपयार्ड लगभग हर सप्ताह एक नया जहाज तैयार करता है। अब कंपनी का लक्ष्य यही उत्पादन क्षमता फिलाडेल्फिया में भी विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यदि यह योजना सफल होती है,तो फिलाडेल्फिया अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण नौसैनिक निर्माण केंद्रों में शामिल हो जाएगा।

माइकल कूल्टर ने कहा कि जहाज केवल युद्ध लड़ने का माध्यम नहीं होते,बल्कि उनके पीछे मौजूद शिपयार्ड किसी भी देश की वास्तविक सैन्य शक्ति का आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि युद्धपोत लड़ाई जीतते हैं,तो शिपयार्ड युद्ध जीतने की क्षमता तैयार करते हैं। उनके अनुसार,फिलाडेल्फिया को अमेरिकी शिपबिल्डिंग के पुनरुत्थान का केंद्र बनाने के लिए कंपनी बड़े पैमाने पर निवेश और तकनीकी सहयोग करेगी।

समिट के दौरान रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी जनरल डायनेमिक्स ने भी एक महत्वपूर्ण निवेश योजना की घोषणा की। कंपनी ने बताया कि वह अमेरिकी नौसेना के पनडुब्बी कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए रोड्स इंडस्ट्रीज में 2.5 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इस निवेश का उद्देश्य पनडुब्बियों के निर्माण के लिए आवश्यक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।

कंपनी के अध्यक्ष डैनी डीप ने कहा कि इस परियोजना से पेनसिल्वेनिया में लगभग 1,500 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि निवेश से राज्य की औद्योगिक आपूर्ति प्रणाली को मजबूती मिलेगी और वर्जीनिया-क्लास तथा कोलंबिया-क्लास पनडुब्बियों के निर्माण की गति तेज होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में अमेरिकी नौसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूत औद्योगिक ढाँचे का होना अत्यंत आवश्यक है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में नौसैनिक कार्यक्रमों की बढ़ती लागत पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में युद्धपोतों और अन्य रक्षा परियोजनाओं की लागत लगातार बढ़ती गई है। उनके अनुसार,कई बार अत्यधिक जटिल इंजीनियरिंग और अनावश्यक तकनीकी बदलावों के कारण परियोजनाएँ महँगी और समय लेने वाली बन जाती हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की रणनीति में अत्यधिक जटिलता के बजाय विश्वसनीयता,टिकाऊपन और तेज उत्पादन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास गुणवत्ता के मामले में दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक है, लेकिन अब उसे उत्पादन की गति भी बढ़ानी होगी। यदि जहाजों और सैन्य प्रणालियों का निर्माण वर्षों तक चलता रहेगा,तो बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उनका महत्व कम हो सकता है। इसलिए रक्षा उत्पादन में समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ट्रंप ने केवल युद्धपोतों तक ही अपनी योजना सीमित नहीं रखी। उन्होंने पनडुब्बियों, मिसाइलों और अन्य आधुनिक सैन्य प्रणालियों के उत्पादन को भी तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार,आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा वातावरण और अधिक जटिल हो सकता है,इसलिए अमेरिका को अपनी सैन्य तैयारियों को हर स्तर पर मजबूत करना होगा।

उन्होंने कहा कि यह पूरी पहल केवल रक्षा बजट बढ़ाने की योजना नहीं है,बल्कि अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को पुनर्जीवित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग को बढ़ाना,आधुनिक विनिर्माण तकनीकों को अपनाना और रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन क्षमता का विस्तार करना है। उनका मानना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार,औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।

समिट में मौजूद अधिकारियों ने भी इस योजना का समर्थन करते हुए कहा कि भविष्य की सैन्य चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल आधुनिक हथियार पर्याप्त नहीं होंगे। अमेरिका को ऐसे आधुनिक शिपयार्डों की भी आवश्यकता होगी,जो कम समय में बड़ी संख्या में युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म का निर्माण कर सकें। अधिकारियों के अनुसार,नौसैनिक उत्पादन क्षमता में वृद्धि अमेरिका की समुद्री बढ़त बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ी है। ऐसे में अमेरिका अपनी नौसैनिक शक्ति को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़े निवेश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन की यह नई पहल इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है,जिसमें घरेलू उत्पादन,विदेशी तकनीकी सहयोग,निजी निवेश और औद्योगिक आधुनिकीकरण को एक साथ जोड़कर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत रक्षा ढाँचा तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि घोषित योजनाएँ तय समय के अनुसार लागू होती हैं,तो आने वाले वर्षों में अमेरिकी शिपबिल्डिंग उद्योग को नई गति मिल सकती है। इससे न केवल देश की नौसैनिक क्षमता मजबूत होगी,बल्कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार,निवेश और तकनीकी विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका केवल अपनी सैन्य ताकत को बनाए रखना नहीं चाहता,बल्कि जहाज निर्माण और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में फिर से वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार है।