इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (तस्वीर क्रेडिट@ocjain4)

समन अब्बास हत्याकांड में दोषियों की उम्रकैद बरकरार,जॉर्जिया मेलोनी बोलीं- महिलाओं की आजादी से कोई समझौता नहीं

रोम,16 जुलाई (युआईटीवी)- इटली में पाकिस्तान मूल की युवती समन अब्बास की ऑनर किलिंग के बहुचर्चित मामले में सर्वोच्च अपीलीय अदालत के अंतिम फैसले के बाद एक लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई है। अदालत ने समन अब्बास की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए उसके माता-पिता और अन्य परिजनों की सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि सम्मान के नाम पर की जाने वाली हत्या जैसे अपराधों के लिए किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। अदालत के फैसले के बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता,सम्मान और जीवन के अधिकार से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि समन अब्बास की हत्या से जुड़ी दर्दनाक कानूनी कहानी अब अपने अंतिम मुकाम पर पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि समन एक युवा पाकिस्तानी मूल की लड़की थी, जिसकी हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उसने जबरन शादी करने से इनकार कर दिया था और अपने जीवन के बारे में स्वयं निर्णय लेने के अधिकार पर अडिग रही। मेलोनी ने कहा कि किसी भी अदालत का फैसला समन की जिंदगी वापस नहीं ला सकता, लेकिन यह जरूरी था कि इस जघन्य अपराध के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को कानून के अनुसार सजा मिले।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि इटली में उन लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है,जो कथित सांस्कृतिक या धार्मिक कारणों का हवाला देकर महिलाओं की स्वतंत्रता,सम्मान और अस्तित्व को नकारने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार,समानता और गरिमा ऐसे मूल सिद्धांत हैं,जिन पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने समन अब्बास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी संवेदनाएँ पीड़िता के साथ हैं और उन्होंने ईश्वर से उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

समन अब्बास का मामला वर्ष 2021 में पूरे इटली ही नहीं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया था। पाकिस्तान मूल का यह परिवार कई वर्षों से इटली में रह रहा था। समन की उम्र केवल 18 वर्ष थी और वह अपना जीवन अपनी इच्छा के अनुसार जीना चाहती थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,उसके परिवार ने पाकिस्तान में उसके चचेरे भाई के साथ विवाह तय कर दिया था। उस समय समन नाबालिग थीं और उन्होंने इस विवाह का खुलकर विरोध किया। वह अपने भविष्य का फैसला स्वयं करना चाहती थीं और किसी भी प्रकार के पारिवारिक दबाव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थीं।

परिवार के साथ लगातार बढ़ते विवाद के बीच समन ने इटली के सामाजिक सेवा विभाग से सहायता माँगी। अधिकारियों ने उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें नवंबर 2020 में एक सुरक्षित आश्रय गृह में भेज दिया था। इतना ही नहीं,समन ने अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इस कदम को उन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जबरन विवाह से बचने के लिए उठाया था।

हालाँकि,कुछ समय बाद परिस्थितियां बदलीं और 11 अप्रैल 2021 को समन दोबारा अपने परिवार के पास लौट गईं। इसके बाद अचानक वह लापता हो गईं। परिवार की ओर से उनके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई,जिससे पुलिस को संदेह हुआ और जाँच शुरू की गई। शुरुआती दिनों में समन के बारे में कोई ठोस सुराग नहीं मिला,लेकिन जाँच एजेंसियों ने हार नहीं मानी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया।

जाँच के दौरान पुलिस ने समन के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में परिवार के पाँच सदस्य घर से फावड़े, लोहे की रॉड और एक बाल्टी लेकर बाहर जाते हुए दिखाई दिए। लगभग ढाई घंटे बाद वही लोग वापस लौटते भी नजर आए। इस फुटेज ने जाँच को नई दिशा दी और पुलिस का संदेह और गहरा हो गया कि समन के साथ कोई गंभीर अपराध हुआ है।

लंबे समय तक चली जाँच के बावजूद शुरुआती महीनों में समन का कोई पता नहीं चल सका। लगभग डेढ़ वर्ष बाद नवंबर 2022 में इटली के नोवेल्लारा शहर में उनके घर के निकट मानव अवशेष बरामद हुए। फॉरेंसिक जाँच और डेंटल रिकॉर्ड के आधार पर पुष्टि हुई कि ये अवशेष समन अब्बास के ही हैं। इस पुष्टि के साथ यह मामला गुमशुदगी से हत्या के मामले में बदल गया और जाँच एजेंसियों ने आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी।

समन की पहचान की पुष्टि होने के बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वर्ष 2023 में भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि अब इस बात में कोई संदेह नहीं रह गया है कि बरामद अवशेष समन के ही हैं। उन्होंने कहा था कि वह निर्दोष युवती केवल अपनी आजादी के साथ जीवन जीना चाहती थी और उसे न्याय मिलना चाहिए। उनके इस बयान को महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता के रूप में देखा गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अनेक तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। इनमें सीसीटीवी फुटेज,फॉरेंसिक रिपोर्ट,डेंटल रिकॉर्ड और अन्य जाँच संबंधी तथ्य शामिल थे। अदालत ने इन साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए समन की हत्या के लिए उसके परिवार के कई सदस्यों को जिम्मेदार ठहराया।

अब इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत,सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन ने निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखते हुए समन के माता-पिता नाजिया शाहीन और शब्बर अब्बास को हत्या के अपराध में उम्रकैद की सजा कायम रखी है। अदालत ने समन के चचेरे भाइयों इजाज इकराम और नोमानुल हक की उम्रकैद की सजा को भी बरकरार रखा। इसके अलावा उसके चाचा दानिश हसनैन को सुनाई गई 22 वर्ष की कारावास की सजा भी यथावत रखी गई है। इस फैसले के साथ लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है।

इस मामले ने पूरे यूरोप में ऑनर किलिंग,जबरन विवाह और महिलाओं के अधिकारों पर व्यापक बहस को जन्म दिया था। मानवाधिकार संगठनों ने लगातार यह माँग की थी कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी भी युवती को अपनी पसंद से जीवन जीने के कारण हिंसा का सामना न करना पड़े। कई संगठनों ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक परंपराओं या पारिवारिक सम्मान के नाम पर किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार का हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक आपराधिक मामले का अंत नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश भी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की सांस्कृतिक,धार्मिक या पारिवारिक दलील हत्या जैसे अपराध को उचित नहीं ठहरा सकती। कानून सभी नागरिकों को समान सुरक्षा प्रदान करता है और महिलाओं को अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुनने तथा स्वतंत्र जीवन जीने का पूरा अधिकार है।

इटली सरकार भी लंबे समय से महिलाओं के खिलाफ हिंसा,जबरन विवाह और ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं के प्रति सख्त रुख अपनाने की बात करती रही है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का ताजा बयान इसी नीति को आगे बढ़ाता हुआ दिखाई देता है। उन्होंने दोहराया कि महिलाओं की गरिमा और स्वतंत्रता लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी पहचान है और इस सिद्धांत से कभी समझौता नहीं किया जाएगा।

समन अब्बास का जीवन भले ही समय से पहले समाप्त हो गया,लेकिन उनका मामला आज भी दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्न का प्रतीक बना हुआ है। अदालत के अंतिम फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सम्मान के नाम पर की जाने वाली हिंसा किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती। न्यायालय के इस निर्णय और सरकार के स्पष्ट रुख को महिलाओं की सुरक्षा, समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समन अब्बास की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए यह याद दिलाती रहेगी कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है,जब हर व्यक्ति,विशेष रूप से महिलाओं को,भय और दबाव से मुक्त होकर अपने जीवन के निर्णय लेने का अधिकार मिले।